दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: सभी लोग हमेशा दूसरे के सुख देखकर मन में अपने लिये उसकी कमी का विचार करते हुए अपने को दुःख देते हैं। … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से द … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: रोज रचते हैं नया स्वांग चेहरे पर लगाते नए मुखौटे और बदलकर आते हैं कपड़े मगर छद्म होकर भी करते हैं हमे … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: अपने साथ फंदेबाज एक पर्चा लेकर आया और हाथ में देते हुए बोला- ‘दीपक बापू, बूढ़े आदमियों के लिये तैयार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पर्दे के पीछे वह खेल रहे हैं सामने उनके पुतले डंड पेल रहे हैं। आत्ममुग्धता हैं जैसे जमाना जीत लिया स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उस उद्यान में ज्ञानियों के बीच देश की गरीबी मिटाने के लिये बहस चल रही थी। विषय था देश में गरीबी और श … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अंतर्जाल पर कौन कितना सफल है यह तो कहना कठिन है क्योंकि यहां अनेक तरह के फर्जीवाड़े हैं जिनको समझना ए … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सर्दी की सुबह चाय पीने के बाद ब्लागर कोहरे में घर से बाहर निकला। उसका शरीर ठंड से कांप रहा था पर चाय … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नाम कुछ दूसरा था पर नायिका सविता भाभी रखकर वह सच का सामना प्रतियागिता में पहुंची और एक करोड़ कमाया। प … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अच्छे विषय पर सोचकर कविता लिखने बैठा युवा कवि कि बिजली गुल हो गयी। कागज पर हाथ था उसका कलम अंधेरे मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम दोनों तूफान में फंसे थे उनको सोने की दीवारों का सहारा मिला हम ताश के पतों की तरह ढह गये। अब गुजरत … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: डाक्टर साहब बाहर ही मिल गये। उस समय वह एक किराने वाले से सामान खरीद रहे थे और हम पहले लेचुके सामान क … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अक्सर अनेक कवितायें, शायरियों गीत, और गद्य रचनायें हमारे सामने आती हैं जिसमें भारतीय धर्म ग्रंथों के … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: एक बेकार आदमी साक्षात्कार देने के लिये जा रहा था। रास्ते में उसका एक बेकार घूम रहा मित्र मिल गया। उस … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कविराज अपने घर से दूर उस पार्क में पहुंच गये। घर में बिजली नहीं थी और बरसात की वजह से सारी सड़कें सरा … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: अपने पर ही यूं हंस लेता हूं। कोई मेरी इस हंसी से अपना दर्द मिटा ले कुछ लम्हें इसलिये उधार देता हूं। … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: यो मोहन्मन्यते मूढो रक्तेयं मयि कामिनी। स तस्य वशगो मूढो भूत्वा नृत्येत् क्रीडा-शकुन्तवत्।। हिंदी मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: आतंक कोई बाहर विचरने वाला पशु नहीं बल्कि मानव के मन में रहने वाला भाव है जो उसके सामने तब उपस्थित हो … more →