कौटिल्य महाराज के अनुसार —————————- उच्चेरुच्चस्तरामिच्छन्पदन्यायच्छतै महान्। नवैनींचैस्तरां याति निपातभयशशकया।। हिंदी में भावार्थ-जीवन में ऊंचाई … more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: कौटिल्य महाराज के अनुसार —————————- उच्चेरुच्च … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्षान्तिश्चत्कवचेन किं किमनिरभिः क्रोधीऽस्ति चेद्दिहिनां ज्ञातिश्चयेदनलेन किं यदि सहृदद्दिव्यौषधं कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर क … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: वह एक ब्राह्म्ण लेखक का पाठ था-ऐसा उन्होंने अपने पाठ में स्वयं ही बताया था। उसने बताया कि राजस्थान क … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: परिवर्तिनि संसारे मृतः को वा न जायते स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम् हिंदी में भावार्थ-परिवर्त … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: रहिमन धोखे भाव से, मुख से निकले राम पावत पूरन परम गति, कामादिक कौ धाम कविवर रहीम कहते हैं कि अगर धोख … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कबीर तो सांचै मतै, सहै जू सनमुख वार कायर अनी चुभाय के, पीछे झखै अपार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: तावन्महत्तवं पाण्डित्यं कुलीनत्वं विवेकता यावज्जवलति नांगेषु हतः पञ्वेषु पावकः हिंदी में भावार्थ-हृद … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन राज सराहिए ससिसम सुखद जो होय कहा वापुरी भानु है, तपैं तरैवन खोय कविवर रहीम कहते है की उसी राज् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.धन से धर्म, खाने पीने और योग से विद्या, शक्ति से राज्य तथा गुणवान पत्नी से घर की रक्षा होती है। 2. … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछु न देत कविवर रहीम कहते हैं कि बंस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन सो न कछु गनै, जासों, लागे नैन सहि के सोच बेसाहियो, गया हाथ को चैन कविवर रहीम कहते हैं कि जिन म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जीवनां मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम् मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवन न संशयः धर्म रहित प्राणी जीवित … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इंद्रिवाणां प्रसङगेन दोषमृच्छ्रत्यसंशयम् सन्न्यिम्य तु तान्येव ततः सिद्धिं निगच्छति इस विश्व में सभी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: न जातु कामा कामानामुपभोगेन शाम्यति हविपा कृष्णावत्र्मेव भूव एवाभिवर्धते जिस प्रकार अग्नि में घी डालन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई कर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: निकले सुबह अपने घर से धोती-कुर्ता और टोपी पहने रास्ते में जो भी मिलता यह कहता ”दीपक बापू क्या … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कबीर क्षुधा कूकरी, करत भजन में भंग वाकूं टुकडा डारि के, सुमिरन करूं सुरंग संत शिरोमणि कबीरदास जीं कह … more →