दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रि … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: अष्ट सिद्धि नव निधि लौं, सबही मोह की खान त्याग मोह की वासना, कहैं कबीर सुजान संत श्री कबीरदास का कथन … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पा … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस दिन भारत ने पाकिस्तान को क्रिकेट मैच में हरा दिया तो सारे प्रचार माध्यम जनता को बहलाने फुसलाने मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शहर का गुलशन उन्होंने उजाड़ कर अपने पत्थरों का घर सजा लिया जब हवाओं ने दिया धोखा तो साँसों का सिलेंड … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन में प्यास थी प्यार की एक बूंद भी मिल जाती तो अमृत पीने जैसा आनंद आता पर लोग खुद ही तरसे हैं तो हम … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाहिं कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज आजश्री जयप्रकाश मानस का एक आलेख पढ़कर यह विचार मेरे हृदय में आया कि आजकल हमारे समाज में परिश्रम … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: विचारों की धारा मस्तिष्क में बहती चली जाती है जब तक बहती है अच्छा लगता है जब एक विचार अटक जाता है रु … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन सो न कछु गनै, जासों, लागे नैन सहि के सोच बेसाहियो, गया हाथ को चैन कविवर रहीम कहते हैं कि जिन म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जीवनां मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम् मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवन न संशयः धर्म रहित प्राणी जीवित … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्र्जाल पर मैं लिखता हूं इसका अर्थ यह कदापि नहीं लिया जाना चाहिए कि मै किसी उच्च मध्यम परिवार से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मैने एक अंग्रेजी ब्लाग पर पाकिस्तानी फिल्म ‘खुदा के लिये’ के बारे में चर्चा पढ़ी। अंग्रेजी से हिं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सर्वैषामेव शौचानामर्थशौचं परं स्मृतम् योऽथेंशुचिहिं स शुचिर्न मृद्वारिशुचिः शुचिः जीवन में पवित्रता … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भिक्षामप्युदपात्रं वा सत्कृत्य विधिपूर्वकम् वेदतत्त्वर्थविदूषे, ब्राहणानापादयेत, यदि अपने घर में खाद … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: टूटा हाथ लेकर आया फंदेबाज तो पूछने पर बताया- ‘दीपक बापू, कल रात हमने सपने में देखा आपको ब्लाग के लिय … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रास्ते में टकरा गया फंदेबाज और घूर-घूर कर देखता हूआ बोला- ‘दीपक बापू हाथ लगाकर हमसे क्या छिपा रहे हो … more →