Blogs about: Hindi Bharat

सर्वशक्तिमान नहीं पैसा बनाता है जोड़ी-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: कौन कहता है ऊपर वाला ही बनाकर भेजता इस दुनियां में जोड़ी पचास साल के आदमी के साथ कैसे जम सकती है बा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, Blogging, Blogroll, Deepak bapu

प्रतियोगिता से कहीं अधिक वजन जंग में आता है-लघु व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अपने वाद्ययंत्रों के साथ सजधजकर वह घर से बाहर निकला और अपनी मां से बोला-‘‘मां, आशीर्वाद दो जंग पर जा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, bharat, Bloging

रहीम संदेशःहंस के समान मानसिक रूप से दृढ़ होना चाहिए

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: सरवर के खग एक से, बाढ़त प्रीति न धीम पै मराल को मानसर, एकै ठौर रहीम अधिकतर पक्षी एक समान होते हैं। उ … more →

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क्या आतंकी हिंसा अपराध शास्त्र से बाहर का विषय है-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: एक शवयात्रा में दो आदमी पीछे जा रहे थे एक ने कहा-‘बेकार आदमी था। किसी के काम का नहीं था’ दूसरे ने कह … more →

Tags: Blogroll, inglish, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Internet, Education, online jurnalism, Blogging, Friends

चाणक्य नीतिः प्यार में भी चतुराई जरूरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, समाज, हिंदी पत्रिका, bharat, Blogroll, Chanakya, chankya

ब्लागवाणी जैसे हिट किसी के लिये भी सपना-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: ब्लागवानी के लोग सही कहते हैं कि वह लोग शौकिया हैं पर उनको नहीं मालुम वह कई व्यवसायिक लोगों के लिये … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, ताल-बेताल, मस्तराम, व्यंग्य, संपादकीय, समाज, हिन्दी

एक ब्लाग गायब हुआ तो दूसरा प्रकट हो गया-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अपने साफ्टवेयर की सहायता से वर्डप्रेस की पांच श्रेणियों को अपने यहां खिसकाकर ले जाने वाला ब् … more →

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आखिर वह ब्लाग परिदृश्य से गायब हो गया-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आज वह ब्लाग गायब हो गया जो दूसरों के ब्लाग के पाठ चालाकी से अपने यहां ले जाकर अपने यहां सजा रहा था। … more →

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ब्लाग के पाठों पर ही अपनी पहचान लिखनी होगी-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आज मैं एक ब्लाग लेखक का ब्लाग पड़ रहा था जिसमें ब्लाग चोरों के साथ कुछ सहानुभुति दिखाने का आग्रह था। … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, चरित्र, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, संपादकीय, समाज

अंतर्जाल पर चालाकियों का मुकाबला तो करना ही होगा-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही अंतर्जाल लेखक ब्लागरों की शोषण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस काम में जुट … more →

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आखिर उसने इस ब्लाग के पूर्व पाठ की कापी क्यों नहीं की-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आ … more →

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इसे ब्लाग के पाठ की चोरी कहें या चालाकी-आलेख4 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आज एक वरिष्ठ ब्लाग लेखक ने चिट्ठाकार समूह की चर्चा के सूचित किया कि एक ब्लाग चोर और नजर आया है। ऐसी … more →

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इस तरह लगने लगा वहां भी मेला-हास्य कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उदास बैठा था चेला तो गुरू ने उसका कारण पूछा तो वह बोला ‘गुरूजी सभी आश्रम पर भक्तों का लगता है मेला … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, मस्तराम, मातृभाषा, लघुकथा, व्यंग्य कविता

मेहरबानी कर तोहफे में जल्दी दो जुदाई-हास्य हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, कशिश, क्षणिका, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

चाणक्य नीतिःभक्ति एकांत तथा अध्ययन समूह में करना चाहिए1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: 1.धन से धर्म, खाने पीने और योग से विद्या, शक्ति से राज्य तथा गुणवान पत्नी से घर की रक्षा होती है। 2. … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindi Education, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, India, bharat

रहीम के दोहे-प्रेम मे टेढ़ी चाल न चलें

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: फरजी सह न ह्म सकै गति टेढ़ी तासीर रहिमन सीधे चालसौं, प्यादा होत वजीर कविवर रहीम कहते हैं कि प्रेम मे … more →

Tags: अध्यात्म, आलेख, कला, मस्तराम, समाज, सूचना, हिंदी पत्रिका, Blogroll, Deepak bapu

रहीम के दोहे-दीनता के भाव बिना भक्ति का आनंद नहीं मिलता

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते है … more →

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रहीम के दोहेःपशुओं की टांग खाने पर दवा भी लेनी पड़ती है2 comments

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय कविवर रहीम कहते है कि लोग तो … more →

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संत कबीर वाणी:पढ़ना लिखना ही दुःख का मूल कारण1 comment

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: पढ़ै गुनै सीखै सुनै, मिटी न संसे सूल कहैं कबीर कासों कहूं, ये ही दुख का मूल संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →

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