Blogs about: Hindi Epatrika
स्टार्ट अप को समोसा मान लेते हैं-व्यंग्य चिंतन
दीपक भारतदीप wrote 2 hours ago: गूगल के अंग्रेजी हिंदी टूल आने का भार … more »
लिखने और प्रयोग करने में क्या हर्ज है- व्यंग्य
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दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: बहुत दिन से लोगों ने ऐसी हिंदी लिखी नह … more »
इंसान तो कठपुतली है-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: आदमी के पंख नहीं होते जो वह आसमान में उ … more »
महिला बुद्धिजीवी सम्मेलन-हास्य व्यंग्य
दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: सम्मेलनों के आयोजने करने के आदी लोगों … more »
मोबाइल मोहब्बत हो गई-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: प्रेमी ने प्रेमिका के मोबाइल की घंटी ब … more »
गरीबों का खाना सहता कौन है? हास्य व्यंग्य
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: अमेरिका के राष्ट्रपति जार्जबुश ने कह … more »
संत कबीर वाणीःभक्ति के लिये हृदय में शुद्ध भावना जरूरी
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: पाहन पानी पूजि से, पचि मुआ संसार भेद अल … more »
चाणक्य नीतिःधन कमाने वाले धर्म की स्थापना नहीं कर सकते
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: अर्थाधीतांश्च यैवे ये शुद्रान्नभोज … more »
क्रिकेट में अब देशप्रेम का सुख नहीं उठाते-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: आया फंदेबाज और बोला ‘क्या दीपक बापू कि … more »
आठ साल की बच्ची का हाथ कैसे कुचला जा सकता है-आलेख
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आज श्री सुरेश चिपलूनकर जी ने कुछ फोटो … more »
तब तक बहुत देर हो जायेगी-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हर शाख पर उल्लू बिठा दो जब बिजली चली जा … more »
बंधे सबके अपनी मजबूरी से हाथ-हिन्दी शायरी
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: यूं दर्द बांटने चले थे जमाने के साथ शा … more »
हमने भी कुछ खोया नहीं-हिन्दी शायरी
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अपनी राह चलते जाना है कहीं फूल बरसेंगे … more »
मानसिक गुलामी किसी को दिखाई नहीं देती-आलेख
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनोरंजन के नाम पर जिस तरह के कार्यक् … more »
जो बडे हैं वह कभी संयम नहीं गंवाते-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आया फंदेबाज और बोला ”क्या दीपक बापू … more »
एक ढूंढो हजार मूर्ख मिलते हैं-आलेख
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कल बिहार में एक स्थान पर एक महिला को ज … more »
होली के दिन सबका चरित्र बदल जाता है-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: घर से नेकर और कैप पहनकर निकले घर से बाह … more »
संत कबीर वाणी:जैसा भोजन और पानी वैसा मन और वाणी
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक कहैं कबीर … more »
रहीम के दोहे:कलारी वाले के हाथ में दूध भी मदिरा लगता है
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन नीचन संग बसि, लगत कलंक न काहि दूध … more »
