Blogs about: Hindi Hasya

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‘सविता भाभी’ से मस्त राम पीछे-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रि … more →

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क्यों जंग का बिगुल बजा रहे हो-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →

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बाजार की आस्था या आस्था का बाजार-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कहीं न्यूजीलैंड में इस बात को लेकर लोग नाराज है कि ‘हनुमान जी पर कंप्यूटर गेम बना दिया गया है और बच् … more →

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सब चलता है-हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम खड़े हैं जहां छू रहा है चारों तरफ से डीजल और पेट्रोल का धुआं। कोई बात नहीं सब चलता है यह भी चलेगा … more →

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बंदर, चिंपौजी और इंसान का नैतिक आधार-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अब यह भला क्या बात हुई कि बंदर तथा चिंपौजी में भी नैतिकता होती है। कुछ पश्चिमी विशेषज्ञों ने अपने प् … more →

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आदमी ख़ुद ही खिलौना बन जाता -हिंदी व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →

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दर्द बयां करते हुए हो जाता है भुलावा-व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: चेहरे हैं उनके सजे हुए अपने घर पर उन्होंने पत्थर और प्लास्टिक के फूल सजाये हैं अपनी जुबान से बात करत … more →

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कभी नहीं लगने देंगे नैया पार-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: बना लिया है पूरी दुनिया को उन्होंने अपना एक बड़ा बाजार चला रहे सभी जगह अपना व्यापार पर टुकड़ों में ब … more →

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मौका पड़े तो अपने लिए शैतान खड़ा कर लो-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे … more →

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ईष्र्या और द्वेश पर आधारित व्यंग्य लेख

K M Mishra wrote 7 months ago: क्यों भइया ! चौंक गये ने शीर्षक देख कर ।  आप सोचोगे कि ‘गोपी’ फिल्म मंे तो दिलीप कुमार ने तो कुछ और … more →

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ब्रहमाण्ड का रहस्य जानने का प्रयास नाकाम तो होना ही था-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: महामशीन के रूप में चर्चित महादानवीय मशीन का प्रयोग अब रुक गया है। अगर आज के सभ्य समाज में महिमा मंडि … more →

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अभद्र शब्द संग्रह का विमोचन-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: उस दिन ब्लागर अपने कमरे में बैठा लिख रहा था तभी उसे बाहर से आवाज सुनाई दी जो निश्चित रूप से दूसरे ब् … more →

Tags: इंटरनेट, कथा साहित्य, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, साहित्य, हास्य, हास्य व्यंग्य, हिंदी

वफा मुफ्त में नहीं मिलती-हिंदी शायरी4 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: वफा अब मुफ्त में नहीं मिलती अगर दाम देने की ताकत हो पास तो बेचने वाले सौदागरो की भीड़ दिखती ओ बाजार … more →

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भिखारी से साक्षात्कार-लघुकथा5 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल ति … more →

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स्वयं पढ़ा कुछ नहीं, दूसरों को लिखना सिखाते हैं-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और एक किताब हाथ में थमाते हुए बोला ‘दीपक बापू, लो पकड़ लो यह किताब ‘लिखने के नुस्खें सीख … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य

अब रास्ते से निकलने के लिये तरसे-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बरसों से कभी ऐसे मेघ नहीं बरसे हमेशा रहा जल का अकाल हम पानी की बूंद बूंद को तरसे बहुत सारी शायरी प्य … more →

Tags: कला, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर

क्या फायदा विषय का पहाड़ खोदने से-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के शिखर पर बैठे लोग हांकते हैं ऐसे आदमी को जैसे भेड़-बकरी हों जो न बोले न कहे न देखे उनके काले … more →

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ख्याल तो हैं जलचर की तरह-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन का समंदर है गहरा जहां ख्याल तैरते हैं जलचर की तरह कुछ मछलियां सुंदर लगती हैं कुछ लगते हैं खौफनाक … more →

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बेजान चीजों की नीलामी, जिंदगी की नीलामी नहीं होती-हास्य कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू तुम्हारे हिट होने का एक नुस्खा लाया हूं सफलता बतलाने वाले डाक्टर से स … more →

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