जीवनां मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम् मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवन न संशयः धर्म रहित प्राणी जीवित होते हुए भी मृतक के समान होता है जबकि धर्मात्मा व्यक्ति देह त्यागने के बाद भी जीवित रहता है। इस बार… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जीवनां मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम् मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवन न संशयः धर्म रहित प्राणी जीवित … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पिर्तभिभ्रौतृभिश्चैता पतिभिदैवरैस्तथा पूज्या भूषयितव्याश्च बहुकल्याणमीप्सुभिः विवाह के समय अपने कल् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पर्वत तो बहुत हो सकते हैं किन्तु यह आवश्यक होना कदापि नहीं हो सकता कि प्रत्येक पर्वत पर माणिक्य उपल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक बार किसी महिला ने अपने पति को रोटी के स्वादिष्ट न होने का कारण बताते हुए कहा-”इस रोटी में अ … more →