दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितम् छादनमज्ञतायाः। विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितना … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: १.जो कार्य दूसरों के अधीन रहकर ही किये जा सकते हैं उनको पूरी तरह त्याग देना ही श्रेयस्कर है, तथा अप … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: ‘अरी, सुनती हो 13 नंबर वालों की लड़की भाग गयी’ ‘किसके साथ’’ ‘अरे, भागी किसके साथ होगी? तुम्हारे अंदर … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन निज मन की बिधा, मन ही राखो गोय सुनि अठिलैहैं लोग सब, बांटि न लैहैं कोय कविवर रहीम कहते है अपन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अर्थशास्त्र के ‘मांग और आपूर्ति का नियम’ उन्होंने कुछ इस तरह समझाया ‘जब कारखाने में चीज बनती हो पर ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: छोटेन सों साहैं बंड़े, कहि रहीम यह लेख सहसन का हय बांधियत, लै दमरी की मेख कविवर रहीम कहते हैं कि छोट … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछु न देत कविवर रहीम कहते हैं कि बं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देनदार कोउ और है, भेजत सा दिन रैन लोग भरम पै धरे, वाते नीचे नैन कविवर रहीम कहते हैं कि इस जीवन में क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन सो न कछु गनै, जासों, लागे नैन सहि के सोच बेसाहियो, गया हाथ को चैन कविवर रहीम कहते हैं कि जिन म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्र्जाल पर मैं लिखता हूं इसका अर्थ यह कदापि नहीं लिया जाना चाहिए कि मै किसी उच्च मध्यम परिवार से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मैने एक अंग्रेजी ब्लाग पर पाकिस्तानी फिल्म ‘खुदा के लिये’ के बारे में चर्चा पढ़ी। अंग्रेजी से हिं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यस्यं त्रैवाषिक्र भक्तं पर्याप्तं भृत्यवृत्तये अधिकं वापि विद्येत सः सोम पातुमर्हति जिस व्यक्ति के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: न वार्यपि प्रयचछत्तु बैडालव्रतिके द्विजे न बकव्रतिके विप्रे नावेदविदि धर्मवित् धार्मिक वृत्ति के लोग … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यद्ध्यायति यतकुरुते धृतिं बध्नाति यत्र च तद्वाप्नोत्ययत्नेन यो हिनस्ति न किञ्चन ऐसा व्यक्ति जो किस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन रीति सराहिए, जो घाट सुन सम होय भांति आप पै डारी के, सबै पियावै तोय कविवर रहीम कहते हैं कि कलश … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.युवावस्था में काम-क्रोध हावी होते हैं, इसी कारण व्यक्ति की विवेक शक्ति निष्क्रिय हो जाती है। काम व … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कौन बडाई जलधि मिली, गंग नाम भी धीम केहि की प्रभुता नहिं घटी, पर घर गए रहीम कविवर रहीम कहते हैं कि स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक ब्लोगर पहुचा अपने गुरु के पास और चढाया प्रसाद उनकी कृपा होने पर गुरु बहुत खुश हुए और हालचाल पूछे … more →