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Blogs about: Hindi Mitra

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समाज हिलता नजर आता हास्य व्यंग्य कविता (javani divani aur budhapa-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द

विज्ञापन स्वामी की जय हो-हिंदी व्यंग्य (add and tv sirial-hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आखिर यह कोई सुनियोजित एजेंडा है या अनजाने में बन गयी सोच कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और धर्मों पर … more →

Tags: अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, भारत, bharat, अनुभूति, चिन्तन, Blogger, Blogging, दीपकबापू

‘सविता भाभी’ से मस्त राम पीछे- व्यंग्य आलेख 'savita bhabhi' se pichhe 'mastram'-hindi vyangya article

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रि … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

कंपनी कभी देवता तो कभी दानव -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती ह … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, मस्तराम, Blogging, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

कबीर के दोहे: ज्ञान चर्चा चौराहे पर और ध्यान एकांत में ही करो

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अष्ट सिद्धि नव निधि लौं, सबही मोह की खान त्याग मोह की वासना, कहैं कबीर सुजान संत श्री कबीरदास का कथन … more →

Tags: hindi Personal, Hindi Education, Hindi friends, Hindi Poem, Hindi Darshan, Hindu darshan, India, hindu dharm, hindi duniya

लोगों के मन का सहारा है परनिंदा करना-व्यंग्य आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

रहीम के दोहे-दीनता के भाव बिना भक्ति का आनंद नहीं मिलता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते है … more →

Tags: अध्यात्म, आलेख, कला, मस्तराम, समाज, हिंदी पत्रिका, bharat, Blogroll, Deepak bharatdeep

समय समय की बात है-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस दिन भारत ने पाकिस्तान को क्रिकेट मैच में हरा दिया तो सारे प्रचार माध्यम जनता को बहलाने फुसलाने मे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, संपादकीय

खून की तरह दर्द भी बेचते हैं लोग-हिन्दी शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शहर का गुलशन उन्होंने उजाड़ कर अपने पत्थरों का घर सजा लिया जब हवाओं ने दिया धोखा तो साँसों का सिलेंड … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, कला, कविता, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द

hasya kavita-प्यार कोई कारखाने में बनने वाली चीज नहीं है-कविता5 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन में प्यास थी प्यार की एक बूंद भी मिल जाती तो अमृत पीने जैसा आनंद आता पर लोग खुद ही तरसे हैं तो हम … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, समाज, साहित्य

रहीम के दोहे:किसी के कहने से बड़े लोग छोटे नहीं हो जाते3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाहिं कविवर रहीम कहते हैं … more →

Tags: hindi Personal, Hindi friends, hasya vyangy, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, India, bharat, hindu dharm

सारी पीड़ाऐ बाहर ले आता है पसीना-कविता एवं आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज आजश्री जयप्रकाश मानस का एक आलेख पढ़कर यह विचार मेरे हृदय में आया कि आजकल हमारे समाज में परिश्रम म … more →

Tags: Blogroll, inglish, India, Shayri, media, Education, Internet, Bloging, Friends

विचारों की धारा-कविता5 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: विचारों की धारा मस्तिष्क में बहती चली जाती है जब तक बहती है अच्छा लगता है जब एक विचार अटक जाता है रु … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर

रहीम के दोहेःगुणहीन व्यक्ति पशु के समान1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन सो न कछु गनै, जासों, लागे नैन सहि के सोच बेसाहियो, गया हाथ को चैन कविवर रहीम कहते हैं कि जिन म … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindi Education, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, bharat

चाणक्य नीतिःतपस्या से असंभव भी हो जाता हैं संभव

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जीवनां मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम् मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवन न संशयः धर्म रहित प्राणी जीवित … more →

Tags: अनुभूति, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, bharat, Blogroll, Chanakya, chankya, hindi abhivyakti, hindi adhyatm

दर्द की बजाय लिखना पसंद है संघर्ष पर3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्र्जाल पर मैं लिखता हूं इसका अर्थ यह कदापि नहीं लिया जाना चाहिए कि मै किसी उच्च मध्यम परिवार से … more →

Tags: Blogroll, Vichar, inglish, अभिव्यक्ति, meadia, संपादकीय, India, bharat, अनुभूति

कम दर्शकों द्वारा फिल्म देखने की शिकायत बेमानी-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मैने एक अंग्रेजी ब्लाग पर पाकिस्तानी फिल्म ‘खुदा के लिये’ के बारे में चर्चा पढ़ी। अंग्रेजी से हिं … more →

Tags: Blogroll, inglish, अभिव्यक्ति, Thought, संपादकीय, विश्वास, India, bharat, अनुभूति

मनुस्मृतिःईमानदारी से धन कमाना ही है सबसे बड़ी पवित्रता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सर्वैषामेव शौचानामर्थशौचं परं स्मृतम् योऽथेंशुचिहिं स शुचिर्न मृद्वारिशुचिः शुचिः जीवन में पवित्रता … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, कला, समाज, हिंदी पत्रिका, bharat, Deepak bharatdeep

मनु स्मृतिःधन और अन्न न हो तो जल का दान भी पुण्य देना वाला 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भिक्षामप्युदपात्रं वा सत्कृत्य विधिपूर्वकम् वेदतत्त्वर्थविदूषे, ब्राहणानापादयेत, यदि अपने घर में खाद … more →

Tags: आध्यात्म, समाज, हिंदी पत्रिका, bharat, Deepak bharatdeep, deshbord, Global Dashboard, hindi adhyatm, Hindi Blogging


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