दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: उन सज्जन ने सच की पहचान करने वाली मशीन की दुकान लगाई पर उसके उद्घाटन के लिये कोई तैयार नहीं हुआ भाई। … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नयी सहेली वक़्त मिला सोचा बाज़ार जाउँ दो-चार दिन की सब्जी खरीद लाउँ रास्ते में मिली नार नवेली बातों … more →
mehhekk wrote 1 year ago: देखिए आप हमे चन्दा ना कहलाये ये सुनकर आज कल हमसे पहले वो आसमान का चाँद ही शरमाये जो लफ्जे तारीफ आप ह … more →