Blogs about: Hindi Kavia
उनका नाम ही दरियादिल हो जाता-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: अपने दिल का बयां कभी कभी दूसरे के अल्फ … more »
पटकथा लिखने वाले ने कमाल किया-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: बगल में अखबार दबाकर घर आया फंदेबाज और … more »
जब तक अंतर्जाल की माया, रहेगी इस ब्लाग की काया-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: ब्लाग पर लिख गया एक कमेंट एक पाठक ‘ दीप … more »
करते हास्य कविता की पैनी धार
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दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: फंदेबाज आया और बोला ‘दीपक बापू, तुम क् … more »
अभी मशहूर नहीं हो सकते-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: घर आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू हमें … more »
शादी कर ही हमारे ब्लॉग पर कमेन्ट लगाना-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कमेंट लिखने वाले ने पूछा ‘‘ मेरी प्रेम … more »
मेरे शब्दों को अपने दिल और दिमाग में जगह मत देना-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मेरे शब्दों को ही अपना तुम दोस्त समझ ल … more »
जब पीडा हो मन में तो शोर मचा दो-हिन्दी शायरी
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अपनी पीड़ाओं का बयान वह कुछ यूं करते है … more »
तो यह था एक बकरे का बलिदान-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आया फंदेबाज और बोला दीपक बापू अंतर्जा … more »
पर मजबूरियाँ इसकी इजाजत नहीं देतीं=हिन्दी शायरी
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कभी सोचते हैं कि दिमाग का बोझ उठाकर जम … more »
कोई नहीं हमारे पास बहाना-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: इधर जाऊं तो लोगों के चीखने चिल्लाने की … more »
बाजार, बल्ला, बाल, और ब्लोग-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: घर आकर बोला फंदेबाज बोला ”बापू, अपना … more »
चतुराई से मुट्ठी में कर लो-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हाथ में डंडे और मुहँ में नारे चले हैं स … more »
चलना ज़रा संभल कर-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: चिल्ला-चिल्लाकर करते हैं प्रेम मजे के … more »
यह प्यार है बाजार का खेल-कविता साहित्य
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: जगह-जगह नारे लगेंगे आज प्यार के नारे ब … more »
मजदूरों के पसीने के बिना महल नहीं बन पाते-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अपने लिए नहीं मांगते सिंहासन दो पल की … more »
जैसा हम चाहें वैसा लिख और दिख:कविता साहित्य
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: मेरा लिखा शब्द तेरे लिखे शब्द से भारी … more »
आओ बसंत तुम हो चिर जीवंत-(कविता)
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: आओ बसंत तुम हो चिर जीवंत शीत से ठिठुर … more »
छूकर देखो अपना मन (कविता साहित्य)
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: मनोरंजन के लिए किसी दृश्य, वस्तु या आद … more »
