Blogs about: Hindi Sahity

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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-दुष्ट अमीर शासन को परेशान करता है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्र … more →

Tags: aritile in hindi, दीपक भारतदीप, समाज, हिंदी आलेख, हिन्दी, Blogger, Deepak bharatdeep, hindi article, Hindi writing

सहमा शब्द -हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: जब बमों की आवाज से शहर काँप जाते हैं बाज़ार में सड़कों पर फैले खून के दृश्य आखों के सामने आते हैं तब … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, कला, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

लोगों के मन का सहारा है परनिंदा करना-व्यंग्य आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

चमन की बागडोर है जिसके हाथ वही दुश्मन हो जाता-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: लुट जाने का खतरा अब गैरो से नहीं सताता अपनों को ही यह काम अच्छी तरह अब करना आता पहरेदारी अपने घर की … more →

Tags: हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Blogging, Blogroll, Deepak bharatdeep, E-patrika, Family, Friends

भिखारी से साक्षात्कार-लघुकथा5 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल ति … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging

आखिर उसने इस ब्लाग के पूर्व पाठ की कापी क्यों नहीं की-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आ … more →

Tags: Blogroll, vews, hindiblogroll, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Life, media

ख्यालों का बंधन-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: ख्यालों के बंधन में फंसकर उनके इशारों पर नाचते रहे जिंदगी मेंं इसलिये हर कदम पर हारते रहे जो आजाद हो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका

भेदात्मक दृष्टि वाले विद्वानों की बहुतायत-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: भारत में कदम कदम पर विद्वान मिल जायेंगे। अगर देखा जाये तो हर तीसरे आदमी को अपना ज्ञान बघारने की आदत … more →

Tags: Blogroll, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Internet, Education, Blogging, Friends

गीत संगीत की महफिल की बजाय महायुद्ध सजाते-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गीत और संगीत से दिल मिल जाते हैं पर अब तो उसकी परख के लिये प्रतियोगितायें को अब वह महायुद्ध कहकर जमक … more →

Tags: आलेख, ज्ञान, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

चिंतन शिविर-हास्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने संगठन का चिंतन शिविर उन्होंने किसी मैदान की बजाय अब एक होटल में लगाया जहां सभी ने मिलकर अपना स … more →

Tags: कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

ख्याल तो हैं जलचर की तरह-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन का समंदर है गहरा जहां ख्याल तैरते हैं जलचर की तरह कुछ मछलियां सुंदर लगती हैं कुछ लगते हैं खौफनाक … more →

Tags: अनुभूति, कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

कबीर साहित्य के पाठ की पाठक संख्या एक हजार के पार1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे इस ब्लाग/पत्रिका पर संत शिरोमणि कबीरदास के दोहों वाला एक पाठ आज एक हजार की पाठक संख्या पार गया। … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, कविता, मस्तराम, संस्कार, समाज, साहित्य

बिना पूछे रास्ता बताने लगे-कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लिखे उन्होंने चंद शब्द और दूसरों को लिखना सिखाने लगे मुश्किल है कि बिना समझे लिखा था पर दूसरों में … more →

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अपनी गलतियों से सिखाता हुआ बीस हजार की पाठक संख्या पार कर गया यह ब्लोग2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे यह ब्लाग/पत्रिका भी आज बीस हजार की पाठक संख्या को पार कर गया। ऐसा करने वाला यह तीसरा ब्लाग/पत्र … more →

Tags: Blogroll, vews, hindiblogroll, हिंदी, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Life

भ्रम का सिंहासन-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक सपना लेकर सभी लोग आते हैं सामने दूर कहीं दिखाते हैं सोने-चांदी से बना सिंहासन कहते हैं ‘तुम उस पर … more →

Tags: कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

इसलिए आज हमने कोई व्यंग्य नहीं लिखा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिक … more →

Tags: Blogroll, vews, hindi, हिन्दी, Global Dashboard, अभिव्यक्ति, सूचना, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य

अपनी मूल भाषा में लिखने से पाठ में आती है स्वाभाविक मौलिकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे विचार से अब हमें यह तय करना चाहिए कि हम अपनी भाषा के साथ अपना मौलिक जीवन जीना चाहते है या अंग्र … more →

Tags: vews, हिन्दी, संपादकीय, अभिव्यक्ति, सूचना, व्यंग्य, media, Education, Blogging

अंतर्जाल पर पाठ के शीर्षक की अधिक महत्वपर्ण भूमिका है-आलेख3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैंने एक बार एक ब्लाग देखा था जिसके लेखक ंने चार ब्लाग लेखकों के नाम शीर्षक में लिखकर अपना पाठ पूर … more →

Tags: Blogroll, vews, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, Internet, arebic, Education, Family

कभी किसी का कड़वा सच उसके सामने नहीं कहना चाहिए-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सच बहुत कड़वा होता है और अगर आप किसी के बारे में कोई विचार अपने मस्तिष्क में  हैं और आपको लगता है क … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, संस्कार, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य


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