कभी तो ऐसा हो नींद पलकों में सिमट जाते ही ख्वाबों में तुम आ जाओ हम कुछ कहने से पहले ही मोहोब्बत की शमा जलाओ कभी तो ऐसा हो शाम अपने सिंगार खड़ी टहल रही हो छत पे हम आह्ट पहचाने तब तक तुम देहलीज़ पार भीत… more →
mehekदीपक भारतदीप wrote 10 hours ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →
mequitnever wrote 3 weeks ago: आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्यों डरे हो काफिला लुट गया फिर बनेगा। यह तूफान उड़ा ले गया तंबू फिर तनेगा। हार या जीत का चक्र चलता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: इतिहास में नाम दर्ज करने की अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिये वह किसी भी हद तक जाऐंगे। कहीं जिंदा आदमी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नजरें फेरकर वह चले जाते हैं। देखने में लगते हैं हमसे बेपरवाह पर हकीकत यह है कि हमारी आंखों में उनको … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वह पुराना अभिनेता अपने बैठक कक्ष में सिगरेट पर सिगरेट फूंकता हुआ इधर से उधर चहलकदमी कर रहा था। उसने … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कवि की हाजिरी पर प्रसन्न होकर अपने दरबार में प्रकट हुए सर्वशक्तिमान और बोले ‘दो में से एक वर मांग ले … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम खड़े हैं जहां छू रहा है चारों तरफ से डीजल और पेट्रोल का धुआं। कोई बात नहीं सब चलता है यह भी चलेगा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बड़े आदमी बनने के लिये सभी इंसान जूझ रहे हैं सदियां बीत गयी हैं पर कौन छोटा है या बड़ा सभी इस पहली स … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आसमान से जमीन पर आते हुए लिखा लाये हैं वह अपनी रंगीन तकदीर। न ख्याल उनका अपना न कोई सोच अपनी पर जमान … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उसने कहा कवि से ‘तू क्यों कविता लिखता है सारे जमाने का दर्द समेट कर अपने शब्दों में अपनी ही पीड़ाओं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अपनी कलम से कागज पर काली स्याही से जूता शब्द बार बार इस तरह न सजाओ कि आकाश से झुंड के झुंड बरसने लग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →