Blogs about: Hindi Jagran

savita bhabhi se mastram picche‘सविता भाभी’ से मस्त राम पीछे-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रि … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

Tags: आलेख, मस्तराम, संस्कार, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll

बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, पर्यावरण, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

विदुर नीति-कम ताकत के होते गुस्सा करना तकलीफदेह

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

भर्तृहरि शतक-बुरे संस्कार बुढ़ापे तक साथ रहते हैं

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, संस्कार, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

पैसे के साथ इश्क में भी आ सकता है मंदी का दौर - हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Dashboard

भ्रष्ट पात्र किसी कहानी में में केन्द्रीय पात्र क्यों नहीं होता -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: स्वतंत्रता के बाद देश का बौद्धिक वर्ग दो भागों में बंट गया हैं। एक तो वह जो प्रगतिशील है दूसरा वह जो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Deepak bharatdeep

कंपनी कभी देवता तो कभी दानव -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती ह … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, मस्तराम, Blogging, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

जिंदगी क्या जंग से कम है-लघुकथा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्य … more →

Tags: अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Dashboard, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

बाजार से धर्म बना या धर्म से बाजार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: धर्म यानि क्या? आप भारतीय पौराणिक ग्रंथों को अगर पढ़ते हैं तो उसका सीधा आशय आचरण से है पर उनमें किसी … more →

Tags: कला, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogroll, Dashboard, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi internet

समाज, संस्कार और संस्कृति की रक्षा का प्रश्न-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हम अक्सर अपने संस्कार और संस्कृति के संपन्न होने की बात करते हैं। कई बार आधुनिकता से अपने संस्कार औ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Dashboard, Deepak bapu

पड़ौस पर हमला न करो यह तो डाइन भी सिखाती-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: डाइन भी सात घर छोड़कर कहर बरपाती अपने पडौस से निभाओ यह तो वह भी सिखाती उसकी राह पर चलने वाले असली … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, साहित्य, हास्य

लोगों के मन का सहारा है परनिंदा करना-व्यंग्य आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

पाठक संख्या बीस हजार पार करने की पूर्व संध्या पर कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: मैं अंतर्जाल को एक मायाजाल ही मानता हूं। इसमें मेरे अनुभव अजीब तरह के हैं। अनेक लोग मुझसे मेरे बारे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, मस्तराम, शायरी, शेर, समाज, साहित्य

ख्यालों का बंधन-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: ख्यालों के बंधन में फंसकर उनके इशारों पर नाचते रहे जिंदगी मेंं इसलिये हर कदम पर हारते रहे जो आजाद हो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका

अब रास्ते से निकलने के लिये तरसे-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: बरसों से कभी ऐसे मेघ नहीं बरसे हमेशा रहा जल का अकाल हम पानी की बूंद बूंद को तरसे बहुत सारी शायरी प्य … more →

Tags: कला, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर

खबरों की खबर देने वाले-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: खबरों की खबर वह रखते हैं अपनी खबर हमेशा ढंकते हैं दुनियां भर के दर्द को अपनी खबर बनाने वाले अपने वास … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आलेख, कला, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य कविता

क्या फायदा विषय का पहाड़ खोदने से-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के शिखर पर बैठे लोग हांकते हैं ऐसे आदमी को जैसे भेड़-बकरी हों जो न बोले न कहे न देखे उनके काले … more →

Tags: मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Blogging, Blogroll

संत कबीर के दोहे: भक्ति और ध्यान एकांत में करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कबीर वाणी, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Dashboard


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “hindi-jagran”:
Technorati Del.icio.us IceRocket