स्वर्ग को चूम, खुशीओं की हवायें बिखर गई, अनजान अनदेखी दिशाओं में, जब जब घाटी में जली बर्फ़, सपनों को चूम, जवानी की कलियाँ बिखर गई, अनजान अनदेखी वादियों में, जब जब घाटी में जली बर्फ़, जीवन को चूम, परिव… more →
मेरे कुछ पलप्रवीण wrote 1 month ago: स्वर्ग को चूम, खुशीओं की हवायें बिखर गई, अनजान अनदेखी दिशाओं में, जब जब घाटी में जली बर्फ़, सपनों को … more →
प्रवीण wrote 1 month ago: दिन, दिन तू ये कहने को है ! रात, रात तू ये कहने को है! हमारी रात तू तब होती है, जब आपकी जुल्फ़ की चि … more →
प्रवीण wrote 2 months ago: जिंदिगी का हर पल , सदियों में बदल गया, तुम याद आई इतना ! एक बूंद की प्यास में, मैं सागर पी गया, तुम … more →
प्रवीण wrote 3 months ago: ये आपकी बिखरी जुल्फ की ख़ता है, हम नहीं जानते ! ये मेरा दिल भी धराकता है, हम इतना जानते है! … more →
प्रवीण wrote 4 months ago: मेरे कैमरा से... एक रोमांटिक शाम Kungsträdgården, Stockholm में ... जिंदिगी सुर्ख रेत की तरह … more →
प्रवीण wrote 6 months ago: पक्ष: चुनाव हुआ. नयी सरकार बनी. सरकार धर्मनिरपेक्ष है. आरक्षण के पक्ष में है, गरीबो के बारे में सोचत … more →
प्रवीण wrote 6 months ago: प्यार क्या है! वो नहीं जानते … हर मुस्कुराहट को ख़ुशी समझे लेते है ! प्यार क्या है! हम नहीं जा … more →
प्रवीण wrote 6 months ago: मेरे घर की खिड़की से स्टॉकहोम शहर का एक दृश्य, रात ११:०० pm, जून २००९. आपकी याद में दिन गुजर जाता है … more →
प्रवीण wrote 6 months ago: Baltic Sea, Slussen, Stockholm उनको अच्छा लगता है, मेरा गुन गुनाना… मेरा लिखना … क्या लि … more →