हम हम है बाकी सब पानी कम है, आज के नेताओका यही तो धरम है, कुसीँ के खेल के बाजीगर है ये, सच कहु तो यार इनमे बडा दम है, सचाइ से कया हासील है यार यहा तो पैसा भगवान है, हम तो जानवर से रहे गये हे बस वही लो… more →
Manish Pansiniya's Poemsदीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हर पल लोगों के सामने अपना कद बढाने की कोशिश हर बार समाज में सम्मान पाने की कोशिश आदमी को बांधे रहती … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अपनी कलम से कागज पर काली स्याही से जूता शब्द बार बार इस तरह न सजाओ कि आकाश से झुंड के झुंड बरसने लग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: महलों में रहने वाले भी ज्यादा पेट नहीं भर पाते-हिन्दी शायरी आकाश से टपकेगी उम्मीद ताकते हुए क्यों अप … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: धरती की रौशनी बचाने के लिये उन्होंने अपने घर और शहर में अंधेरा कर लिया फिर उजाले में कहीं वह लोग खो … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: असली इंसानों के चेहरे अब बुत की तरह नजर आते। लिखता कोई और संवाद, वह बोलते हुए दिख जाते।। बहुत पढ़ लि … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कुत्ता कहा तो क्या इनाम तो दिया आखिर गोरों ने दिया गुलाम की तरह व्यवहार किया तो क्या थप्पड़ मारकर सल … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: पृथ्वी के भ्रुण में पानी की जगह हो गयी पोली । पिचकारी में रंग नहीं भरता, कैसे मनायें प्रियतम होली।। … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →
Rohit Shrivastava wrote 4 months ago: मैंने रोशनी बाँटी है अंधेरों को, तुम्हारी राहें जगमगाने के लिये! मैं खिला बैठा हूँ राह के हर पत्थर प … more →
mehhekk wrote 4 months ago: रात के टीले पर चढ़कर चाँदनी की रेत पर चलकर आसमानी सागर पार करने के बाद रौशनाई नज़र आएगी चंदेरी पा … more →
Rohit Shrivastava wrote 5 months ago: चारों तरफ़ घोर विपदा प्रलय हो, भले ज्वार – भाटे सा निष्ठुर समय हो! हे भागीरथी! तुच्छ सागर में ल … more →
Rohit Shrivastava wrote 5 months ago: बस इतना सा एक आपका एहसान है लेना, इस सफ़र में ऐ हमसफ़र तू छोड़ ना देना! यूँ तो मुसाफ़िरों की भीड़ आती-जात … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →
Rohit Shrivastava wrote 5 months ago: नहीं समझ आया है आज भी, कोमल था या कर्कश देखा! कल मैंने एक सर्कस देखा !! जिस आयु में हमें दुलारा मात- … more →
Rohit Shrivastava wrote 5 months ago: प्रेम के हर भाव को सराहता हूँ मैं, प्रेम के अभाव में कराहता हूँ मैं! एक याद भर से उसकी, छलक जाते हैं … more →
Rohit Shrivastava wrote 5 months ago: इस पावन अवसर पर मैं कुछ मांग रहा हूँ आपसे, अपनी अनुकम्पा वृष्टि कर शुभ आषीश सदा देना! हो जाऊँ जब मैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: क्यों अपना दिल जलाते हो अपना यार इस दुनियां में होते हैं नाटक अपार कभी कहीं कत्ल होगा कहीं कातिल का … more →