Blogs about: Hindi Kavia

दर्द का न होता नामोनिशान-कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने दर्द को लेकर सब हैं परेशान जिसके सामने बयान करें वही अपनी हालातों से है हैरान अपनी कहानी सबको स … more →

Tags: Blogroll, Kavita, inglish, व्यंग्य, चिन्तन, साहित्य, media, Internet, Bloging

मन के समंदर में लहर और नाव का खेल2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन के समंदर में उठती लहरें कई नाम है जो नाव की तरह लहराते निकल जाते हैं जिसका किनारा आ गया वह साथ छो … more →

Tags: Blogroll, glogbal dashborad, inglish, संवेदना, चिन्तन, हिंदी साहित्य, Shayri, media, Bloging

अपने जिस्म पर इतराते हैं लोग-कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने जिस्म पर इतराते हैं लोग जिसमें रहते हैं बहुत सारे रोग जीवन की नाव वक्त की लहरों में बहती जाती … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य

सारी पीड़ाऐ बाहर ले आता है पसीना-कविता एवं आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज आजश्री जयप्रकाश मानस का एक आलेख पढ़कर यह विचार मेरे हृदय में आया कि आजकल हमारे समाज में परिश्रम … more →

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पास के विद्वान भी बैल बन जाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू मैं हीरो का ब्लाग पढ़कर आया हिंदी तो ढंग से पढ़ना नहीं आती पर उसका अ … more →

Tags: Kavita, Global Dashboard, शेर-ओ-शायरी, inglish, शायरी, हास्य व्यंग्य, India, bharat, शेर

शादी कर ही हमारे ब्लॉग पर कमेन्ट लगाना-हास्य कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कमेंट लिखने वाले ने पूछा ‘‘ मेरी प्रेमिका और  मेरा गौत्र आधा मिलता है आधा नहीं परिवार वाले शादी के ल … more →

Tags: Blogroll, Kavita, Global Dashboard, शायरी, व्यंग्य, India, bharat, शेर, साहित्य

मेरे शब्दों को अपने दिल और दिमाग में जगह मत देना-कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे शब्दों को ही अपना तुम दोस्त समझ लेना मेरी कविताओं में ही ढूंढ सको अपने लिये हमदर्दी तो ठीक रहेग … more →

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कोई नहीं हमारे पास बहाना-कविता 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इधर जाऊं तो लोगों के चीखने चिल्लाने की आवाजों का शोर लोग बिना मुद्दे के हो गए बोर इसलिए सजाये बैठे ह … more →

Tags: कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, शेर, साहित्य, Shayri, Art

बाजार, बल्ला, बाल, और ब्लोग-हास्य कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: घर आकर बोला फंदेबाज बोला ”बापू, अपना पुराना बैट मुझे दो मंडी मैदान में जाकर अपना भी कोई जुगाड़ … more →

Tags: arebic, कला, कविता, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, समाज

चलना ज़रा संभल कर-हास्य कविता 6 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चिल्ला-चिल्लाकर करते हैं प्रेम मजे के लिए चाहिए जैसे गेम आखों में बसाए रहते हैं पाश्चात्य सभ्यता वाल … more →

Tags: Blogroll, Global Dashboard, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, bharat, vishvaas, शेर

यह प्यार है बाजार का खेल-कविता साहित्य 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जगह-जगह नारे लगेंगे आज प्यार के नारे बाहर ढूंढेंगे प्यार घर के दुलारे प्यार का दिवस वही मनाते जो प्य … more →

Tags: hindi, Kavita, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, शेर

मजदूरों के पसीने के बिना महल नहीं बन पाते-कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने लिए नहीं मांगते सिंहासन दो पल की रोटी की खातिर मजदूर इधर से उधर जाते अपने पसीने की धारा में अपन … more →

Tags: Blogroll, Kavita, शेर-ओ-शायरी, कविता, shayree, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, शेर, चिन्तन

जैसा हम चाहें वैसा लिख और दिख:कविता साहित्य 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरा लिखा शब्द तेरे लिखे शब्द से भारी मैंने जो पढा व्याकरण तेरी भाषा भी उसमें सिमट जायेगी सारी मेरी … more →

Tags: Vichar, Kavita, शेर-ओ-शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, yakeen, शेर, चिन्तन

आओ बसंत तुम हो चिर जीवंत-(कविता)5 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आओ बसंत तुम हो चिर जीवंत शीत से ठिठुरते तन और मन को सहज ऋतू से नहलाओ आनंद का नहीं होता अंत कोई स … more →

Tags: शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, bharat, साहित्य, Education, Bloging, Friends, arebic

छूकर देखो अपना मन (कविता साहित्य)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मनोरंजन के लिए किसी दृश्य, वस्तु या आदमी की चाहत इन्सान को मजबूर करती है इधर-उधर जाने के लिए बाजार … more →

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हादसों के शहर-कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गाँव बढ़ते हुए शहर हो जाते हादसे उनका एक हिस्सा बन जाते गाँव से ऊबे लोग चलें शहर की ओर हरियाली और शा … more →

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सहज भाव के बिना नहीं बनता काम-कविता साहित्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुस्से में लिखे और बोले शब्दों को जो देखा अंजाम जिनके मुहँ से निकले थे जिनके हाथ से लिखे थे याद नहीं … more →

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जैसा हम कहैं वैसा ही दिख-कविता साहित्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लोगों का समूह एकत्रिक कर उसमें फूँकने के लिए जजबात उनका सन्देश है ”तू उधर से इधर आया है तो इधर … more →

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इसका गम नहीं-कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उनकी गली से निकलते हुए यूं भी हमें डर लगता है कि कहीं हमें देखकर उन्हें वह वादे याद न आयें जो कर वह … more →

Tags: Blogroll, hindi, Kavita, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, शेर


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