Blogs about: Hindi Poem

Featured Blog

जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 hours ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

कुछ खोई हुई

mequitnever wrote 3 weeks ago: आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज … more →

Tags: ज़िन्दगी life, Life, angry, Awareness, कविता, कवितायें, हिंदी कविता, हिंदी कवितायें, death

तंबू फिर तनेगा-त्रिपदम

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्यों डरे हो काफिला लुट गया फिर बनेगा। यह तूफान उड़ा ले गया तंबू फिर तनेगा। हार या जीत का चक्र चलता ह … more →

Tags: इंटरनेट, मस्त राम, शायरी, हास्य, हिन्दी, darshan, Deepak bharatdeep, mast ram, web bhaskar

बिना मेकअप के अभिनय-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य

बीच बाज़ार में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

इन्सान जमीन पर कटते रहे-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →

Tags: कविता, नज़रिया, शायरी, व्यंग्य, भारत, Education, Internet, शब्द, web duniya

चांदी के कप की खातिर- हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: इतिहास में नाम दर्ज करने की अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिये वह किसी भी हद तक जाऐंगे। कहीं जिंदा आदमी … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, रचना, लेखक, व्यंग्य

गुलामी जैसी आज़ादी-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नजरें फेरकर वह चले जाते हैं। देखने में लगते हैं हमसे बेपरवाह पर हकीकत यह है कि हमारी आंखों में उनको … more →

Tags: दीपक भारतदीप, समाज, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Family, Friends, hasya -vyangya, hindi article, Hindi writing

क्यों जंग का बिगुल बजा रहे हो-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →

Tags: शायरी, व्यंग्य, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति, अनुभूति, शब्द, इंटरनेट

युवा पीढ़ी को प्रोत्साहन-(हास्य व्यंग्य)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वह पुराना अभिनेता अपने बैठक कक्ष में सिगरेट पर सिगरेट फूंकता हुआ इधर से उधर चहलकदमी कर रहा था। उसने … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, समाज, साहित्य, सृजन

चेहरे कब तक बनावटी सामान से सजाओगे-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →

Tags: hasya -vyangya, Kavita, Shayri, writer, Hindi writing, hindi kavita, vyangya kavita, India, Deepak bharatdeep

कवि ने वरदान माँगा -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कवि की हाजिरी पर प्रसन्न होकर अपने दरबार में प्रकट हुए सर्वशक्तिमान और बोले ‘दो में से एक वर मांग ले … more →

Tags: Internet, सन्देश, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web dunia, web duniya, web bhaskar, web panjab kesri, mastram

सब चलता है-हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम खड़े हैं जहां छू रहा है चारों तरफ से डीजल और पेट्रोल का धुआं। कोई बात नहीं सब चलता है यह भी चलेगा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, हिंदी पत्रिका, हिंदी साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep

अपने अरमानों का बोझ ढोने वाला-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बड़े आदमी बनने के लिये सभी इंसान जूझ रहे हैं सदियां बीत गयी हैं पर कौन छोटा है या बड़ा सभी इस पहली स … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, कविता, दीपक भारतदीप, मस्त राम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep

जोरदार और रंगीन तकदीर वह लिखा लाये-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आसमान से जमीन पर आते हुए लिखा लाये हैं वह अपनी रंगीन तकदीर। न ख्याल उनका अपना न कोई सोच अपनी पर जमान … more →

Tags: hasya kavita, hasya vyang, aritile in hindi, Hindi writing, vyangya kavita, समाज, India, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

कवि भी अपनी पीड़ाओं से छिपता है-व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उसने कहा कवि से ‘तू क्यों कविता लिखता है सारे जमाने का दर्द समेट कर अपने शब्दों में अपनी ही पीड़ाओं … more →

Tags: writing, vyangya, inglish, व्यंग्य चिंतन, India, साहित्य, Internet, Urdu, क्षणिका

कागज़ पर कलम से जूते न सजाओ-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अपनी कलम से कागज पर काली स्याही से जूता शब्द बार बार इस तरह न सजाओ कि आकाश से झुंड के झुंड बरसने लग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, रचना, हास्य, हिन्दी

हरियाली के कायदे रेगिस्तान में नहीं चलते-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Life, Internet, Education, Love, hindi bharat, web dunia

पत्थर का बोझ-हास्य व्यंग्य कवितायेँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →

Tags: inglish, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, भारत, हिंदी साहित्य, साहित्य, media, Internet, Friends


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “hindi-poem”:
Technorati Del.icio.us IceRocket