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Aaj Kuch Alag Karna Hai

आज कुछ अलग करना है फिर से अपना बचपन जीना है
फिर से वही शरारतें ,  फिर से वही  सारे बातें
हर वह  छोटे पल का एहसास

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ऐ नौजवानों !

संभल कर रहना ऐ नौजवानों
कहीं अंधेरों में ना भटक जाना तुम
दूर् के नज़ारोन से
कहीं भ्रमित ना होना तुम .

होना तुम डटकर खड़े
अपने सच्चाई की लड़ाई में
हाथ थामना कमजोर का
चलना अपनी डगर पर होकर निर्भय …

संभलना इनसान के वेश में बैठे उस जल्लाद से
जिसकी नजरें हैं टिकी तुम्हारे शांत , कोमल मन के अज्ञान- पे
तुमसे ही है इस धरती का भविष्य
तुमसे ही है आस् सभी को
जो तुम भटक जाओ स़फर में
लानत है हमारे संस्कार पर !

खड़े हैं हाथ में लिए यह कमान
थामने तुम्हे गर्व से
संभलना ऐ नौजवानों
इस देश के धरोहर को सम्मान से

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