के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्रणनि। आमुक्तास्ते च वतैरन् वह्मविव महीपती।। हिंदी में भावार्थ-दुष्ट व्रणों की तरह पके हुए धन से संपन्… more →
*** दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता-पत्रिका*** mastram Deepak Bharatdeep ki hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: जब बमों की आवाज से शहर काँप जाते हैं बाज़ार में सड़कों पर फैले खून के दृश्य आखों के सामने आते हैं तब … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हमारे देश के लोगों का सबसे बड़ा दोष है-परनिंदा करना। बहुत कम लोग हैं जो इसके कीटाणुओं से मुक्त रह पा … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: लुट जाने का खतरा अब गैरो से नहीं सताता अपनों को ही यह काम अच्छी तरह अब करना आता पहरेदारी अपने घर की … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल ति … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: ख्यालों के बंधन में फंसकर उनके इशारों पर नाचते रहे जिंदगी मेंं इसलिये हर कदम पर हारते रहे जो आजाद हो … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: भारत में कदम कदम पर विद्वान मिल जायेंगे। अगर देखा जाये तो हर तीसरे आदमी को अपना ज्ञान बघारने की आदत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गीत और संगीत से दिल मिल जाते हैं पर अब तो उसकी परख के लिये प्रतियोगितायें को अब वह महायुद्ध कहकर जमक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने संगठन का चिंतन शिविर उन्होंने किसी मैदान की बजाय अब एक होटल में लगाया जहां सभी ने मिलकर अपना स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन का समंदर है गहरा जहां ख्याल तैरते हैं जलचर की तरह कुछ मछलियां सुंदर लगती हैं कुछ लगते हैं खौफनाक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे इस ब्लाग/पत्रिका पर संत शिरोमणि कबीरदास के दोहों वाला एक पाठ आज एक हजार की पाठक संख्या पार गया। … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लिखे उन्होंने चंद शब्द और दूसरों को लिखना सिखाने लगे मुश्किल है कि बिना समझे लिखा था पर दूसरों में … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे यह ब्लाग/पत्रिका भी आज बीस हजार की पाठक संख्या को पार कर गया। ऐसा करने वाला यह तीसरा ब्लाग/पत्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक सपना लेकर सभी लोग आते हैं सामने दूर कहीं दिखाते हैं सोने-चांदी से बना सिंहासन कहते हैं ‘तुम उस पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे विचार से अब हमें यह तय करना चाहिए कि हम अपनी भाषा के साथ अपना मौलिक जीवन जीना चाहते है या अंग्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैंने एक बार एक ब्लाग देखा था जिसके लेखक ंने चार ब्लाग लेखकों के नाम शीर्षक में लिखकर अपना पाठ पूर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सच बहुत कड़वा होता है और अगर आप किसी के बारे में कोई विचार अपने मस्तिष्क में हैं और आपको लगता है क … more →