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बाजार में सजा स्वयंवर-हास्य व्यंग्य (bazar men swyanbar-hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 9 hours ago: वैसे तो भारतीय संस्कृति और संस्कारों में लोगों को ढेर सारे दोष दिखाई देते हैं पर फिर भी वह उसमें तमा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, लघुकथा, व्यंग्य, हिन्दी, bharat, Blogging

मिलावट और नकल का आतंक-हास्य व्यंग्य(nakal aur milavat par hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 9 hours ago: आतंक कोई बाहर विचरने वाला पशु नहीं बल्कि मानव के मन में रहने वाला भाव है जो उसके सामने तब उपस्थित हो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

रहीम क दोहे- दिल लगाकर कम करें कामयाबी तय करें (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 9 hours ago: रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय कविवर रहीम के मतानुसार मन ल … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, India, धर्म, सन्देश, दोहे, अनुभूति

शराबी ईमेल-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: उस ईमेल में सबसे ऊपर लगे फोटो में शराब की बोतलें सजी थीं। नीचे संदेश में लिखा था कि ‘कृपया इस ईमेल … more →

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‘सविता भाभी’ से मस्त राम पीछे-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रि … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

मनुष्य के अलावा कोई दूसरा प्राणी समलैंगिक नहीं होता-संपादकीय (ariticle on homsexuality)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: समलैंगिक मामले पर न्यायालय का निर्णय शिरोधार्य! लोगों के अपने दैहिक संबंधों पर स्वयं ही निर्णय करने … more →

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बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →

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आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

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स्त्रियों की कम संख्या उनके प्रति बढ़ते अपराधों के लिये जिम्मेदार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: देश में प्रतिदिन ही महिलाओं के प्रति किये गये अपराध समाचारों की सुर्खियां बन रहे हैं। हालत यह हो ग … more →

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फिर छाने लगा है क्रिकेट का बुखार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: बंदर चाहे कितना भी बूढ़ा हो जाये गुलाट लगाना नहीं भूलता यही कुछ हालत हम भारतवासियों की है। कोई व्यसन … more →

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यहां ठग कौन है-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: ‘एक के तीन’, और ‘दो के छह’ की आवाज कहीं भी सुन लें तो हम भारतीयों के कान खड़े हो जाते हैं यह सोचकर कि … more →

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समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

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नस्लवाद और गुणों का स्वरूप-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: शायद कुछ समाज सुधारकों को यह बुरा लगे पर सच यही है कि इस धरती पर पैदा हर जीव की नस्ल होती है और उसमे … more →

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पिंजर से बाहर झांकता ज्ञान-आलेख चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है क … more →

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चौथे ब्लाग ने भी अर्जित किये चार अंक-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आज बैठे ठाले अपने ब्लाग की पैज रैंक देखने का विचार आया तो पता लगा कि एक अन्य ब्लाग/पत्रिका ई7पत्रिका … more →

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संत कबीर के दोहे: भक्ति और ध्यान एकांत में करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है … more →

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समूह की गुलामी से मुक्ति ही है असली आज़ादी-चिंत्तन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अगर किसी समुदाय का एक जोड़ा अपने किसी दूसरे समुदाय की रीति के अनुसार विवाह करता है तो क्या उस समुदाय … more →

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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-दुष्ट अमीर शासन को परेशान करता है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्र … more →

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चाणक्य नीति-जो विद्या काम की न आये उसे पाना व्यर्थ

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ————————- हर्त ज्ञार … more →

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