दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: विरहेऽपि संगमः खलु परस्परं संगतं मनो येषाम् हृदयमपि विघट्टितं चेत्संगी विरहं विशेषयति हिंदी में भाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: 1.निरोग रहना, ऋणी न होना, विदेश में रहना, अच्छे लोगों के साथ मेल होना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना औ … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: 1.इस संसार में गुणी व्यक्ति का सम्मान सभी जगह पाया जाता है, भले ही वह अर्थाभाव से पीड़ित हो। भारी धन … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: 1.धन से धर्म, खाने पीने और योग से विद्या, शक्ति से राज्य तथा गुणवान पत्नी से घर की रक्षा होती है। 2. … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: स्वपरप्रतारकोऽसौ निन्दति योऽलीकपण्डितो युवतीः यस्मात्तपसोऽपि फलं स्वर्गस्तयापि फलं तथाप्सरसः हिंदी म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन सो न कछु गनै, जासों, लागे नैन सहि के सोच बेसाहियो, गया हाथ को चैन कविवर रहीम कहते हैं कि जिन म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज फिर घर और बोला ”दीपक बापू यह भी भला क्या किताबों की नक़ल छापते हो कभी लिखते किसी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अहौ वा हारे बलवति रिपौ वा सुहृदि वा मणौ वा लोष्ठे वा कुसुमशयने वा दृषदि वा। तृणे वा स्त्रैणे वा मम स … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: समय लाभ सम लाभ नहिं, समय चूक सम चूक चतुरन चित रहिमन लगी, समय चूक की हूक कविवर रहीम कहते हैं कि समय … more →