सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले में फोड़ा था और उसके परिवारजन डाक्टर के पास गये। वहां खड़े सफाई कर्मचारी ने उसका आपरेशन कर दिया। टीवी… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर क … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: वह एक ब्राह्म्ण लेखक का पाठ था-ऐसा उन्होंने अपने पाठ में स्वयं ही बताया था। उसने बताया कि राजस्थान क … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: सम्पन्नतरमेवान्नं दरिद्र भुंजते सदा। क्षुत् स्वादुताँ जनयति सा चाढ्येषु सुदुर्लभा।। हिंदी में भावार् … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: उस पिकनिक हम सब आम लोग ही थे पर दूसरों से कुछ अलग! हम सभी नियमित योग साधना करने वाले लोग थे। योगी कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: यह एक टिप्पणी जो उस ब्लाग पर नहीं रखी जा सकी जिसमें श्रीगीता के युद्ध की चर्चा करते हुए उस ब्लाग लेख … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार ——————– प्रमाणश्चधिकश्याप … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: १.जो कार्य दूसरों के अधीन रहकर ही किये जा सकते हैं उनको पूरी तरह त्याग देना ही श्रेयस्कर है, तथा अपन … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: तावन्महत्तवं पाण्डित्यं कुलीनत्वं विवेकता यावज्जवलति नांगेषु हतः पञ्वेषु पावकः हिंदी में भावार्थ-हृद … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: धरती फाटे मेघ मिलै, कपड़ा फाटे डौर तन फाटे को औषधि, मन फाटे नहिं ठौर संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अति वादांस्तितिक्षेत नावमन्येत कञ्चन न चेमं देहमाश्रित्य वैरं कुर्वीत केनचित् न क्रुद्धयंन्तं प्रतिक … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: 1.निरोग रहना, ऋणी न होना, विदेश में रहना, अच्छे लोगों के साथ मेल होना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना औ … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: सरवर के खग एक से, बाढ़त प्रीति न धीम पै मराल को मानसर, एकै ठौर रहीम अधिकतर पक्षी एक समान होते हैं। उ … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अष्ट सिद्धि नव निधि लौं, सबही मोह की खान त्याग मोह की वासना, कहैं कबीर सुजान संत श्री कबीरदास का कथन … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: न जातु कामा कामानामुपभोगेन शाम्यति हविपा कृष्णावत्र्मेव भूव एवाभिवर्धते जिस प्रकार अग्नि में घी डालन … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: संपति भरम गंवाइ के, हाथ रहत कछु नाहिं ज्यों रहीम ससि रहत है, दिवस अकासहिं मांहि कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: रहिमन चाक कुम्हार को, मांगे दिया ना देह छेद में डंडा डारि कै, चहै नांद लै लेइ कविवर रहीम कह्ते हैं क … more →