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Blogs about: Hindi Poetry

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किसी ने अल्लाह कह के मारा किसी ने राम कह के मारा 4 comments

Shubhashish Pandey wrote 22 hours ago: किसी ने अल्लाह कह के मारा किसी ने राम कह के मारा जो बच गए इससे उन्हें सद्दाम कह के मारा जो आये थे घर … more →

Tags: Shayari - Muqtak, कविता, मुक्तक, शायरी, शुभाशीष, शेर, Hindi Poem, hindi sahitya, Sher

सुबह हो रही है.....

Ashok wrote 2 days ago: सुबह का समय है, ठंडी बयार चल रही है। पंछी चहचहा रहे है, रसीले गीत गा रहे है। सूरज निकल रहा है, किरणे … more →

आँखें क्या कहती है?

Ashok wrote 2 days ago: पहली ही नज़र में प्यार हो जाने की बात तो अक्सर आप ने सुनी ही होगी क्योंकि यह एक मानी हुई सहज और स्वभा … more →

कितना मुश्किल लगता है...

Ashok wrote 2 days ago: बीती बातों को भूल के जीना कितना मुश्किल लगता है, भंवर के बीच रखना सफीना कितना मुश्किल लगता है॥ नादाँ … more →

सुन बेवफा....

Ashok wrote 2 days ago: सुन बेवफा यादों को मेरी तुम चाह कर भी भुला ना पाओगी । रोंती रहोगी ख्यालों में मेरे, मगर तुम हम को रु … more →

चाय वाली दीदी - अन्तिम भाग1 comment

Ashok wrote 2 days ago: ” इस कहानी को देरी से पूरी करने के लिए मैं अपने प्रिय पाठको से क्षमाप्रार्थी हूँ। इसे लिखने के … more →

बेदर्दी बालमा तुझ को..

Ashok wrote 2 days ago: बेदर्दी बालमा तुझ को…मेरा मन याद करता है बरसता है जो आँखों से वो सावन याद करता है बेदर्दी बालम … more →

बातें.....

Ashok wrote 2 days ago: यह तमन्ना रहती थी मेरी, कि करते तुम से दो बातें, जो सकून दे दिल को मेरे, करते तमाम हम वोह बातें कुछ … more →

मेरी नयी वेब-दुनियामें आपका स्वागत है. - घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 3 days ago: मेरी नयी वेब-दुनियामें आपका स्वागत है. घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: कविता, गझल - घनश्याम ठक्कर, गीत, गीत -घनश्याम ठक्कर, घनश्याम ठक्कर, फोटोः, संगीत़़, साहित्य, हिंदी साहित्य

चिपट बैठो रिक्शे

गिरिजेश राव wrote 1 week ago: देखो बोगन बेल फूली लखनबूटी शरमाई शीत ऋतु आई। रसिक ओस लिपटी मंजरी हरसाई तुलसी के बिरवा सँवर ऋतु आई। प … more →

Tags: कविता, ठिठुराई, धुन्ध, पछुवा, रिक्शा, लेबल: ऋतु, शीत

पतझड़

Ashok wrote 3 weeks ago: भूल नहीं पाता हूँ पतझड़ मास को मैं जब तुम से जुदा होता हूँ ज्यों पत्ते शाख से टूटे मैं टूटता हूँ तुम … more →

मयकदे में...1 comment

Ashok wrote 3 weeks ago: कल जब मयकदे में जाम उठाया तो उछल गया तेरा नाम सुना तो आँख से एक अंशू निकल गया सुना मैंने, कहता था को … more →

पानी के बुदबुदे सा...एक एहसास ...

Ashok wrote 3 weeks ago: हाँ तुम्हारे अन्दर शायद हमेशा एक एहसास तो रहा होगा जिसे मैं पागल उस वक़त जान नही पाया, समझ नहीं पाया … more →

जख्म दिल पर (गझल) - घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 1 month ago: जख्म दिल पर  (गझल)  घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: कविता, गझल, गझल - घनश्याम ठक्कर, घनश्याम ठक्कर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट

राधाकी व्यथा (गीत) - घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 1 month ago: राधाकी व्यथा (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: कविता, गीत, गीत -घनश्याम ठक्कर, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गीत

बीमार तेरे नामके! (गीत) - घनश्याम ठक्कर 2 comments

kalapiketan wrote 1 month ago: बीमार तेरे नामके! (गीत) घन-’श्याम’ ठक्कर … more →

Tags: कविता, गीत, गीत -घनश्याम ठक्कर, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गीत

चल तू अकेला - रवींद्रनाथ टैगोर (हिन्दी भाषांतर : घनश्याम ठक्कर) 2 comments

kalapiketan wrote 1 month ago: हमारी प्राथमिक शालामें कई अभिप्रेरक कविताएं पढनेकी/गानेकी परंपरा थी. आयु के उस सूर्योदय कालमें कुछ ऐ … more →

Tags: कविता, गीत, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, रवींद्रनाथ टैगोर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गीत

दीपावलीके त्योहारोंकी शुभकामनाएं - घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 2 months ago: शहनाई (सिंथेसाइझर) वादन   संगीतकार और वादकः घनश्याम ठक्कर Happy Diwali Music Composer & Performe … more →

Tags: कविता, गझल, गझल - घनश्याम ठक्कर, गरबा, गीत, गीत -घनश्याम ठक्कर, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, डांडियारास

घूमता है (गझल) - घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 2 months ago:   घूमता है (गझल) घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: गझल, गझल - घनश्याम ठक्कर, घनश्याम ठक्कर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग


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