Blogs about: Hindi Kahani

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आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मनोरंजन, मस्तराम, समाज, साहित्य

पब में पीने से शराब कोई अमृत नहीं हो जाती -हास्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: नयी धोती, कुरता और टोपी पहनकर बाहर जाने को तैयार हुए कि आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू अच्छा हुआ तै … more →

Tags: मस्तराम, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, Blogging, Blogroll, Deepak bharatdeep, deshboard

कभी नहीं लगने देंगे नैया पार-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: बना लिया है पूरी दुनिया को उन्होंने अपना एक बड़ा बाजार चला रहे सभी जगह अपना व्यापार पर टुकड़ों में ब … more →

Tags: inglish, हास्य व्यंग्य, हास्य, व्यंग्य, India, Friends, web dunia, web bhaskar, hindi sahitya

अभद्र शब्द संग्रह का विमोचन-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: उस दिन ब्लागर अपने कमरे में बैठा लिख रहा था तभी उसे बाहर से आवाज सुनाई दी जो निश्चित रूप से दूसरे ब् … more →

Tags: hindi, inglish, हिंदी, हास्य व्यंग्य, हास्य, व्यंग्य, hasya, vyangya, bharat

भिखारी से साक्षात्कार-लघुकथा5 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल ति … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging

दूसरे की लड़की के भागने की फिक्र-लघुकथा 10 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: ‘अरी, सुनती हो 13 नंबर वालों की लड़की भाग गयी’ ‘किसके साथ’’ ‘अरे, भागी किसके साथ होगी? तुम्हारे अंदर … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, कविता, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भारत, मस्तराम

काला और सफेद बाजार-हास्य कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अर्थशास्त्र के ‘मांग और आपूर्ति का नियम’ उन्होंने कुछ इस तरह समझाया ‘जब कारखाने में चीज बनती हो पर ब … more →

Tags: inglish, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, India, bharat, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य, Shayri

बेजान चीजों की नीलामी, जिंदगी की नीलामी नहीं होती-हास्य कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू तुम्हारे हिट होने का एक नुस्खा लाया हूं सफलता बतलाने वाले डाक्टर से स … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य

सारी पीड़ाऐ बाहर ले आता है पसीना-कविता एवं आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज आजश्री जयप्रकाश मानस का एक आलेख पढ़कर यह विचार मेरे हृदय में आया कि आजकल हमारे समाज में परिश्रम … more →

Tags: Blogroll, inglish, India, Shayri, media, Education, Internet, Bloging, Friends

पास के विद्वान भी बैल बन जाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू मैं हीरो का ब्लाग पढ़कर आया हिंदी तो ढंग से पढ़ना नहीं आती पर उसका अ … more →

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कभी किसी का कड़वा सच उसके सामने नहीं कहना चाहिए-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सच बहुत कड़वा होता है और अगर आप किसी के बारे में कोई विचार अपने मस्तिष्क में  हैं और आपको लगता है क … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, संस्कार, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

तंबाकू, एकता और योगसाधना-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:   पिछले वर्ष जुलाई में वृंदावन से हम दोनों पति-पत्नी अपने शहर  के लिये चले। हमने मथुरा के मार्ग पर प … more →

Tags: अनुभूति, मस्तराम, व्यंग्य, संस्कार, समाज, साहित्य, हास्य, हास्य व्यंग्य, Blogroll

ईमानदारी का न्यूनतम स्तर-व्यंग्य चिंतन1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल सुबह बिजली न होने के कारण मैं घर से अपने किसी भी ब्लाग पर कोई भी पाठ प्रकाशित किये बिना ही चला गय … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging

फिर कभी मोबाइल नहीं होगा खराब-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सारा दिन कान से मोबाइल चिपका कर प्रेम की बातें करने वाले प्रेमी के कान हो गये  खराब कभी आवाज आती तो … more →

Tags: शेर-ओ-शायरी, कविता, inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, भारत, India

इंसान तो कठपुतली है-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आदमी के पंख नहीं होते जो वह आसमान में उड़ सके पर उसका मन बिना पंख के ही उड़ता चला जाता है उसके पांव … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, साहित्य

महिला बुद्धिजीवी सम्मेलन-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सम्मेलनों के आयोजने करने के आदी लोगों की संस्था के पदाधिकारियों के  दिमाग  में ‘बुद्धिजीवी महिला सम् … more →

Tags: अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, आलेख, कला, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य, हिन्दी

कोई स्टार तो कोई फ्लाप ब्लागर-हास्य व्यंग्य2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लागर पार्क में दोनों ब्लागर प्रतिदिन सुबह लड़ते थे। एक कहता कि ‘मैं  हिंदी का सबसे बड़ा ब्लागर’ तो … more →

Tags: अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, अनुभूति, हिंदी साहित्य, साहित्य, Education, Friends

होली के दिन सबका चरित्र बदल जाता है-हास्य कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: घर से नेकर और कैप पहनकर निकले घर से बाहर निकले लेने किराने का सामान तो सामने से आता दिखा फंदेबाज औ … more →

Tags: कला, व्यंग्य, शायरी, शेर, संस्कार, समाज, साहित्य, हास्य, हास्य व्यंग्य

हिन्दी में ब्लोग लिखना और हॉकी खेलना एक जैसा-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल एक ऐसे पुराने मित्र से मुलाक़ात हुई जो मेरे साथ हॉकी खेलता था। हॉकी छोडे हम दोनों को बहुत समय हो ग … more →

Tags: Blogroll, Global Dashboard, अभिव्यक्ति, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य


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