शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से पहले ही द्वार पर खड़े होकर उन्होंने देखा कि आदमी को देखा जिसकी पीठ उनकी तरफ थी। उसके बाल कंधे गर्दन … more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 week ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: माशुका अब आशिक के लिये हो गयी है मिस काल। वह घंटी बजाकर बंद करती है फिर करता है आशिक उसे काल। वह भी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: डाक्टर साहब बाहर ही मिल गये। उस समय वह एक किराने वाले से सामान खरीद रहे थे और हम पहले लेचुके सामान क … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रि … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कहीं न्यूजीलैंड में इस बात को लेकर लोग नाराज है कि ‘हनुमान जी पर कंप्यूटर गेम बना दिया गया है और बच् … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हम खड़े हैं जहां छू रहा है चारों तरफ से डीजल और पेट्रोल का धुआं। कोई बात नहीं सब चलता है यह भी चलेगा … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अब यह भला क्या बात हुई कि बंदर तथा चिंपौजी में भी नैतिकता होती है। कुछ पश्चिमी विशेषज्ञों ने अपने प् … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: चेहरे हैं उनके सजे हुए अपने घर पर उन्होंने पत्थर और प्लास्टिक के फूल सजाये हैं अपनी जुबान से बात करत … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: बना लिया है पूरी दुनिया को उन्होंने अपना एक बड़ा बाजार चला रहे सभी जगह अपना व्यापार पर टुकड़ों में ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे अ … more →
K M Mishra wrote 1 year ago: क्यों भइया ! चौंक गये ने शीर्षक देख कर । आप सोचोगे कि ‘गोपी’ फिल्म मंे तो दिलीप कुमार ने तो कुछ और … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: महामशीन के रूप में चर्चित महादानवीय मशीन का प्रयोग अब रुक गया है। अगर आज के सभ्य समाज में महिमा मंडि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस दिन ब्लागर अपने कमरे में बैठा लिख रहा था तभी उसे बाहर से आवाज सुनाई दी जो निश्चित रूप से दूसरे ब् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वफा अब मुफ्त में नहीं मिलती अगर दाम देने की ताकत हो पास तो बेचने वाले सौदागरो की भीड़ दिखती ओ बाजार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल तिल … more →