Blogs about: Hindi Epatrika

श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 10 hours ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

Tags: आलेख, मस्तराम, संस्कार, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll

बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, पर्यावरण, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

विदुर नीति-कम ताकत के होते गुस्सा करना तकलीफदेह

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

इस ब्लाग/पत्रिका ने पार की पाठक संख्या पचास हजार-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: पाठ पठन/पाठक संख्या पचास हजार पार करने वाला ईपत्रिका इस लेखक का तीसरा ब्लाग/पत्रिका है। इसने हाल ही … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu

पैसे के साथ इश्क में भी आ सकता है मंदी का दौर - हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Dashboard

कंपनी कभी देवता तो कभी दानव -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती ह … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, मस्तराम, Blogging, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

पब में पीने से शराब कोई अमृत नहीं हो जाती -हास्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: नयी धोती, कुरता और टोपी पहनकर बाहर जाने को तैयार हुए कि आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू अच्छा हुआ तै … more →

Tags: मस्तराम, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, Blogging, Blogroll, Deepak bharatdeep, deshboard

दर्द बयां करते हुए हो जाता है भुलावा-व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: चेहरे हैं उनके सजे हुए अपने घर पर उन्होंने पत्थर और प्लास्टिक के फूल सजाये हैं अपनी जुबान से बात करत … more →

Tags: Hindi hasya, web duniya, web dunia, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindi bhasakar, inglish, hindi culture, hindi internet

जिंदगी क्या जंग से कम है-लघुकथा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्य … more →

Tags: Blogroll, hindi journlism, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindi bhasakar

समाज, संस्कार और संस्कृति की रक्षा का प्रश्न-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हम अक्सर अपने संस्कार और संस्कृति के संपन्न होने की बात करते हैं। कई बार आधुनिकता से अपने संस्कार औ … more →

Tags: hindi web, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bapu, hindi jagran, hindi litreture, inglish

मौका पड़े तो अपने लिए शैतान खड़ा कर लो-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे … more →

Tags: Blogroll, Hindi hasya, hindi web, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar

यह शहर धरती का एक टुकड़ा है-व्यंग्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: अपने शहर पर इतना नहीं इतराओ कि फिर पराये लगने लगें लोग सभी कभी यह गांव जितना छोटा था तब न तुम थे यहा … more →

Tags: Blogroll, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi megzine, hindi nai duinia, web dunia, web duniya, web panjab kesri, आंखें

अंतहीन सिलसिला -व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: एक तलाश पूरी होते ही आदमी दूसरी में जुट जाता अंतहीन सिलसिला है अपने मकसद रोज नये बनाता पूरे होते ही … more →

Tags: Blogroll, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, साहित्य, web panjab kesri, E-patrika

पड़ौस पर हमला न करो यह तो डाइन भी सिखाती-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: डाइन भी सात घर छोड़कर कहर बरपाती अपने पडौस से निभाओ यह तो वह भी सिखाती उसकी राह पर चलने वाले असली … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, साहित्य, हास्य

सहमा शब्द -हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जब बमों की आवाज से शहर काँप जाते हैं बाज़ार में सड़कों पर फैले खून के दृश्य आखों के सामने आते हैं तब … more →

Tags: hindi kavita, hindi journlism, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar, hindi sahity, hindi litreture

क्रिकेट मैच से अधिक अच्छा लगता है ब्लाग/पत्रिका पर लिखना-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अब फ़िर क्रिकट प्रतियोगिता शुरू होने की तैयारी हो रही है। अखबारों और टीवी पर उसका धूंआधार प्रचार हो … more →

Tags: साहित्य, हिन्दी, Blogroll, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi megzine, hindi nai duinia, web dunia, web duniya

ऐसे ही खाते हैं कसम-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: नकली घी,खोवा और दूध से हो रहा है बाज़ार गर्म दीपावली का जश्न मनाने से पहले अमृत के नाम पर विष पी जा … more →

Tags: Blogroll, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, साहित्य, हिन्दी, web panjab kesri, E-patrika

इस तरह सताते भविष्य के सपने-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अतीत के गुजरे पल ही दिमाग को इस तरह सताते कि भविष्य के सपने सामने चले आते साथ चलता तो है बस आज का सच … more →

Tags: साहित्य, Blogroll, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi megzine, hindi nai duinia, web dunia, web duniya, web panjab kesri

व्ही.आई.पी. कहलाने की चाहत-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: वैसे तो अपने देख के लोगों की यह पूरानी आदत है कि वह हर तरफ अपने को श्रेष्ठ साबित करना चाहते हैं और अ … more →

Tags: Blogroll, hindi journlism, hindi web, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, hindi bhasakar, inglish