Blogs about: Hindi Bhasakar

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श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

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बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →

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पैसे के साथ इश्क में भी आ सकता है मंदी का दौर - हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →

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उपेक्षासन सीख लो तो तनाव नहीं रहेगा-व्यंग्य 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: हम कपड़े क्यों पहनते हैं? इसके चार जवाब हो सकते हैं 1.सभी कपड़े पहनकर घूमते हैं। 2.हम बिना कपड़े पहन … more →

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भ्रष्ट पात्र किसी कहानी में में केन्द्रीय पात्र क्यों नहीं होता -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: स्वतंत्रता के बाद देश का बौद्धिक वर्ग दो भागों में बंट गया हैं। एक तो वह जो प्रगतिशील है दूसरा वह जो … more →

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दर्द बयां करते हुए हो जाता है भुलावा-व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: चेहरे हैं उनके सजे हुए अपने घर पर उन्होंने पत्थर और प्लास्टिक के फूल सजाये हैं अपनी जुबान से बात करत … more →

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जिंदगी क्या जंग से कम है-लघुकथा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्य … more →

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मौका पड़े तो अपने लिए शैतान खड़ा कर लो-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे … more →

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सहमा शब्द -हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जब बमों की आवाज से शहर काँप जाते हैं बाज़ार में सड़कों पर फैले खून के दृश्य आखों के सामने आते हैं तब … more →

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व्ही.आई.पी. कहलाने की चाहत-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: वैसे तो अपने देख के लोगों की यह पूरानी आदत है कि वह हर तरफ अपने को श्रेष्ठ साबित करना चाहते हैं और अ … more →

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लोगों के मन का सहारा है परनिंदा करना-व्यंग्य आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पा … more →

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पाठक संख्या बीस हजार पार करने की पूर्व संध्या पर कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: मैं अंतर्जाल को एक मायाजाल ही मानता हूं। इसमें मेरे अनुभव अजीब तरह के हैं। अनेक लोग मुझसे मेरे बारे … more →

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शब्दों के फूल कभी नहीं मुरझाये-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कुछ पाने के लिये दौड़ता है आदमी इधर से उधर देने का ख्याल कभी उसके अंदर नहीं आता भरता है जमाने का साम … more →

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उनके लिये जज्बात ही होते व्यापार-हिन्दी शायरी 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कुछ लोग कुछ दिखाने के लिये बन जाते लाचार अपनी वेदना का प्रदर्शन करते हैं सरेआम लुटते हैं लोगों की सं … more →

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हिट की परवाह की तो ब्लाग पर लिखना कठिन होगा-संपादकीय7 comments

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अंतर्जाल वाकई एक बहुत बड़ा मायाजाल है। हिंदी के समस्त ब्लाग एक जगह दिखाये जाने वाले फोरमों पर आपस मे … more →

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भिखारी से साक्षात्कार-लघुकथा5 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल ति … more →

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ख्यालों का बंधन-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: ख्यालों के बंधन में फंसकर उनके इशारों पर नाचते रहे जिंदगी मेंं इसलिये हर कदम पर हारते रहे जो आजाद हो … more →

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संत कबीर के दोहे: भक्ति और ध्यान एकांत में करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है … more →

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चाणक्य नीति-बुरे संस्कार वालों के साथ बैठकर खाना भी न खाएं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ——————- अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्र … more →

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