कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती हैं। प्राचीन व्यापार में सेठ साहूकार यही काम करते थे पर जैसे लोगों के जागृति बढ़ने लगी उनके चेहरे स्य… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल तिल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने संगठन का चिंतन शिविर उन्होंने किसी मैदान की बजाय अब एक होटल में लगाया जहां सभी ने मिलकर अपना सम … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक सपना लेकर सभी लोग आते हैं सामने दूर कहीं दिखाते हैं सोने-चांदी से बना सिंहासन कहते हैं ‘तुम उस पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सच बहुत कड़वा होता है और अगर आप किसी के बारे में कोई विचार अपने मस्तिष्क में हैं और आपको लगता है कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पिछले वर्ष जुलाई में वृंदावन से हम दोनों पति-पत्नी अपने शहर के लिये चले। हमने मथुरा के मार्ग पर प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सम्मेलनों के आयोजने करने के आदी लोगों की संस्था के पदाधिकारियों के दिमाग में ‘बुद्धिजीवी महिला सम् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: घर से नेकर और कैप पहनकर निकले घर से बाहर निकले लेने किराने का सामान तो सामने से आता दिखा फंदेबाज और … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब दो फिल्म अभिनेताओं में झगडा शुरू हो गया है कि वह नंबर वन हैं। आज जब मैंने यह खबर एक टीवी चैनल पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम नहीं होगी। टीम ओलंपिक जाती थी तो कौनसे तीर मारती थी कहने वाले तो कह सकते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक ब्लोग पर हमने वह वेब साईट देखी जिसमें सभी ब्लोग की कीमत का मूल्यांकन किया जा सकता है. उत्सुकता … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुरु ने शिष्य को विदा करने से पहले पूछा ”तुम अब जाओगे जीवन के पथ पर चल्रते जाओगे प्रगति पथ पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुरु कुम्हार शीश कुंभ है, गढ़िं-गढ़िं काढेँ खोट अंतर हाथ सहार दे, बाहर बाहि चोट संत शिरोमणि कबीरदास जी … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: नाटक या नाट्य में प्रयुक्त भाषा को नाट्यभाषा कहते हैं। भरत के अनुसार नाट्य या नाटक वह है जो लोकस्वभा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक ब्लोगर ने अपने ब्लोगर ने अपनी पोस्ट पर लिखी कहानी शीर्षक लिखा ”मैं प्यार करता चाहता हूँ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बाबू ने एक हाथ में फाईल पकडी और ब्लोगर की तरफ हाथ बढाया पहले तो वह समझा नहीं और जब समझा तो गुस्सा आय … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: प्रेयसी ने प्रियतमा को सुझाया जब तक मेरा कोर्स पूरा न हो तब तक ब्लोग बनाकर मजे कर लें इसमें जब मशहूर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक कहैं कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक संत कबीर जी का कहना है की गाली आते … more →