कहां जाकर दिल बहलायें सभी जगह दर्द का दरिया बहता पायें ढूंढते हैं कुछ हंसते हुए चेहरे और खुश दिल पर कोई जानता ही नहीं कैसे जिंदगी को जिया जाता है सभी को अपने दर्द सहता पायें जुबानों में ढूंढते हैं अपन… more →
*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कहां जाकर दिल बहलायें सभी जगह दर्द का दरिया बहता पायें ढूंढते हैं कुछ हंसते हुए चेहरे और खुश दिल पर … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: अयोध्या , १९९२ हे राम , जीवन एक कटु यथार्थ है और तुम एक महाकव्य ! तुम्हारे बस की … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक बच्चे के पैदा होने पर घर में खुशी का माहौल छा जाता है भागते हैं घर के सदस्य इधर-उधर जैसी कोई आसमा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मंडप में पहुंचने से पहले ही दूल्हे ने दहेज़ में मोटर साइकल देने की माँग उठाई उसके पिता ने दुल्हन के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत दिन बाद ऑफिस में आये कर्मचारी ने पुराना कपडा उठाया और टेबल-कुर्सी और अलमारी पर धूल हटाने के लिए … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने मन में है बस व्यापार बाहर ढूंढते हैं प्यार मन में ख्वाहिश सोने, चांदी और धन के हों भण्डार पर दू … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरी नाव डुबोने वाले बहुत हैं पर उनकी याद कभी नहीं आती मझधार में भंवर के बीच आकर जो किनारे तक पहुंचा … more →