मेरी पीठ पीछे, शाम तुम ढली जाती हो, मैं जानता हूँ कि तुम चली जाती हो, फ़िसलते-लुढ़कते इस सूरज के साथ, सामने से घिरी आ रही है रात । मगर रात भी तो मेहमान है बस रात भर की ही, चली जाएगी, जैसे जीवन में आते-ज… more →
स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातेंShubhashish Pandey wrote 22 hours ago: किसी ने अल्लाह कह के मारा किसी ने राम कह के मारा जो बच गए इससे उन्हें सद्दाम कह के मारा जो आये थे घर … more →
Ashok wrote 2 days ago: सुबह का समय है, ठंडी बयार चल रही है। पंछी चहचहा रहे है, रसीले गीत गा रहे है। सूरज निकल रहा है, किरणे … more →
Ashok wrote 2 days ago: पहली ही नज़र में प्यार हो जाने की बात तो अक्सर आप ने सुनी ही होगी क्योंकि यह एक मानी हुई सहज और स्वभा … more →
Ashok wrote 2 days ago: बीती बातों को भूल के जीना कितना मुश्किल लगता है, भंवर के बीच रखना सफीना कितना मुश्किल लगता है॥ नादाँ … more →
Ashok wrote 2 days ago: सुन बेवफा यादों को मेरी तुम चाह कर भी भुला ना पाओगी । रोंती रहोगी ख्यालों में मेरे, मगर तुम हम को रु … more →
Ashok wrote 2 days ago: ” इस कहानी को देरी से पूरी करने के लिए मैं अपने प्रिय पाठको से क्षमाप्रार्थी हूँ। इसे लिखने के … more →
Ashok wrote 2 days ago: बेदर्दी बालमा तुझ को…मेरा मन याद करता है बरसता है जो आँखों से वो सावन याद करता है बेदर्दी बालम … more →
Ashok wrote 2 days ago: यह तमन्ना रहती थी मेरी, कि करते तुम से दो बातें, जो सकून दे दिल को मेरे, करते तमाम हम वोह बातें कुछ … more →
kalapiketan wrote 3 days ago: मेरी नयी वेब-दुनियामें आपका स्वागत है. घनश्याम ठक्कर … more →
गिरिजेश राव wrote 1 week ago: देखो बोगन बेल फूली लखनबूटी शरमाई शीत ऋतु आई। रसिक ओस लिपटी मंजरी हरसाई तुलसी के बिरवा सँवर ऋतु आई। प … more →
Ashok wrote 3 weeks ago: भूल नहीं पाता हूँ पतझड़ मास को मैं जब तुम से जुदा होता हूँ ज्यों पत्ते शाख से टूटे मैं टूटता हूँ तुम … more →
Ashok wrote 3 weeks ago: कल जब मयकदे में जाम उठाया तो उछल गया तेरा नाम सुना तो आँख से एक अंशू निकल गया सुना मैंने, कहता था को … more →
Ashok wrote 3 weeks ago: हाँ तुम्हारे अन्दर शायद हमेशा एक एहसास तो रहा होगा जिसे मैं पागल उस वक़त जान नही पाया, समझ नहीं पाया … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: जख्म दिल पर (गझल) घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: राधाकी व्यथा (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: बीमार तेरे नामके! (गीत) घन-’श्याम’ ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: हमारी प्राथमिक शालामें कई अभिप्रेरक कविताएं पढनेकी/गानेकी परंपरा थी. आयु के उस सूर्योदय कालमें कुछ ऐ … more →
kalapiketan wrote 2 months ago: शहनाई (सिंथेसाइझर) वादन संगीतकार और वादकः घनश्याम ठक्कर Happy Diwali Music Composer & Performe … more →
kalapiketan wrote 2 months ago: घूमता है (गझल) घनश्याम ठक्कर … more →