ए इन्द्रधनुष रंग कई तूने देखे पर क्यों तू स्याह रहा ? क्यों तेरे हर ओर सदा रंग रहे कई मगर अंधियारे से तू घिरा रहा ? देता है तू हरदम और चाह बहुत है पाने की पर तुझको क्यों कुछ नहीं मिला ? ओस की बूँदें क… more →
स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातेंSecret Swan wrote 5 days ago: आज फिर वो मुझे मिली, घना कोहरा मुझे उसे पहचानने से रोक रहा था, पर बादलों को चीरती चांदनी की किरणें, … more →
kalapiketan wrote 6 days ago: लाज ओढूं (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →
Secret Swan wrote 1 week ago: मैं अलग था, नरम, कोमल सा ह्रदय लेकर, इठलाता हुआ चलता था. मासूम सा चेहरा मुस्कराहट बिखेरता था. हर फ़ि … more →
kalapiketan wrote 2 weeks ago: याद आया गझल घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 2 weeks ago: चैतकी रजनी और् चंद्रमा अछांदस घनश्याम ठक्कर … more →
Girijesh Rao wrote 2 weeks ago: संशय निकष है ऋत का भी ।यह पंक्ति नरेश मेहता रचित ‘संशय की एक रात’ खंड काव्य में आई है। र … more →
Secret Swan wrote 3 weeks ago: न पास है कोई मेरे, न साथ है कोई मेरे, अकेले चल रहा हूँ, न किसी का कोई डर है। न रास्तों की ख़बर है, न … more →
kalapiketan wrote 3 weeks ago: “माँ कह एक कहानी।” मैथिलीशरण गुप्त ——————— … more →
kalapiketan wrote 3 weeks ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 3 weeks ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
Secret Swan wrote 1 month ago: काश मैं शिव होता काश मैं शिव होता तो शिवानी होती मेरी अर्धांगिनी. मेरी भी पूजा होती,मेरे नाम की माला … more →
Secret Swan wrote 1 month ago: देखते रहे वो मंजिलों के सपने, पर रास्ते सपनों में दिख न पाए. खाते रहे वो कुछ करने की कसमें, पर स्वार … more →
Secret Swan wrote 1 month ago: हैरान हूँ मैं, पर हताश नहीं हूँ. परेशान हूँ मैं पर निराश नहीं हूँ . फिर उगेगा सूरज, पर दिशा अलग ह … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: नही! गझल घनश्याम ठक्कर … more →
Girijesh Rao wrote 1 month ago: गोमती किनारे बादर कारे कारे बरस रहे भीग रहे तन और सड़क कन घहर गगन घन धो रहे धूल धन महक रही माटी. बही … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: बाढका खतरा करदो – गझल – घनश्याम ठक्कर Oasis Links ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત Blog – Gha … more →
Girijesh Rao wrote 2 months ago: प्रस्तुत कविता महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” की अति प्रसिद्ध रचना है. उऩ्हें अद्भुत … more →
kmuskan wrote 4 months ago: अपने जब दूर जाते है तो बहुत दर्द देते है पर अपने जब पास रह कर भी दूरिया बना लेते है … more →
kmuskan wrote 6 months ago: कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है किसी का उद … more →