दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: सम्पन्नतरमेवान्नं दरिद्र भुंजते सदा। क्षुत् स्वादुताँ जनयति सा चाढ्येषु सुदुर्लभा।। हिंदी में भावार् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सरवर के खग एक से, बाढ़त प्रीति न धीम पै मराल को मानसर, एकै ठौर रहीम अधिकतर पक्षी एक समान होते हैं। उ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन निज मन की बिधा, मन ही राखो गोय सुनि अठिलैहैं लोग सब, बांटि न लैहैं कोय कविवर रहीम कहते है अपने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछु न देत कविवर रहीम कहते हैं कि बंस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इंद्रिवाणां प्रसङगेन दोषमृच्छ्रत्यसंशयम् सन्न्यिम्य तु तान्येव ततः सिद्धिं निगच्छति इस विश्व में सभी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.शास्त्रों की संख्या अनन्त, ज्योतिष,आयुर्वेद तथा धनुर्वेद की विद्याओं की गणना भी नहीं की जा सकती है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन ठहरी धूरि की, रही पवन ते पुरि गाँठ युक्ति की खुलि गयी, अंत धूरि को धूरि कविवर रहीम कहते हैं की … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १. विद्या का मद, धन का मद और तीसरा ऊंची कुल का मद है. यह घमंडी पुरुषों के लिए मद हैं परन्तु सज्जन पु … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुल खोये कुल उबरै, कुल राखै कुल जाय राम निकुल कुल भेटिया, सब कुल गया बिलाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पढि पढि तो पत्थर भया, लिखि लिखि भया जो चोर जिस पढ़ने साहिब मिले, सो पढ़ना कछु और संत शिरोमणि कबीरदास … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.युवावस्था में काम-क्रोध हावी होते हैं, इसी कारण व्यक्ति की विवेक शक्ति निष्क्रिय हो जाती है। काम व … more →