कल तुम गुजर रहे थे , या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था …. कल आहट थी कोई पहचानी , या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था …. कल चाँद था फलक पर , या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था …. मैने बहुत रोका मगर… more →
लम्हें जिन्दगी केkalapiketan wrote 6 days ago: जख्म दिल पर (गझल) घनश्याम ठक्कर … more →
कल्पना भारती wrote 2 weeks ago: पास मैं उन के जाने लगी हूँ नैनों में उनको छुपाने लगी हूँ मन में उन का नाम बसा कर सपने मिलन के सजा … more →
kalapiketan wrote 2 weeks ago: राधाकी व्यथा (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →
Maheep Saraf wrote 2 weeks ago: आज कुछ होश नहीं बस तेरी यादें हैं साथ में तेरी आँखें तेरी बातें तेरी खुश्बू मेरी हर बात में हर ख्व … more →
अफ़लातून wrote 3 weeks ago: [ मीनाक्षी पय्याडा के माता - पिता दोनों शुद्ध मलयाली हैं , यानी केरलवासी । उसकी माँ , केरल के कन्नूर … more →
kalapiketan wrote 4 weeks ago: बीमार तेरे नामके! (गीत) घन-’श्याम’ ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: हमारी प्राथमिक शालामें कई अभिप्रेरक कविताएं पढनेकी/गानेकी परंपरा थी. आयु के उस सूर्योदय कालमें कुछ ऐ … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 month ago: कल तुम गुजर रहे थे , या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था …. कल आहट थी कोई पहचानी , या कोई दरवाजे पर आ … more →
कल्पना भारती wrote 1 month ago: नेह का दीपक मैं बारती प्रियतम तोहे पुकारती आजा प्रिय… दिवाली की शाम है छाई पूजन पाठ मैं कर आई … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: शहनाई (सिंथेसाइझर) वादन संगीतकार और वादकः घनश्याम ठक्कर Happy Diwali Music Composer & Performe … more →
कल्पना भारती wrote 1 month ago: सुबह से लेकर शाम है लवों पे तेरा ही नाम है भरता है दिल तेरे लिए आंहें कोमल मन में सिर्फ तेरी यादें क … more →
अफ़लातून wrote 1 month ago: आपातकाल की औपचारिक घोषणा के पहले भी सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा पत्र-पत्रिकाओं पर नकेल कसना शुरु हो चुका … more →
अफ़लातून wrote 1 month ago: जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी … more →
Maheep Saraf wrote 1 month ago: मैं मंदिर जाता हूँ हर रोज़, अब कोई मुझे शराबी नहीं कहता कलयुग हे, चलता हे; यहाँ कोई देर तक पापी नहीं … more →
Maheep Saraf wrote 1 month ago: चाँद को देखता था हर रोज़ आसमान में, कभी ये मेरे भी करीब होगा आज मुट्ठी में हे चांदनी मगर, हथेली की त … more →
Maheep Saraf wrote 1 month ago: लोग मिलतें हैं महफिलों में, हज़ार चेहरों को बदल कर काम के वक़्त किसी भी अपने का चेहरा नहीं मिलता … more →
kalapiketan wrote 4 months ago: भारत प्रत्यागमन गझल घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 4 months ago: भारत प्रत्यागमन गझल घनश्याम ठक्कर … more →
Maheep Saraf wrote 4 months ago: जो सदाएँ सुनाई देती थी सागर की लहरों में वो गुम हो गई हे कहीं बमो की खबरों मे ढूंढ रहा हूँ वो बचपन, … more →