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	<title>hindi-blogs &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/hindi-blogs/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "hindi-blogs"</description>
	<pubDate>Wed, 14 May 2008 10:59:00 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[मेरा सपना को 50000 लोगो ने सहलाया]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/11/02/merasapna-achieves-50000jit/</link>
<pubDate>Fri, 02 Nov 2007 12:33:16 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
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<description><![CDATA[आज मैं खुश हू. जब मैंने ब्लॉग लिखना शुर]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>आज मैं खुश हू. जब मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया था टू कुछ सोच के नही शुरू किया था. लिखने पढने की आदत ने ब्लॉग बना दिया और लिखता गया. आज इसका हिट काउंटर 50000 के पार हो गया. जो कम से कम मुझे तो हतप्रभ कर रहा है. इस बीच गूगल का पीआर रैंक भी 4 हो गया है. ये सब अच्छी चीजे हैं. लेकिन इंटरनेट को मैं जितना समझ पता ह उसमे यह कंटेंट हमेशा किंग होता है.</p>
<p>इसमे लिखे गए <a target="_blank" href="http://merasapna.wordpress.com/2007/05/09/hame-masti-aur-sex-chahiye/" title="indian netzens">हमे मस्ती और सेक्स चाहिए</a> और <a target="_blank" href="http://merasapna.wordpress.com/2007/03/25/shakira-ke-thumke/" title="shakira">शकीरा.. </a>इन दो पोस्ट पर ही केवल ५००० से जायदा हिट मिले हैं. जो मुझे थोड़ा दुखी करता है है. मैं यह नही चाहता की लोग ऐसे कीवर्ड से ब्लॉग पर आए. इसी पोस्ट पर आए लेकिन किसी और कीवोर्ड के साथ, तब मुझे खुशी होगी.</p>
<p>खैर फिलहाल तो मैं अब अपने दुसरे ब्लॉग <a target="_blank" href="http://rajeshroshan.com" title="rajesh roshan">राजेश रोशन डॉट कॉम</a> पर लिखता हू. जिसपर मैंने हिट काउंटर नही लगाया हुआ है. क्योंकि ब्लॉग के अच्छे होने या न होने का यह कोई पैमाना नही है. तो मेरे दोस्तो लिखते रहिये अच्छा लिखिए. हिट पाने के लिए मत लिखिए. अच्छा लिखेंगे हिट आपको ख़ुद ब ख़ुद मिलेंगे. :)</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[चिट्ठा चोर या 'भूखा' चिट्ठेकार]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/08/20/internet-thievs/</link>
<pubDate>Mon, 20 Aug 2007 09:01:04 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/08/20/internet-thievs/</guid>
<description><![CDATA[देखने का नजरिया अलग है। किसी ने अगर आल]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="left">देखने का नजरिया अलग है। किसी ने अगर आलोक पुराणिक जी के चिट्ठे से दो पोस्ट हू बहू कापी कर अपने चिट्ठे में डाल दिया तो क्या वह चोर हो गया? आप कहते होंगे, मैं उसे नहीं मानता। मैं उसे उसकी भूख मानता हूं।</p>
<p align="left"><a target="_blank" href="http://merasapna.wordpress.com/2007/08/19/identity-crisis-in-indians/" title="identity crisis">आइडेंटिटी क्राइसिस की भूख। </a>वह अच्छा लिखना नहीं जानता। क्रिएटिविटि नहीं है उसके पास। तो क्या करे! हम आप जो लिखते हैं उसका विचार हम अपने आस पास से लेते हैं। कोई कहीं के लिखे हुए एक लाईन से ही पूरी पोस्ट लिख देता है। कोई कुछ करता है तो कोई कुछ।</p>
<p align="left">अभी कुछ दिन पहले मुझे एक चिट्ठेकार ने एक लिंक देकर यह बताया गया कि इस चिट्ठेकार ने कईयों की पोस्ट को अपने नाम से पब्लिश कर दी है। मैंने कहा यह तो बड़ी अच्छी बात है। मुफ्त में प्रचार हो रहा है। हां, वो अलग बात है कि आपका नाम नहीं दिया गया है। कोई बात नहीं। आपको पढ़ने वाले आपकी लेखनी को जानते हैं। नाहक आप परेशान ना होईए।</p>
<p align="left">उन्होंने कहा कि यह तो गलत बात है कि बिना नाम दिए उसने यह सब काम कर दिया। मैंने कहा गलत तो है लेकिन आप कुछ कर नहीं सकते। और करना भी नहीं चाहिए। तब तक जब तक वह आपका प्रतियोगी ना बन जाए।</p>
<p align="left">आपका लिखा हुआ पोस्ट अगर कोई दूसरा पब्लिश करता है तो वह बेचारा 'भूखा' है। आपने उसे खाना दिया है। ठीक है कि वह आपका नाम नहीं ले रहा है, लेकिन दिया आपने ही है। जिसे सब लोग जानते हैं।</p>
<p align="left">इसलिए शोर मत मचाइए, भूखे को खाना देना पुण्य की बात है। खुश हो जाइए। इसमें आपका कोई नुकसान नहीं हो रहा है।</p>
<p><span class=" transl_class"><span class=" transl_class">नोट: </span>(आलोक</span> <span class=" transl_class">पुराणिक</span> <span class=" transl_class">जी</span> <span class=" transl_class">का</span> <span class=" transl_class">नाम</span> <span class=" transl_class">मात्र</span> <span class=" transl_class">उदाहरण</span> <span class=" transl_class">के</span> <span class=" transl_class">लिए</span> <span class=" transl_class">दिया</span> <span class=" transl_class">गया</span> <span class=" transl_class">है)</span></p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[चौंकाने वाले आंकड़े!]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/08/04/growing-hindi-blogs/</link>
<pubDate>Sat, 04 Aug 2007 07:26:56 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/08/04/growing-hindi-blogs/</guid>
<description><![CDATA[लिखने पढ़ने की आदत ने पहले पत्रकार बना]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://merasapna.wordpress.com/files/2007/08/blogvisitor.gif" title="blog visitors"></a>लिखने पढ़ने की आदत ने पहले पत्रकार बनाया और अब ब्लागर। इन दोनों मामलों में मैं अभी नया हूं। पत्रकारिता करते हुए महज दो साल हुए हैं। ब्लागिंग करते हुए 7 महीने।</p>
<p>आज एक लिंक ने मेरा बरबस मन खींच लिया। वर्डप्रेस पर <a target="_blank" href="http://botd.wordpress.com/2007/08/04/growing-blogs-465/" title="Botd">रोजाना ब्लाग</a> की रैंकिंग की जाती है। वहां की लिंक से आज की तारीख में मेरा सपना में कुल दो लोग आए। तो मुझे पता चला कि वर्डप्रेस पर बने ब्लागस पर मेरा सपना 67वें नंबर पर है।</p>
<p>अंग्रेजी के बीच हिंदी के दो ब्लाग टाप 100 में हैं। अमित जी का <a target="_blank" href="http://itsme.wordpress.com/" title="Amit Gupta's blog">'दुनिया मेरी नजर से' </a>से 71वें नंबर पर है। इंटरनेट के बारे में जो मेरी जानकारी है वह कहती है कि 'कंटेंट इज किंग'।</p>
<p>अगर आपके पास अच्छा कंटेंट है और इंटरनेट के दांव पेंच को थोड़ा बहुत भी जानते हों तो आप ही राजा हैं। आप लोगों के लिए मेरा सपना पर प्रतिदिन आने वाले लोगों का एक ग्राफ।</p>
<p><a href="http://merasapna.wordpress.com/files/2007/08/blogvisitor.gif" title="blog visitors"><img src="http://merasapna.wordpress.com/files/2007/08/blogvisitor.thumbnail.gif" alt="blog visitors" /></a></p>
<p>लिखिए और मस्त लिखिए। मुझे पूरा विश्वास है आने वाला समय हम हिंदी वालों का ही है।</p>
<p>मेरा एक दोस्त मुझे इन सब को देखकर कह रहा है कि अपने मुंह मियां मिठ्ठू बनना। मैंने उसकी बात को सही मान ली। आप भी ऐसा कह सकते हैं। लेकिन मैं सच बताऊं मैं आत्ममुग्ध कम होता हूं।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[कमेंट डालने पर ताला मत लगाईए]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/22/auto-updation-comment/</link>
<pubDate>Sun, 22 Jul 2007 11:10:41 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/22/auto-updation-comment/</guid>
<description><![CDATA[लोगों को इसके बारे में पता तो होगा ही। ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>लोगों को इसके बारे में पता तो होगा ही। अभी-अभी मैंने किसी पोस्ट पर कमेंट दिया और वो कहता है कि बाद अप्रूवल मिलने के बाद कमेंट को अपलोड किया जाएगा। क्यों?? कुछ समझ नहीं आया।</p>
<p>लोग अपने घर में ताला लगा कर रखते हैं कि कोई गलत आदमी प्रवेश ना करे। कुछ चुरा के कोई ना ले जाए। आप कहीं गालियों से डर कर तो यह मोडरेशन नहीं लगा रखा है? अगर हां तो एक बात बता दूं, आप सभी लोगों को कि <strong>आप जब किसी के बारे में कुछ बोलते हैं तो आप उस शख्स से कहीं ज्यादा अपने बारे में बता रहें होते हैं कि आप कौन और क्या हैं।</strong></p>
<p>इसलिए डरना छोड़िए आटो अप्रूवल को ऑन कर दीजिए। अगर किसी को तकनीकी परेशानी हो तो <a target="_blank" href="http://epandit.blogspot.com/" title="Shrish ji">श्रीश जी</a> आपकी मदद के लिए हमेशा तैयार हैं। यह मैंने उनसे बिना पूछे लिखा है क्योंकि मुझे उनके बारे में जो पता है वह यह बताती है कि श्रीश जी चिट्ठेकारों के मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[दिल्ली ब्लॉगर मीट: बतियाते बतियाते सांझ हो गई]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/15/delhi-bloggers-meet/</link>
<pubDate>Sun, 15 Jul 2007 04:37:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/15/delhi-bloggers-meet/</guid>
<description><![CDATA[अखबार के दफ्तर में हर सोमवार मीटिंग हो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p align="left">अखबार के दफ्तर में हर सोमवार मीटिंग होती है। साथ में चाय-नास्ता भी होता है। बड़ा मजा आता है। चाय नास्ता करने में। मीटिंग में क्या मजा आएगा!</p>
<p align="left">लेकिन कल पहले कैफे काफी हाऊस और बाद में <a target="_blank" href="http://www.cafehindi.com/" title="Maithily Gupt">मैथिली जी</a> के यहां मिले। भई मुझे तो मजा आ गया। गणित में थोड़ा कमजोर हूं, गिनती नहीं कर पाया कितने लोग थे। वैसे जो भी थे मजेदार थे।</p>
<p align="left">चाय और काफी की चुस्कियां लेने के बाद अमिताभ जी ने हमलोगों को 500 कैलोरी वाला लड्डू खिलाया। <a target="_blank" href="http://lokmanch.com/hindi/index.php?option=com_contact&#38;task=view&#38;contact_id=7&#38;Itemid=3" title="amitab ji">अमिताभ जी</a> को मुबारकबाद दीजिए, उनको घर लक्ष्मी जी आई हैं। नया मेहमान आई हैं। उन्हें लड़की हुई है। उसके बाद हम हो चले मैथिली जी के यहां। बाजार के जानकार <a target="_blank" href="http://puranikalok.blogspot.com/" title="Alok Puranik">आलोक पुराणिक</a> जी जिस बात को बताने के लिए $$$ लेते हैं वो हमने मुफ्त में जान लिया। बाजार किस तरीके से काम करता है, डिमांड एंड सप्लाई का पुराना गुरु मंत्र भी। भई सभी धुरंधर लोग जो पहुंचे थे।</p>
<p align="left">उसके बाद खाने का दौर चला। कैलोरी 2900। <a target="_blank" href="http://itsme.wordpress.com/" title="Amit Gupta">अमित जी</a> की साईज में तो बैठे-बैठे अंतर आ गया। सबने अपने अपने विचार रखे। हिंदी के उत्थान की बातें हुई। लोगों ने हिंदी को बढ़ाने के लिए तकनीकी, लेखन सामग्री की विविधता और ऐसे लेखन के बारे में बात की जो कालजयी हों।</p>
<p align="left">परिचर्चा की बात उठी, चूंकि मैं परिचर्चा में शामिल नहीं होता हूं इसलिए मुझे कुछ खास समझ नहीं आ रहा था। लेकिन अब मैं कोशिश करूंगा कि परिचर्चा में भाग लूं।</p>
<p align="left">अंत में पता चला कि यह गोष्ठी या मिलन <a target="_blank" href="http://www.blogvani.com/" title="Blogvani official site">ब्लागवाणी</a> के आफिशियल या नान आफिशियल शुरुआत के नाम की जाए। तो यह थी बतियाते-बतियाते सांझ हो गई का छोटा विवरण। बड़ा आपके सामने जल्द ही चित्रों के साथ प्रस्तुत होगा।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[ब्लागिंग से सड़क तक, सब अहम की लड़ाई लड़ रहे हैं!]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/11/aham-ki-ladai-road-se-sadak-tak/</link>
<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 07:00:37 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/11/aham-ki-ladai-road-se-sadak-tak/</guid>
<description><![CDATA[मुझे तो ऐसा ही लगता है। जिसको ना लगता ह]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे तो ऐसा ही लगता है। जिसको ना लगता हो अपनी असहमति जरूर दर्ज कराएं। साथ में कारण बताएं।</p>
<p>अहम। एक से बढ़कर एक। पेशेवर ड्राइवरों में तो जबरदस्त होती है। वह मेरे से आगे कैसे निकल सकता है। मैं उसे साईड ही नहीं दूंगा। या फिर उसे 'साईड' ही लगा दूंगा।</p>
<p>सड़क दुर्घटना की खबर सुनकर मैं थोड़ा परेशान हो जाता हूं। लेकिन भागते दौड़ते शहर में यह रोज होता है और मैं जिस पेशे से जुड़ा हूं वहां रोज दस दुर्घटना की खबर आपको पढ़ने को मिलेगी। इनसब में से कई दुर्घटनाओं की मूल वजह <strong>अहम</strong> ही होती है।</p>
<p>ब्लागिंग में भी यही हो रहा है। कोई किसी को मेल कर रहा है कोई किसी के बारे में लिख रहा है तो कोई किसी के बारे में। लेकिन कोई भी गलती को नहीं देख रहा है। बहस होने पर तमाम तरीके के जस्टीफिकेशन। अहम ही इसकी जड़ है। वैसे इतना जरूर जानता हूं कि यह अच्छी बात नहीं है।</p>
<p>एक ब्लागर दूसरे को साईड नहीं देना चाहता। 'साईड' लगा देना चाहता है। <strong>लोगों ने गुट बना लिए हैं। मैं इसके गुट का और वो उसके गुट का</strong>। भई साहब मैं किसी गुट का नहीं हूं। मुझे बख्शे। मुझे लिखने की आदत है।</p>
<p>वैसे ऐसा नहीं है कि मैंने सड़क और ब्लागिंग के बारे में लिखा है तो अहम की लड़ाई केवल यहीं है। छोटे बड़े रूप में सभी जगह है।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[टिप्पणी में पहचान छुपाने वाले चिट्ठेकार!]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/09/comments-and-hindi-bloggers/</link>
<pubDate>Mon, 09 Jul 2007 07:06:43 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/09/comments-and-hindi-bloggers/</guid>
<description><![CDATA[चूंकि मैंने ऐसा कभी किया नहीं तो इसका ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>चूंकि मैंने ऐसा कभी किया नहीं तो इसका ठीक-ठीक अंदाजा मुझे नहीं पता। हां! इधर मेरे पोस्ट पर बेनाम टिप्पणियां कुछ आ रही हैं। मैंने जानना चाहा और मैं जान गया कि वह कौन है। <strong>आईपी सबकुछ बता देता है।</strong></p>
<p>खैर इसके पीछे का मतलब मैं समझ नहीं पाया। मुझे नहीं लगता कि मेरे से कोई डरता होगा। फिर..! शायद वह अपने आप से डरता होगा। हां, यह जरूर हो सकता है। वह अपने आप से ही डरता होगा।</p>
<p>मैंने कई पोस्ट में बेनाम टिप्पणियां देखी हैं और बार यही सोचता था कि यह लोग ऐसी हरकतें क्यों करते हैं। आप ऐसा काम क्यों करते हैं जिससे आपको अपनी पहचान छुपानी पड़ती है। जो लिखे खुल कर लिखें। हां, गालियां तो खुल कर नहीं लिखी जा सकती हैं तो ऐसा करें कि थोड़ी लिखने की प्रैक्टिस करें गालियों से <span class=" transl_class">ज्यादा </span>धार दार लिखावट लिखनी आ जाएगी। लेकिन कृप्या बेनाम टिप्पणी लिखना बंद करें। शायद आप बेनाम लोग समझ रहे होगें।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[क्या हिन्दी के चिट्ठेकार बेकार की चर्चा ज्यादा करते हैं?]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/08/hindi-bloggers-and-useless-talks/</link>
<pubDate>Sun, 08 Jul 2007 07:13:58 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/08/hindi-bloggers-and-useless-talks/</guid>
<description><![CDATA[यहां किसी का नाम लेना अच्छा नहीं होगा ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>यहां किसी का नाम लेना अच्छा नहीं होगा लेकिन मैंने महसूस किया है कि हिंदी के चिट्ठेकार ने अपनी दुनिया को काफी सीमित कर रखा है। यहां लोगों के कई पोस्ट किसी आम नेटिजन को समझ भी नहीं आएंगे। क्यों? क्योंकि वह पोस्ट नारद, नारद पर विवाद, किसी दूसरे चिट्ठा के बारे में लिखा गया है।</p>
<p>वैसे ब्लाग का मतलब तो यही होता है कि ब्लागर जो चाहे वो मर्जी लिखे। लेकिन सार्थकता की कोई बात करेगा? क्या इन विषयों पर धड़ाधड़ पोस्ट लिखना सार्थक है।</p>
<p>मैं ऐसा इसलिए लिख रहा हूं कि मेरा एक दोस्त जो मेरा ब्लाग पढ़ता है उसने मुझे कहा कि यह नारद का एकाधिकार खत्म होगा! इस पोस्ट का क्या मतलब है। फिर मैंने उसे विस्तार से बताया। तब मैंने सोचा कि ऐसे कई ब्लाग हैं जो नियमित रूप से यही लिखते हैं। नि:संकोच उन सभी लोगों में रचानात्मकता है लेकिन क्या वह अपनी रचानात्मक शैली को सही दिशा में लगा रहे हैं?</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नारद का एकाधिकार खत्म होगा!]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/03/narad-ki-monopoly-khatam-hogi/</link>
<pubDate>Tue, 03 Jul 2007 07:26:05 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/07/03/narad-ki-monopoly-khatam-hogi/</guid>
<description><![CDATA[अर्थशास्त्र का छात्र रहा हूं। मोनोपो]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>अर्थशास्त्र का छात्र रहा हूं। मोनोपोली या एकाधिकार बाजार के लिए कभी अच्छा नहीं होता। यह सभी लोग जानते हैं। हां यह जरूर है कि <a target="_blank" href="http://narad.akshargram.com/" title="Narad">नारद</a> बाजार नहीं है क्योंकि इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पैसे की उगाही होती हो। लेकिन फिर भी नारद का काम करने का तरीका हमेशा विवादों में रहा है।</p>
<p>पिछले दो दिनों में मैंने दो एग्रीगेटर देखे हैं। मैंने नहीं जानता कि यह क्यों बनाया जा रहा है? वह भी तब जब नारद 'बाजार' नहीं है। साथ ही जो आने वाले एग्रीगेटर हैं वह भी बाजार की खूबियों से दूर रहेंगे। फिर इनकी जरूरत क्यों?</p>
<p>नारद में कुछ ना कुछ कमी रही होगी जिसे नारद के कर्ता धर्ता शायद नहीं समझ पा रहें हैं। पहले प्रतीक पांडे ने <a target="_blank" href="http://www.filmyblogs.com/hindi.jsp" title="Hindiblogs">हिंदी ब्लाग्स</a> बनाया और अब <a target="_blank" href="http://chitthajagat.in" title="Chitthajagat">चिट्ठाजगत</a> और <a target="_blank" href="http://www.blogvani.com" title="Blogvani">ब्लागवाणी</a>।</p>
<p>बात सेक्स क्या को जोड़ने को लेकर हो या फिर राहुल का बाजार को हटाने को लेकर। सब काम कुछ दो-तीन लोग ही करते हैं। सदस्यों से तो ना कोई राय ली जाती है ना ही कोई मशविरा।</p>
<p>वैसे हिन्दी ब्लागिंग में नारद की भूमिका सराहनीय है। लेकिन समय के साथ होने वाले बदलावों के प्रति शायद नारद उतना गंभीर नहीं है और इसका कारण है यह आने वाले फीड एग्रीगेटर। कोई कहीं ना कहीं असंतुष्ट है इसी के कारण यह सारे एग्रीगेटर लाए जा रहे हैं।</p>
<p>खैर जो कुछ भी हो रहा है इससे मैं इतना ही समझ पा रहा हूं कि इंटरनेट पर हिंदी की वर्चस्वता बढ़ेगी।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नारद, गूगल, विवाद, इस्तीफा और भी ना जाने कई..]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/19/narad-vivad-google-isthifa/</link>
<pubDate>Tue, 19 Jun 2007 06:20:12 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/19/narad-vivad-google-isthifa/</guid>
<description><![CDATA[जब भी आप बच्चे से पूछो कि आप क्या बनना च]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>जब भी आप बच्चे से पूछो कि आप क्या बनना चाहते हैं तो बेटा, पहले तो बोलेगा नहीं और अगर बोलेगा तो पुलिस, इंजीनियर, डाक्टर, पायलट से बाहर बोल ही नहीं पाएगा। यहीं तक उसकी समझ है।</p>
<p>मुझसे भी कई बार पूछा जाता था कि मैं क्या बनना चाहता था मैं तो बोल ही नहीं पाता था। अंजान लोगों को नहीं बता पाता था। मां पूछती थीं, तो बोलता था पुलिस।</p>
<p>अब पत्रकार हूं। पढ़ने-लिखने की आदत ने पत्रकार बना दिया नहीं तो हम भी शायद..।</p>
<p>अरे! मैं यह क्या लिख रहा हूं? मैंने शीर्षक तो कुछ और लगाया है इससे मिलता तो मैं कुछ लिख नहीं रहा फिर इस शीर्षक का मतलब! है मतलब, बताता हूं। कंप्यूटर जानकार इसे एसईओ कहते हैं, सर्च इंजन आपटिमाइजेशन।</p>
<p>यह जो मैंने शीर्षक में शब्द लगाए हैं यह नारद के पोपुलर हेडिंग कीवर्ड हैं। नारद, विवाद, गूगल, गूगल देव, प्रकरण, इस्तीफा व अन्य। केवल कल ही ना जाने कितने लोगों ने अपने शीर्षक में नारद शब्द का शीर्षक में प्रयोग किया था। आप कुछ भी लिखिए शीर्षक में इन शब्दों का इस्तेमाल होना चाहिए। मेरी गणना के अनुसार आपको कम से कम 20 क्लिक तो मिल ही जाएंगे।</p>
<p>एक ब्लोगर है <a target="_blank" href="http://neerajrajput.blogspot.com/" title="Neeraj Rajput">नीरज राजपूत</a> अच्छा लिखता है लेकिन उसे कोई नहीं पढ़ता। हां, कभी कभार <a target="_blank" href="http://kaviparichay.blogspot.com/2006/12/blog-post.html" title="Rajeev Ranjan">राजीव रंजन जी</a> पढ़ते हैं और टिप्पणी भी करते हैं।</p>
<p>तो भाइयों मैं कहना चाहता हूं कि आप बड़े नामों से ऊपर उठे नए चिट्ठेकारों की हौसला आफजाई करें। शीर्षक पर ना जाएं। कूड़ा भी मिल सकता है जैसे यहां मिला। बात समझ में आ गई ना।</p>
<p>वैसे एक बात और बता दूं। 'नारद' और 'नारद विवाद' दोनों कीवर्ड मुझे गूगल में टाप फाइव में जगह देता है। ना विश्वास हो तो सर्च कर लें।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[भाईचारा बढ़ाइए: लिंक एक्सचेंज करिए]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/18/bhaichara-badhaiye-link-exchange-kariye-2/</link>
<pubDate>Mon, 18 Jun 2007 08:11:10 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/18/bhaichara-badhaiye-link-exchange-kariye-2/</guid>
<description><![CDATA[ 
इसका खास उद्देश्य है भाईचारा को बढ़ा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><img src="http://merasapna.wordpress.com/files/2007/06/peacenotwar.gif" alt="Peace not War" /> </p>
<p>इसका खास उद्देश्य है भाईचारा को बढ़ावा देना। इधर वैसे भी माहौल गर्म है तो मैंने सोचा कि क्यों ना कोई तरकीब सोची जाएं। तो ऐसा करते हैं मैं अपने ब्लागरोल में आप सभी टिप्पणी देने वाले लोगों के ब्लाग को अपने में जोड़ दूंगा। क्या पता शायद इसी से कुछ सुधर जाए।</p>
<p>वैसे यह बात जरूर है कि कई बार ब्लागरोल लिंक होते हुए भी विचार नहीं मिलते इसके लिए कोई आइडिया तो आप भी सोच सकते हैं। उद्देश्य है सभी के बीच शांति फैलाना। मेरा डोमेन आप जोड़े और मैं आपका।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA['शिवाजी' ने 'मेरा सपना' को गूगल पर टाप पर पहुंचाया]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/18/shivaji-mera-sapna-and-google/</link>
<pubDate>Mon, 18 Jun 2007 06:42:02 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/18/shivaji-mera-sapna-and-google/</guid>
<description><![CDATA[मैंने 15 जून को एक पोस्ट लिखी &#8216;शिवाजी]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने 15 जून को एक पोस्ट लिखी '<a target="_blank" href="http://merasapna.wordpress.com/2007/06/15/real-action-hero-rajnikant-ki-shivaji-realease/" title="Mera sapna and shivaji">शिवाजी</a>' फिल्म के ऊपर और आज क्या देखता हूं कि गूगल पर शिवाजी लिख कर सर्च करने पर 'मेरा सपना' सबसे ऊपर है।</p>
<p>मेरे लिए यह बड़ी बात है वो भी तब जब टाप 10 में विकिपीडिया और बीबीसी जैसे धुरंधर खड़े हों।</p>
<p>धन्यवाद गूगल</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[भाईचारा बढ़ाइए: लिंक एक्सचेंज करिए]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/17/bhaichara-badhaiye-link-exchange-kariye/</link>
<pubDate>Sun, 17 Jun 2007 09:32:26 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/17/bhaichara-badhaiye-link-exchange-kariye/</guid>
<description><![CDATA[
इसका खास उद्देश्य है भाईचारा को बढ़ाव]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://merasapna.wordpress.com/files/2007/06/peacenotwar.gif" title="Peace not War"><img src="http://merasapna.wordpress.com/files/2007/06/peacenotwar.gif" alt="Peace not War" /></a></p>
<p>इसका खास उद्देश्य है भाईचारा को बढ़ावा देना। इधर वैसे भी माहौल गर्म है तो मैंने सोचा कि क्यों ना कोई तरकीब सोची जाएं। तो ऐसा करते हैं मैं अपने ब्लागरोल में आप सभी टिप्पणी देने वाले लोगों के ब्लाग को अपने में जोड़ दूंगा। क्या पता शायद इसी से कुछ सुधर जाए।</p>
<p>वैसे यह बात जरूर है कि कई बार ब्लागरोल लिंक होते हुए भी विचार नहीं मिलते इसके लिए कोई आइडिया तो आप भी सोच सकते हैं। उद्देश्य है सभी के बीच शांति फैलाना। मेरा डोमेन आप जोड़े और मैं आपका।</p>
]]></content:encoded>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नारद, राहुल, संजय और लोकतंत्र]]></title>
<link>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/16/narad-and-hindi-blogs/</link>
<pubDate>Sat, 16 Jun 2007 12:13:11 +0000</pubDate>
<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
<guid>http://merasapna.wordpress.com/2007/06/16/narad-and-hindi-blogs/</guid>
<description><![CDATA[मेरा पूरा पोस्ट नारद पर हुए विवाद और य]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>मेरा पूरा पोस्ट नारद पर हुए विवाद और यहां दिए जा रहे टिप्पणियों पर केंद्रित है। नारद पर हुए एक पोल के अनुसार मेरी उम्र इस पोल में भाग लेने वाले सबसे ज्यादा 47 फीसदी में आता है। लेकिन फिर भी मैं अपनी आयु को अल्प ही मानता हूं। इस अल्प आयु में मैंने जो कुछ भी सीखा समझा है उसके बारे में यही कह सकता हूं कि <strong>जब आप किसी दूसरे के बारे में कह रहे होते हैं तो उस शख्स से ज्यादा आप अपना परिचय दे रहे होते हैं।</strong></p>
<p>जी हां, आपके द्वारा दूसरे के बारे में दी गई टिप्पणी या पोस्ट यह बताती है कि आप कैसे हैं। यह मेरा नितांत अपना मानना है। आप इसे मान भी सकते हैं और नहीं भी। क्योंकि हम लोकतंत्र में रहते हैं और मुझे लोकतंत्र शासन के अन्य सभी रूपों से सवरेत्तम लगता है।</p>
<p>पहले <strong>राहुल <span class=" transl_class">जी</span></strong>  के बाजार की बात ye mere comment the <strong>मुझे नही पता याहा लोग क्या चाहते हैं? ब्लोग लिखना या अपनी इदेंतित्य क्रिसिस कि भूख को मिटाना । मौका मिला तो एक पोस्ट इसपर भी लिखना होगा । समीर जी, रचना जी, कमल जी, फिलिप जी, पुराणिक जी, घुघूती जी और भी कई लोग हैं क्या इनलोगों को किसी विवाद में पड़ते देखा है। लेकिन मैं पुरे यकीं से कह सकता हु कि ये सभी लोग कई अन्य जो विवाद फ़ैलाने वाले लोगो से पोपुलर हैं । हिट्स पाने के कई अन्य तरीके होते हैं जिसमे ये तरीका बड़ा घटिया है। कुछ तो बदलाव जरूरी है। लगता है कि इस पर जुल्य में हो रही मीटिंग में बात करनी होगी ।<br />
धन्यवाद<br />
राजेश रोशन</strong></p>
<p>और अब नारद क्या नारद लोकतंत्र की तरह काम करता है? मुझे नहीं लगता। किसी ने एक फीड एग्रीगेगटर बनाया और लोगों के बीच पोपुलर हो गया। यहां तक सब कुछ अच्छा रहा लेकिन फिर बारी आई दायित्व की। उसमें शायद नारद से थोड़ी चूक हो गई। नारद कई सारे काम कर सकता था। मसलन नारद उवाच द्वारा एक पोस्ट लिख कर सभी से टिप्पणियां ले लेता। जैसा कि नारद को लग रहा है कि कई लोग उसके पक्ष में हैं वो टिप्पणी द्वारा उसका समर्थन कर देते। फिर उसके बाद ब्लाग हटाना, पोस्ट हटाने का निर्णय लिया जा सकता था। लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हुआ। (<strong>विकीपीडिया में ऐसा होता है</strong>)।</p>
<p><strong>संजय जी</strong> गुजरात के लोग तो बड़े मीठे होते हैं आप कैसे इतना कड़वा बोल लेते हैं। आप नामवर सिंह को भला-बुरा कहें कोई बात नहीं लेकिन आपको कोई कह दे तो फिर बुरा कैसा। थोड़ा संयम तो रखा ही जा सकता है। विवाद से बचें।</p>
<p>मैंने आज <strong>श्रीश जी</strong> के पोस्ट का शीर्षक देखा लिखा था, नारद द्वारा चिट्ठा हटाने का निर्णय <strong>एकदम</strong> सही था। मैं इस शीर्षक से '<strong>एकदम'</strong> को हटाना चाहता हूं।</p>
<p><strong>मेरी सभी ब्लागरों से निवेदन है कि थोड़ा संयम रहें और क्रियाशील लेख लिखें। इस पोस्ट से अगर किसी को भी बुरा लगा हो तो उसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं।</strong></p>
]]></content:encoded>
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</channel>
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