दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: नीति विशारद विदुर महाराज कहते है कि अस्तयागात् पापकृतामापापांस्तुल्यो दण्डः स्पृशते मिश्रभावात्। शुष … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत्। खग चीतफल वृक्षं भुक्त्वा चाऽभ्यागता गृहम्।। हिंदी मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ————— न हायनैर्न पालितैर्न वित्तेन न बंधुभिः । ऋ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितम् छादनमज्ञतायाः। विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितना … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाय उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसौ जाय कविवर रहीम कहते हैं कि गंदे स … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः।। नीति विशारद चाणक्य कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बोलने से न बोलना अच्छा बताया गया है, किन्तु सत्य बोलना भी एक गुण है। चुप या मौन रहने से सत्य बोलना … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कृशः काणः खञ्ज श्रवणरहितः पुच्छविकलो व्रणी पूयक्लिनः कृमिकुलशतैरावुततनु क्षुधाक्षामो जीर्णः पिठरककाप … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: रहिमन धोखे भाव से, मुख से निकले राम पावत पूरन परम गति, कामादिक कौ धाम कविवर रहीम कहते हैं कि अगर धो … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कबीर तो सांचै मतै, सहै जू सनमुख वार कायर अनी चुभाय के, पीछे झखै अपार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: विरहेऽपि संगमः खलु परस्परं संगतं मनो येषाम् हृदयमपि विघट्टितं चेत्संगी विरहं विशेषयति हिंदी में भाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: 1.निरोग रहना, ऋणी न होना, विदेश में रहना, अच्छे लोगों के साथ मेल होना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना औ … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: संपति भरम गंवाइ के, हाथ रहत कछु नाहिं ज्यों रहीम ससि रहत है, दिवस अकासहिं मांहि कविवर रहीम … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: रहिमन चाक कुम्हार को, मांगे दिया ना देह छेद में डंडा डारि कै, चहै नांद लै लेइ कविवर रहीम कह्ते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: 1.इस संसार में गुणी व्यक्ति का सम्मान सभी जगह पाया जाता है, भले ही वह अर्थाभाव से पीड़ित हो। भारी धन … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आर्तस्तु कुर्यात्स्वस्थ: सन्यथाभाषितमादित:। स: दीर्घस्यापि कालस्य तल्लभेतैव वेतनम।। मनु स्मृति के इस … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →