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Blogs about: Hindi Poet

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जुबान में ढूंढते हैं प्यार भरे शब्द-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कहां जाकर दिल बहलायें सभी जगह दर्द का दरिया बहता पायें ढूंढते हैं कुछ हंसते हुए चेहरे और खुश दिल पर … more →

Tags: अभिव्यक्ति, इंटरनेट, कविता, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, हिन्दी पत्रिका, bharat, Deepak bharatdeep

अयोध्या , १९९२ : कुँवरनारायण9 comments

अफ़लातून wrote 1 year ago: अयोध्या , १९९२ हे राम , जीवन एक कटु यथार्थ है और तुम एक महाकव्य !                     तुम्हारे बस की … more →

Tags: Poem, ramacharitmaanas, communalism, Hindi Poem, हिन्दी कविता, Kunwar Narayan, कुँवरनारायण, अयोध्या

कुंवर नारायण की तीन कविताएं (ज्ञानपीठ की घोषणा की खुशी में)8 comments

अफ़लातून wrote 1 year ago: जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी … more →

Tags: Poem, Globalisation, industralisation, Kunwar Narayan, Hindi Poem, कविता, कुंवर नारायण, ज्ञानपीठ, सामयिक वार्ता

जिंदा रहने के बहाने तलाशता आदमी-हिंदी शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक बच्चे के पैदा होने पर घर में खुशी का माहौल छा जाता है भागते हैं घर के सदस्य इधर-उधर जैसी कोई आसमा … more →

Tags: विचार, व्यंग्य, शायरी, शेर, शेर-ओ-शायरी, सन्देश, साहित्य, हास्य, हिन्दी पत्रिका

इस तरह वह शादी न हो सकी-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मंडप में पहुंचने से पहले ही दूल्हे ने दहेज़ में मोटर साइकल देने की माँग उठाई उसके पिता ने दुल्हन के … more →

Tags: abhivyakti, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लेखक, व्यंग्य, शायरी, शेर

धूल ने क्लर्क को सिखाया-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत दिन बाद ऑफिस में आये कर्मचारी ने पुराना कपडा उठाया और टेबल-कुर्सी और अलमारी पर धूल हटाने के लिए … more →

Tags: bharat, India, व्यंग्य, कविता, hasya, सन्देश, साहित्य, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

प्यार का पहला शब्द कहना सीख ले-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने मन में है बस व्यापार बाहर ढूंढते हैं प्यार मन में ख्वाहिश सोने, चांदी और धन के हों भण्डार पर दू … more →

Tags: Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, कविता, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, रचना

आँखें उनको देखने को तरस जाती हैं-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरी नाव डुबोने वाले बहुत हैं पर उनकी याद कभी नहीं आती मझधार में भंवर के बीच आकर जो किनारे तक पहुंचा … more →

Tags: आलेख, darshan, bharat, India, व्यंग्य, hasya, हास्य, सन्देश, विचार


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