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पर्दे के पीछे-हिन्दी साहित्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सच कहते हैं जिंदगी के फैसले कभी जंग से नहीं होते। पर्दे के पीछे तय हो जाते फैसले ले देकर कटवाते है व … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Deepak bapu

किस जमाने की माशुका हो-हिन्दी हास्य कविता (hindi poem on love)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago:  माशुका ने पूछा आशिक से ‘अगर शादी के बाद मैं मर गयी तो क्या मेरी याद में ताजमहल बनवाओगे।’ आशिक … more →

Tags: abhivyakti, aducation, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन

जिंदगी और जंग-हिंदी शायरी (zindagi aur zang-hindi shayri4 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: सच कहते हैं जिंदगी के फैसले कभी जंग से नहीं होते। पर्दे के पीछे तय हो जाते फैसले ले देकर कटवाते है व … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, कला, मनोरंजन, मस्तराम

मनोरंजन की राह-हिंदी व्यंग्य कविता (manoranjan ki rah-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: दुनियां की तबाही देखने के लिये इंसान का दिल क्यों मचलता है हमारी आंखों के सामने ही सब खत्म हो जाये फ … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, हास्य कविता, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, कला

चेहरा बदल जाता है, चाल नहीं-व्यंग्य कविता (Face turns, not tricks - satirical hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: इंसान के चेहरे बदल जाते हैं नहीं बदलती चाल। खून खराबा करने वाले हाथ बदल जाते हैं वही रहती तलवार और ढ … more →

Tags: कला, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, E-patrika

दिल और कविता-हिंदी कविता (dil aur kavita-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago:   कभी गम तो कभी खुशी कभी दर्द तो कभी हँसी के साथ कविता लिखने का ख्याल किया तब भाषा सज … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, कला

खाली ज़ेब का रुआब-हास्य व्यंग्य कविता (khali zeb ka ruaab-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: सूखी मन गयी दिवाली क्योंकि जेब थी खाली, ज़माने में अपना रुआब दिखाने के लिए सबसे कह रहे हैं”हैप … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

तीक्ष्ण बुद्धि-हास्य कविता (sharp mind-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आज के बच्चे अपने माता पिता के बाल्यकाल से अधिक तीक्ष्ण बुद्धि के पाये जाते यह सच कहा जाता है। किस ना … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

समाज हिलता नजर आता हास्य व्यंग्य कविता (javani divani aur budhapa-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, India, bharat, शेर, अनुभूति, साहित्य, Bloging

कल के बड़े और आज के बच्चे-हिंदी हास्य कवितायें( badi aur bachche-hindi haysa kavita

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: बेटे ने मां से कहा ‘‘मां, मुझे पैसा दो तो कार खरीद कर लाऊं कालिज उससे जाकर अपनी छबि बनाऊं पापा, नोटो … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, India, bharat, अनुभूति, साहित्य, Internet

हंसी के खजाने की तलाश-हिंदी शायरी (hansi ka khazana-hindi shayri)4 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: अपने पर ही यूं हंस लेता हूं। कोई मेरी इस हंसी से अपना दर्द मिटा ले कुछ लम्हें इसलिये उधार देता हूं। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

मिलावट और नकल का आतंक-हास्य व्यंग्य(nakal aur milavat par hindi vyangya)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: आतंक कोई बाहर विचरने वाला पशु नहीं बल्कि मानव के मन में रहने वाला भाव है जो उसके सामने तब उपस्थित हो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका


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