पुत्राश्च विविधेः शीलैर्नियोज्याः संततं बुधैः। नीतिज्ञा शीलसम्पनना भवन्ति कुलपजिताः।। हिन्दी में भावार्थ-बुद्धिमान व्यक्ति अपने बच्चों को पवित्र कामों में लगने की प्रेरणा देते हैं क्यों श्रद्धावान, चर… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकाwrote 1 year ago: यह कहना कठिन है कि यह … more →
wrote 2 years ago: पुत्राश्च विविधेः शीलैर्नियोज्याः संततं बुधैः। नीतिज्ञा शीलसम्पनना भवन्ति कुलपजिताः।। हिन्दी में भाव … more →
wrote 2 years ago: महात्मा विदुर के अनुसार ——————— इन्याध्ययनदानादि तपः सत्यं … more →
wrote 2 years ago: वह अपने भाषण में गरज़ रहे थे-‘आज हमारे शहर की कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है। कोई भी सुरक्षित … more →
wrote 2 years ago: जातिदेशकालसमयानमच्छिन्नाः सार्वभौमा महाव्रतम्। हिन्दी में भावार्थ-जाति, देश, काल तथा व्यक्तिगत सीमा … more →
wrote 2 years ago: शास्त्रोपस्कृतशब्द सुंदरगिरः शिष्यप्रदेयाऽऽगमा विख्याताः कवयो वसन्ति विषये यस्य प्रभर्निर्धनाः। तज्ज … more →
wrote 3 years ago: संगठित प्रचार माध्यमों की-यथा टीवी, समाचार पत्र पत्रिकायें तथा रेडियो- राष्ट्रनिरपेक्षता बहुत दुःखद … more →
wrote 3 years ago: बाजार में सजे हैं ढेर सारे ख्वाब पैसे से ही खरीदे जायेंगे। एक के साथ एक मुफ्त के दावे हर शय के दाम म … more →
wrote 3 years ago: बात हो गयी पुरानी, नहीं लगती अब दिल को सुहानी, कि मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे कराते आपस में बैर जबकि … more →
wrote 3 years ago: कौटिल्य महाराज के अनुसार ________________ ये प्रियाणि प्रभाषन्ते प्रयच्छन्ति च सत्कृतिम्। श्रीमन्तोऽ … more →
wrote 3 years ago: धरती के सितारों को अपने सितारों की फिक्र नहीं जितनी कि उनके चेहरे, अदायें और मुद्रायें बेचने वालों क … more →
wrote 3 years ago: कौटिल्य महाराज के अनुसार —————————- उच्चेरुच्च … more →
wrote 3 years ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →
wrote 3 years ago: क्षान्तिश्चत्कवचेन किं किमनिरभिः क्रोधीऽस्ति चेद्दिहिनां ज्ञातिश्चयेदनलेन किं यदि सहृदद्दिव्यौषधं कि … more →
wrote 3 years ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ————————- सत्यत्वे न शशा … more →
wrote 3 years ago: ग्रहीत्वां दक्षिणां विप्रास्त्यजन्ति यजमानकम्। प्राप्तविद्यां गुरुं शिष्या दग्धाऽरण्यं मृगास्तथा। हि … more →
wrote 3 years ago: अजीब लगता है धर्म विषयक उन बहसों से एक आम व्यक्ति के रूप में जुड़कर जो समय समय पर प्रचारतंत्र में सुन … more →
wrote 3 years ago: परकार्यविहन्ता च दाम्भिकः स्वार्थसाधकः। छली द्वेषी मृदः क्रूरो विप्रो मार्जार उच्यते।। हिंदी में भाव … more →
wrote 3 years ago: सम्पन्नतरमेवान्नं दरिद्र भुंजते सदा। क्षुत् स्वादुताँ जनयति सा चाढ्येषु सुदुर्लभा।। हिंदी में भावार् … more →