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Blogs about: Hindi Kavita

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एक बचपन उसने जिया (बाल दिवस विशेष)2 comments

Nidhi KM wrote 3 days ago: एक कमरा सपनो  भरा, फर्श मखमली, छत सितारों भरीं, दीवारें रंगों सजीं, खिड़कियाँ फूलों रंगीं, सपने कहीं … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, छनिकाएँ, 14 November, आकाश, एक, खिड़कि, छत, छाँव

फरिश्ते होने का अहसास जताते-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →

Tags: दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Family, Friends, hasya kavita, hasya vyang

बहुत कोशिश की5 comments

Nidhi KM wrote 2 weeks ago: कदमों से कदमों को, मिलाने की बहुत कोशिश की, कभी मैं आगे बढ़ गयी, कभी तुम पीछे रह गये, बातों को बातों … more →

Tags: कविताएँ, दिल से दिल की बात..., कदम, कभी, कोशिश, तुम, निधि, मन, मैं

नवयुवती 1 comment

Nidhi KM wrote 3 weeks ago: सड़क के गढ्ढों मे, डोलता हुआ, आटो चला जा रहा था, एक स्टॉप मे, नवयुवती के चढ़ते ही, सारी नज़रे उस पर … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, छनिकाएँ, nidhi, Social, अपमान, जवान, नज़र, नवयुवती

शयों का रोज शक्ल बदलना-हिन्दी व्यंग्य कविता (shayon ka roop-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जरुरतों की शयों का रोज शक्ल बदलना दौलत के पहाड़ पर इंसानों की चाहतों का चढ़ना तरक्की का यह पैमाना नहीं … more →

Tags: abhivyakti, arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हंसना, हिन्दी

लहरें देखकर खेलने का मन करता है-हिंदी कविता(lahren aur man-hindi kavita)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जिंदगी की इस धारा में किस किसकी नाव पार लगाओगे। समंदर से गहरी है इसकी धारा लहरे इतनी ऊंची कि आकाश का … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

कल्पना से परे-हिंदी व्यंग्य कविता (kalpna se pare-hindi vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात में सड़क पर चलते हुए जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं। तब य … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द

लाल्टू की चुनी हुई कवितायें5 comments

अफ़लातून wrote 2 months ago: आ मैं तुझे खुद में शामिल करता हूँ मेरी रातों में कही जा तू कविता फैलता हुआ तुझे थामने स्थिर होता लील … more →

Tags: hindi, Hindi Poems, laltu, कविता, लाल्टू, हिन्दी कविता

अब1 comment

Nidhi KM wrote 2 months ago: 1) पहले :- बिन दस्तक, बिन आहट के, तुम मेरे दिल तक आए, कुछ यूँ समाए की, दूजी, सारी दस्तकें, सारी आहटे … more →

Tags: कविताएँ, दिल से दिल की बात..., nidhi, तुम, I, दिल, मेरे, दूर, आवाज़

ख़्वाहिश है...2 comments

Nidhi KM wrote 3 months ago: तुमसे ज़्यादा और ज़्यादा पाने की और तुम्हे देने ख़्वाहिश है तुम्हारी बाहों मे जीने और मरने की ख़्वाह … more →

Tags: कविताएँ, छनिकाएँ, कदम, ख़्वाहिश, खुशी, चार, ज़िंदगी, ज़्यादा, जीने

चेहरे कब तक बनावटी सामान से सजाओगे-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →

Tags: hasya -vyangya, Kavita, Shayri, writer, Hindi writing, vyangya kavita, India, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

झूठ भी सच की तरह सजाते-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हर पल लोगों के सामने अपना कद बढाने की कोशिश हर बार समाज में सम्मान पाने की कोशिश आदमी को बांधे रहती … more →

Tags: inglish, चिन्तन, शायरी, व्यंग्य, India, web dunia, web bhaskar, web navabharat, hindi sahitya

तुम 6 comments

Nidhi KM wrote 1 month ago: तुम बहुत मीठा बोलते हो, हर शब्द को, चाशनी मे घोलते हो, मिशरी की तरह, रस घोलते हो, न कड़वा बोलते हो, … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, दिल से दिल की बात..., कड़वा, तीर, तुम, मीठा, शब्द, सच

हिंदी दिवस इसलिये मनाते-हास्य कविता (hindi divas manate-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: पोते ने कहा दादा से ‘पापा ने उस कार्यक्रम में साथ ले जाने से मना कर दिया जिसमें हर वर्ष हिंदी दिवस प … more →

Tags: हिन्दी, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, India, हास्य व्यंग्य, Shayri, अनुभूति, हिंदी साहित्य

मैं अपने मन की राह चुनूंगीं3 comments

Nidhi KM wrote 3 months ago: मैने कयी बार, कभी अपनों के, कभी तुम्हारे कहने पर, नयी सुबह का इंतज़ार किया, नयी माला मे फूल गुथे, नय … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, इंतज़ार, कभी, काली रात, खुशबू, घर, जीवन, तुम्हारे

देशी बीमारी, विदेशी बीमारी-हास्य कविता (deshi aur videshi bimari-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: स्वाईन फ्लू की बीमारी ने आते ही देश में प्रसिद्धि आई। इतने इंतजार के बाद, आखिर शिकार ढूंढते विदेश से … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, मनोरंजन स्वाईन फ्लू, शायरी

कुछ पंक्तियाँ

Nidhi KM wrote 3 months ago: चलते थे जिस ज़मीं पर, संभल संभल कर हम, सरकी वही ज़मी  नये कदम उठाने के पहले, आसमान से तो पानी बरसता … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, छनिकाएँ, Social, आग, आसमान, कदम, ग्रहण, ज़मीं

तेरे इंतज़ार मे...2 comments

Nidhi KM wrote 3 months ago: हम तेरे इंतज़ार के आदि है, ये जानकार तुम, ना जाने कब तक इंतज़ार कारवाओगे? इस इंतज़ार मे ही जीना है, … more →

Tags: कविताएँ, छनिकाएँ, दिल से दिल की बात..., आदि, इंतज़ार, तेरे, हम, हिंदी कविता, Blessings

अकेला अक्षर-हिंदी कविता (akshara,shabda & bhasha-hindi kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कभी शब्द नहीं बनता अकेला शब्द कभी भाषा नहीं बनता। कई मिलकर बनाते हैं एक भाव समूह जिससे उनका निज परिच … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, नज़रिया, मस्तराम, व्यंग्य


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