अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आड़ में कोई अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ा रहा है तो कोई अपना व्यवसाय कर रहा है। जब कहीं सार्वजनिक रूप से… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 2 days ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: बेकद्रों की महफिल में मत जाना बहस के नाम पर वहां बस कोहराम मचेगा पर कौन, किसकी कद्र करेगा। मुस्करा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कहीं न्यूजीलैंड में इस बात को लेकर लोग नाराज है कि ‘हनुमान जी पर कंप्यूटर गेम बना दिया गया है और बच् … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कृशः काणः खञ्ज श्रवणरहितः पुच्छविकलो व्रणी पूयक्लिनः कृमिकुलशतैरावुततनु क्षुधाक्षामो जीर्णः पिठरककाप … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: नयी बहू कवियित्री है जब सास को पता लगी तो उसकी परीक्षा लेने की बात दिमाग में आयी उसने उससे अपने ऊपर … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: तावन्महत्तवं पाण्डित्यं कुलीनत्वं विवेकता यावज्जवलति नांगेषु हतः पञ्वेषु पावकः हिंदी में भावार्थ-हृद … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: अष्ट सिद्धि नव निधि लौं, सबही मोह की खान त्याग मोह की वासना, कहैं कबीर सुजान संत श्री कबीरदास का कथन … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पा … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कुछ पाने के लिये दौड़ता है आदमी इधर से उधर देने का ख्याल कभी उसके अंदर नहीं आता भरता है जमाने का साम … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कुछ लोग कुछ दिखाने के लिये बन जाते लाचार अपनी वेदना का प्रदर्शन करते हैं सरेआम लुटते हैं लोगों की सं … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: लुट जाने का खतरा अब गैरो से नहीं सताता अपनों को ही यह काम अच्छी तरह अब करना आता पहरेदारी अपने घर की … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल ति … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: भारतीय योग एक प्राचीनतम विद्या मानी जाती है जिसके जनक महर्षि पतंजलि हैं। यह एक बृहद विषय है और भगवान … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: ख्यालों के बंधन में फंसकर उनके इशारों पर नाचते रहे जिंदगी मेंं इसलिये हर कदम पर हारते रहे जो आजाद हो … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: स्वपरप्रतारकोऽसौ निन्दति योऽलीकपण्डितो युवतीः यस्मात्तपसोऽपि फलं स्वर्गस्तयापि फलं तथाप्सरसः हिंदी म … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: बरसों से कभी ऐसे मेघ नहीं बरसे हमेशा रहा जल का अकाल हम पानी की बूंद बूंद को तरसे बहुत सारी शायरी प्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय कविवर रहीम कहते है कि लोग तो … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: खबरों की खबर वह रखते हैं अपनी खबर हमेशा ढंकते हैं दुनियां भर के दर्द को अपनी खबर बनाने वाले अपने वास … more →