Lost your password?

Blogs about: Hindi Bhasakar

समन्दर पीने से भी प्यास नहीं बुझेगी (samandar se bhee pyas nahin bujhegee)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Deepak bapu

योगासन, प्राणायाम, ध्यान और धारणा-हिन्दी लेख (hindi lekh on yogasan)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से द … more →

Tags: अनुभूति, आलेख, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep, E-patrika, Family

रामचरित मानस की चर्चा-चिंतन आलेख (ramcharit manas-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: रामचरित मानस लिखने के 387 वर्ष बाद एक संत ने यह शोध प्रस्तुत किया है कि उसमें व्याकरण और भाषा की तीन … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi culture

नए स्वांग और मुखौटे-हास्य व्यंग्य कविताएँ (svang aur mukhaute-hindi satire poem)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: रोज रचते हैं नया स्वांग चेहरे पर लगाते नए मुखौटे और बदलकर आते हैं कपड़े मगर छद्म होकर भी करते हैं हमे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

सेल के रोग का इलाज नहीं-हास्य व्यंग्य कविता (sel rog ka ilaj-hasya vyangyakavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अपने साथ फंदेबाज एक पर्चा लेकर आया और हाथ में देते हुए बोला- ‘दीपक बापू, बूढ़े आदमियों के लिये तैयार … more →

Tags: मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll

जब उनके पुतलों की पोल खुल जायेगी-हिंदी कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पर्दे के पीछे वह खेल रहे हैं सामने उनके पुतले डंड पेल रहे हैं। आत्ममुग्धता हैं जैसे जमाना जीत लिया स … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

खाली ज़ेब का रुआब-हास्य व्यंग्य कविता (khali zeb ka ruaab-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूखी मन गयी दिवाली क्योंकि जेब थी खाली, ज़माने में अपना रुआब दिखाने के लिए सबसे कह रहे हैं”हैप … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

बहस कि कामेडी-हिंदी लघु व्यंग्य (disscusion as a comedy-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उस उद्यान में ज्ञानियों के बीच देश की गरीबी मिटाने के लिये बहस चल रही थी। विषय था देश में गरीबी और श … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

पसंद कि नापसंद-हास्य व्यंग (hindi comedy satire)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: एक सज्जन ने मन्नत मांगी थी कि अगर उनको कभी कहीं से कोई सम्मान प्राप्त होगा तो वह किसी नये कवि का सम् … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Deepak bapu

विदुर नीति- दुष्ट की सलाह पर व्यक्ति चले तो उससे दूर रहें (vidur niti-raja aur dusht ki salah)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: न निह्यवं मन्त्र गचछेत संसृष्टमन्त्रस्य कुसंगतस्य। न च ब्रूयात्रश्वसिमि त्वयीति संकारणं व्यपदेशं तु … more →

Tags: आलेख, कला, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, deshboard

सविता भाभी ने किया सच का सामना-हिन्दी हास्य कविता (savita bhabhi ne kiya sach ka samana-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नाम कुछ दूसरा था पर नायिका सविता भाभी रखकर वह सच का सामना प्रतियागिता में पहुंची और एक करोड़ कमाया। प … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, व्यंग्य, समाज, हास्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

दिल का दिमाग से रिश्ता-हिंदी कविता (dil aur dimag-hindi sahityak kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: दिल में कुछ दिमाग में कुछ जुबां से दूसरे बोल ही निकल आते हैं। दिल का दिमाग से दिमाग का जुबां से रिश् … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, व्यंग्य, समाज, Blogging, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

दोनों तूफान में फंसे थे-हिंदी कविता(rishton men tufan-hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम दोनों तूफान में फंसे थे उनको सोने की दीवारों का सहारा मिला हम ताश के पतों की तरह ढह गये। अब गुजरत … more →

Tags: कला, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

नकली खून और डाक्टर-हास्य व्यंग्य (nakle khoon aur dactor-hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: डाक्टर साहब बाहर ही मिल गये। उस समय वह एक किराने वाले से सामान खरीद रहे थे और हम पहले लेचुके सामान क … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

हिन्दी के कवि और शायर बिना पढ़े ही गीता पर लिखते हैं-हिन्दी आलेख (Hindi poet writes on without reading the Gita - Hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अक्सर अनेक कवितायें, शायरियों गीत, और गद्य रचनायें हमारे सामने आती हैं जिसमें भारतीय धर्म ग्रंथों के … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

पहरेदार-हिंदी लघुकथा/ कहानी (paharedar-a short hindi story)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: एक बेकार आदमी साक्षात्कार देने के लिये जा रहा था। रास्ते में उसका एक बेकार घूम रहा मित्र मिल गया। उस … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

यूँ हुआ सच का सामना-हास्य व्यंग्य (yoon hua sach ka samna-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कविराज अपने घर से दूर उस पार्क में पहुंच गये। घर में बिजली नहीं थी और बरसात की वजह से सारी सड़कें सरा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu

दूसरे की दौलत को धूल समझें-चाणक्य नीति (dusre ki daulat ko dhool samjhen-chankya niti2 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: यो मोहन्मन्यते मूढो रक्तेयं मयि कामिनी। स तस्य वशगो मूढो भूत्वा नृत्येत् क्रीडा-शकुन्तवत्।। हिंदी मे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चाणक्य नीति, ज्ञान, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogroll, Deepak bapu

मिलावट और नकल का आतंक-हास्य व्यंग्य(nakal aur milavat par hindi vyangya)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: आतंक कोई बाहर विचरने वाला पशु नहीं बल्कि मानव के मन में रहने वाला भाव है जो उसके सामने तब उपस्थित हो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS