अपने विरोधी पर शब्द प्रहार करते हुए उन्होंने कहा ‘वह बरसों जनता की सेवा में लगे हैं लोग भी अब उनके चेहरे से थके हैं नया चेहरा सामने नहीं आने देते जहां मौका मिलता वहीं अपने लिये हाथ फैला लेते हैं। हमें… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 3 days ago: अपने विरोधी पर शब्द प्रहार करते हुए उन्होंने कहा ‘वह बरसों जनता की सेवा में लगे हैं लोग भी अब उनके च … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ————————- सत्यत्वे न शशा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————— यानाश्य्यासनान्यस्य, कूपोद्यान ग्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कूकट कूटै कन बिना, बिन करनी का ज्ञान। ज्यौं बन्दूक गोली बिना, भड़क न मरि आन।। संत शिरोमणि कबीरदास जी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: ग्रहीत्वां दक्षिणां विप्रास्त्यजन्ति यजमानकम्। प्राप्तविद्यां गुरुं शिष्या दग्धाऽरण्यं मृगास्तथा। हि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: दुखिया भूखा दुख कीं, सुखिया सुख कौं झूरि सदा अजंदी राम के, जिनि सुख-दुख गेल्हे दूरि संत शिरोमणि कबीर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: परकार्यविहन्ता च दाम्भिकः स्वार्थसाधकः। छली द्वेषी मृदः क्रूरो विप्रो मार्जार उच्यते।। हिंदी में भाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वह एक ब्राह्म्ण लेखक का पाठ था-ऐसा उन्होंने अपने पाठ में स्वयं ही बताया था। उसने बताया कि राजस्थान क … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उस पिकनिक हम सब आम लोग ही थे पर दूसरों से कुछ अलग! हम सभी नियमित योग साधना करने वाले लोग थे। योगी कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: यह एलेक्सा की चूक भी हो सकती है और सच भी कि इस लेखक के ‘अनंत शब्दयोग’ ब्लाग को विश्व में … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: प्रीति कर सुख लेने को सुख गया हिराय जैसे पाइ छछुंदरी, पकडि सींप पछिताय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: १.जो कार्य दूसरों के अधीन रहकर ही किये जा सकते हैं उनको पूरी तरह त्याग देना ही श्रेयस्कर है, तथा अपन … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: परिवर्तिनि संसारे मृतः को वा न जायते स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम् हिंदी में भावार्थ-परिवर्त … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: रहिमन धोखे भाव से, मुख से निकले राम पावत पूरन परम गति, कामादिक कौ धाम कविवर रहीम कहते हैं कि अगर धोख … more →