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हर सख्श अपनी तनहाइ मे
हर सख्श अपनी तनहाइ मे अपनी परछाइ को ढुंढता है, चहेरो पर चढे चहेरो के पी… more »
Manish Pansiniya's Poems
मोबाइल मोहब्बत हो गई-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: प्रेमी ने प्रेमिका के मोबाइल की घंटी ब … more »
हर सख्श अपनी तनहाइ मे
Manish Pansiniya wrote 1 week ago: हर सख्श अपनी तनहाइ मे अपनी परछाइ क … more »
दील हो गया है दीवाना
Manish Pansiniya wrote 1 week ago: दील हो गया है दीवाना, जब से तुजे देखा जा … more »
तुम घुघंट मे गुमसुम बेठी हो
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Manish Pansiniya wrote 4 weeks ago: नयी दुल्हन के लीये…. तुम घुघंट मे … more »
तब तक बहुत देर हो जायेगी-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हर शाख पर उल्लू बिठा दो जब बिजली चली जा … more »
न्युज और टीवी -
Manish Pansiniya wrote 1 month ago: न्युज और टीवी , वाह कया रंग दिखलाते … more »
हमने भी कुछ खोया नहीं-हिन्दी शायरी
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अपनी राह चलते जाना है कहीं फूल बरसेंगे … more »
कल कल मे खुशीयो का पल बीता जाये
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Manish Pansiniya wrote 1 month ago: कल कल मे खुशीयो का पल बीता जाये, कुछ … more »
होली के दिन सबका चरित्र बदल जाता है-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: घर से नेकर और कैप पहनकर निकले घर से बाह … more »
जिदंगी बहे गइ है
Manish Pansiniya wrote 1 month ago: जो चाहा था ना मिला, ददँ दिल मे अब तक … more »
प्यार क्या है?
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Manish Pansiniya wrote 1 month ago: प्यार क्या है? जरा नीचे पढिये वो क … more »
दील खाली है, आशीयाँ भी
Manish Pansiniya wrote 1 month ago: दील खाली है, आशीयाँ भी खाली सा लगे, त … more »
दिल का राज, सिर का ताज -हिन्दी शायरी
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अपने दिल में ही बने रहें राज बस वही राज … more »
चाहा था तुमको दिल से
Manish Pansiniya wrote 2 months ago: चाहा था तुमको दिल से, समजा ना तुमने द … more »
कस्मकस है साँसो की
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Manish Pansiniya wrote 2 months ago: कस्मकस है साँसो की, लम्हो की बरसात … more »
दिल के आशियाने मे
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Manish Pansiniya wrote 2 months ago: दिल के आशियाने मे तेरी तसवीर लागाइ … more »
तुम्हारी रक्षा करेगा ज्ञान-साहित्यक कविता
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: गुरु ने शिष्य को विदा करने से पहले पूछ … more »
सच का भला कौन साथी होता-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अगर अकेले चल सकते हो जिन्दगी की राह पर … more »
शब्द बोलते जगह देखकर-कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: पढ़ते हैं कोई भाषा की बड़ी किताब लगाते … more »
