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Blogs about: Hindi Sahity

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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-दुष्ट अमीर शासन को परेशान करता है

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्रण … more →

Tags: writer, aritile in hindi, हिंदी आलेख, hindi article, Hindi writing, समाज, India, Blogger, Deepak bharatdeep

सहमा शब्द -हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब बमों की आवाज से शहर काँप जाते हैं बाज़ार में सड़कों पर फैले खून के दृश्य आखों के सामने आते हैं तब … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, कला, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

लोगों के मन का सहारा है परनिंदा करना-व्यंग्य आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

चमन की बागडोर है जिसके हाथ वही दुश्मन हो जाता-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लुट जाने का खतरा अब गैरो से नहीं सताता अपनों को ही यह काम अच्छी तरह अब करना आता पहरेदारी अपने घर की … more →

Tags: हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Blogging, Blogroll, Deepak bharatdeep, E-patrika, Family, Friends

भिखारी से साक्षात्कार-लघुकथा5 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल तिल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging

आखिर उसने इस ब्लाग के पूर्व पाठ की कापी क्यों नहीं की-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आ … more →

Tags: Blogroll, vews, hindiblogroll, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Life, media

ख्यालों का बंधन-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ख्यालों के बंधन में फंसकर उनके इशारों पर नाचते रहे जिंदगी मेंं इसलिये हर कदम पर हारते रहे जो आजाद हो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, जजबात, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका

भेदात्मक दृष्टि वाले विद्वानों की बहुतायत-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भारत में कदम कदम पर विद्वान मिल जायेंगे। अगर देखा जाये तो हर तीसरे आदमी को अपना ज्ञान बघारने की आदत … more →

Tags: Blogroll, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Internet, Education, Blogging, Friends

गीत संगीत की महफिल की बजाय महायुद्ध सजाते-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गीत और संगीत से दिल मिल जाते हैं पर अब तो उसकी परख के लिये प्रतियोगितायें को अब वह महायुद्ध कहकर जमक … more →

Tags: आलेख, ज्ञान, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

चिंतन शिविर-हास्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने संगठन का चिंतन शिविर उन्होंने किसी मैदान की बजाय अब एक होटल में लगाया जहां सभी ने मिलकर अपना सम … more →

Tags: कला, कविता, जजबात, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

ख्याल तो हैं जलचर की तरह-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन का समंदर है गहरा जहां ख्याल तैरते हैं जलचर की तरह कुछ मछलियां सुंदर लगती हैं कुछ लगते हैं खौफनाक … more →

Tags: Blogroll, hindi drama, Hindi hasya, Hindi friends, hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia

कबीर साहित्य के पाठ की पाठक संख्या एक हजार के पार1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे इस ब्लाग/पत्रिका पर संत शिरोमणि कबीरदास के दोहों वाला एक पाठ आज एक हजार की पाठक संख्या पार गया। … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, कविता, मस्तराम, संस्कार, समाज, साहित्य

बिना पूछे रास्ता बताने लगे-कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लिखे उन्होंने चंद शब्द और दूसरों को लिखना सिखाने लगे मुश्किल है कि बिना समझे लिखा था पर दूसरों में स … more →

Tags: Blogroll, hindi kavita, Hindi friends, hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia

अपनी गलतियों से सिखाता हुआ बीस हजार की पाठक संख्या पार कर गया यह ब्लोग2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे यह ब्लाग/पत्रिका भी आज बीस हजार की पाठक संख्या को पार कर गया। ऐसा करने वाला यह तीसरा ब्लाग/पत्र … more →

Tags: Blogroll, vews, hindiblogroll, हिंदी, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Life

भ्रम का सिंहासन-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक सपना लेकर सभी लोग आते हैं सामने दूर कहीं दिखाते हैं सोने-चांदी से बना सिंहासन कहते हैं ‘तुम उस पर … more →

Tags: कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी

इसलिए आज हमने कोई व्यंग्य नहीं लिखा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिको … more →

Tags: Blogroll, vews, hindi, हिन्दी, Global Dashboard, अभिव्यक्ति, सूचना, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य

अपनी मूल भाषा में लिखने से पाठ में आती है स्वाभाविक मौलिकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे विचार से अब हमें यह तय करना चाहिए कि हम अपनी भाषा के साथ अपना मौलिक जीवन जीना चाहते है या अंग्र … more →

Tags: vews, हिन्दी, संपादकीय, अभिव्यक्ति, सूचना, व्यंग्य, media, Education, Blogging

अंतर्जाल पर पाठ के शीर्षक की अधिक महत्वपर्ण भूमिका है-आलेख3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैंने एक बार एक ब्लाग देखा था जिसके लेखक ंने चार ब्लाग लेखकों के नाम शीर्षक में लिखकर अपना पाठ पूरा … more →

Tags: alekh, arebic, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, मातृभाषा, संपादकीय, समाज

कभी किसी का कड़वा सच उसके सामने नहीं कहना चाहिए-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सच बहुत कड़वा होता है और अगर आप किसी के बारे में कोई विचार अपने मस्तिष्क में  हैं और आपको लगता है कि … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, संस्कार, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य


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