दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर क … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः। वेदावादरताः पार्थ नान्यदरस्तीति वादिनः।। कामात्मानः स्वर … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: यह एलेक्सा की चूक भी हो सकती है और सच भी कि इस लेखक के ‘अनंत शब्दयोग’ ब्लाग को विश्व में … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: समलैंगिक मामले पर न्यायालय का निर्णय शिरोधार्य! लोगों के अपने दैहिक संबंधों पर स्वयं ही निर्णय करने … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: १.जो कार्य दूसरों के अधीन रहकर ही किये जा सकते हैं उनको पूरी तरह त्याग देना ही श्रेयस्कर है, तथा अपन … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: रहिमन धोखे भाव से, मुख से निकले राम पावत पूरन परम गति, कामादिक कौ धाम कविवर रहीम कहते हैं कि अगर धोख … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: तावन्महत्तवं पाण्डित्यं कुलीनत्वं विवेकता यावज्जवलति नांगेषु हतः पञ्वेषु पावकः हिंदी में भावार्थ-हृद … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: धरती फाटे मेघ मिलै, कपड़ा फाटे डौर तन फाटे को औषधि, मन फाटे नहिं ठौर संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: 1.निरोग रहना, ऋणी न होना, विदेश में रहना, अच्छे लोगों के साथ मेल होना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना औ … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: न जातु कामा कामानामुपभोगेन शाम्यति हविपा कृष्णावत्र्मेव भूव एवाभिवर्धते जिस प्रकार अग्नि में घी डालन … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: संपति भरम गंवाइ के, हाथ रहत कछु नाहिं ज्यों रहीम ससि रहत है, दिवस अकासहिं मांहि कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: रहिमन चाक कुम्हार को, मांगे दिया ना देह छेद में डंडा डारि कै, चहै नांद लै लेइ कविवर रहीम कह्ते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.इस संसार में गुणी व्यक्ति का सम्मान सभी जगह पाया जाता है, भले ही वह अर्थाभाव से पीड़ित हो। भारी धन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन राज सराहिए ससिसम सुखद जो होय कहा वापुरी भानु है, तपैं तरैवन खोय कविवर रहीम कहते है की उसी राज् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भारतीय योग एक प्राचीनतम विद्या मानी जाती है जिसके जनक महर्षि पतंजलि हैं। यह एक बृहद विषय है और भगवान … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: स्वपरप्रतारकोऽसौ निन्दति योऽलीकपण्डितो युवतीः यस्मात्तपसोऽपि फलं स्वर्गस्तयापि फलं तथाप्सरसः हिंदी म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फरजी सह न ह्म सकै गति टेढ़ी तासीर रहिमन सीधे चालसौं, प्यादा होत वजीर कविवर रहीम कहते हैं कि प्रेम मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पढ़ै गुनै सीखै सुनै, मिटी न संसे सूल कहैं कबीर कासों कहूं, ये ही दुख का मूल संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन निज मन की बिधा, मन ही राखो गोय सुनि अठिलैहैं लोग सब, बांटि न लैहैं कोय कविवर रहीम कहते है अपने … more →