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कबीर के दोहेः दिल टूटने पर कुछ भी नहीं अच्छा लगता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: धरती फाटे मेघ मिलै, कपड़ा फाटे डौर तन फाटे को औषधि, मन फाटे नहिं ठौर संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →

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भर्तृहरि शतक:घमंडी अमीरों का मुहँ क्यों ताकते हो संदेश: अहंकारी धनवानों के तरफ़ क्यों देखते हो?

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →

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मनुस्मृतिःस्वामी वही जो नौकर से भी निभाये1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आर्तस्तु कुर्यात्स्वस्थ: सन्यथाभाषितमादित:। स: दीर्घस्यापि कालस्य तल्लभेतैव वेतनम।। मनु स्मृति के इस … more →

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चाणक्य नीतिः प्यार में भी चतुराई जरूरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →

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रहीम के दोहे-प्रेम मे टेढ़ी चाल न चलें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फरजी सह न ह्म सकै गति टेढ़ी तासीर रहिमन सीधे चालसौं, प्यादा होत वजीर कविवर रहीम कहते हैं कि प्रेम मे … more →

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संत कबीर वाणी:परिश्रम और धैर्य से होता है कार्य सिद्ध1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: श्रम ही ते सब होत है, जो मन सखी धीर श्रम ते खोदत कूप ज्यों, थल में प्रगटै नीर संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →

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रहीम के दोहे: मनुष्य को आत्मसम्मान के साथ जीना चाहिए

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मान सहित विष खाय के, संभु जगदीस बिना मान अमृत पिये, राहु कटायी सीस कविवर रहीम कहते हैं कि सम्मान के … more →

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चाणक्य नीति:समय के अनुसार कार्य करना ही बुद्धिमानी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →

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संत कबीर वाणी:खुद पढ़कर समझें नहीं दूसरे को समझाएं 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पढी गुनी पाठक भये, समुझाया संसार आपन तो समुझै नहीं, वृथा गया अवतार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →

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