दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: कबीर सांई मुझ को, रूखी रोटी देय। चुपड़ी मांगत मैं डरूं, मत रूखी छिन लेय।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: कौटिल्य महाराज के अनुसार —————————- उच्चेरुच्च … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्षान्तिश्चत्कवचेन किं किमनिरभिः क्रोधीऽस्ति चेद्दिहिनां ज्ञातिश्चयेदनलेन किं यदि सहृदद्दिव्यौषधं कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कृशः काणः खञ्ज श्रवणरहितः पुच्छविकलो व्रणी पूयक्लिनः कृमिकुलशतैरावुततनु क्षुधाक्षामो जीर्णः पिठरककाप … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: १.जो कार्य दूसरों के अधीन रहकर ही किये जा सकते हैं उनको पूरी तरह त्याग देना ही श्रेयस्कर है, तथा अपन … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: रहिमन धोखे भाव से, मुख से निकले राम पावत पूरन परम गति, कामादिक कौ धाम कविवर रहीम कहते हैं कि अगर धोख … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अष्ट सिद्धि नव निधि लौं, सबही मोह की खान त्याग मोह की वासना, कहैं कबीर सुजान संत श्री कबीरदास का कथन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन चाक कुम्हार को, मांगे दिया ना देह छेद में डंडा डारि कै, चहै नांद लै लेइ कविवर रहीम कह्ते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: स्वपरप्रतारकोऽसौ निन्दति योऽलीकपण्डितो युवतीः यस्मात्तपसोऽपि फलं स्वर्गस्तयापि फलं तथाप्सरसः हिंदी म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फरजी सह न ह्म सकै गति टेढ़ी तासीर रहिमन सीधे चालसौं, प्यादा होत वजीर कविवर रहीम कहते हैं कि प्रेम मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पढ़ै गुनै सीखै सुनै, मिटी न संसे सूल कहैं कबीर कासों कहूं, ये ही दुख का मूल संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन निज मन की बिधा, मन ही राखो गोय सुनि अठिलैहैं लोग सब, बांटि न लैहैं कोय कविवर रहीम कहते है अपने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: श्रम ही ते सब होत है, जो मन सखी धीर श्रम ते खोदत कूप ज्यों, थल में प्रगटै नीर संत शिरोमणि कबीरदास जी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जसी परै सो सहि रहै, कहि रहीम यह देह धरती पर ही परत है, शीत घाम और मेह कविवर रहीम कहते हैं कि इस मानव … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मान सहित विष खाय के, संभु जगदीस बिना मान अमृत पिये, राहु कटायी सीस कविवर रहीम कहते हैं कि सम्मान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: छोटेन सों साहैं बंड़े, कहि रहीम यह लेख सहसन का हय बांधियत, लै दमरी की मेख कविवर रहीम कहते हैं कि छोट … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछु न देत कविवर रहीम कहते हैं कि बंस … more →