खेल ये है अपनी पसंद का, खेलतें ही जाएंगे। चाहें धोका लाख खाए, प्यार लुटाते जाएंगे। भुल अपनी भुलने को, है अक्सीर ये इलाज, चिज कितनी भी बुरी हो, युँही पीते जाएंगे। गम का दुसरा नाम ही, ये जिंदगी है प्यार… more →
हिंदी गझलदीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इस … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: समाज सेवाध्यक्ष जी ने अपनी बाहें टेबल पर टिकाई अपना मूंह हथेलियों पर रखने को बाद अपने सात सभासदों की … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब बहता था दरिया में पानी तब भला कौन वादा करता था उसे लाने का। कहीं बांध बनाये कहीं रास्ता बदला पानी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्। न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।। हिंदी में भावार् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सुबह दीपक बापू सड़कों पर पानी से भरे गड्ढों में गिरने से बचते हुए जल्दी जल्दी ही आलोचक महाराज के घर प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धरती पर अपने कदम दर कदम चलते हुए जब नजर करता हूं नीचे की तरफ तब जहां तक देखता हूं वहीं तक ख्याल चलते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————— यानाश्य्यासनान्यस्य, कूपोद्यान ग्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मिथ्यापेतानि कर्माण सिध्येवुर्यानि भारत। अनुपायवुक्तानि मा स्म तेष मनः कृथाः।। हिंदी में भावार्थ-मिथ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: ग्रहीत्वां दक्षिणां विप्रास्त्यजन्ति यजमानकम्। प्राप्तविद्यां गुरुं शिष्या दग्धाऽरण्यं मृगास्तथा। हि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मीडिया यानि टीवी चैनल और समाचार पत्र-जिनकों हम संगठित प्रचारतंत्र भी कह सकते हैं-बिना सनसनी के नहीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: यमो वैवस्वतो देवो यस्तवैध हृदिस्थितः। तेन चेदविवादस्ते मां गंगा मा कृरून गमः।। हिंदी में भावार्थ-सभी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वस्तुध्वशक्येषु समुद्यनश्चेच्छक्येषु मोहादसमुद्यश्मश्च। शक्येषु कालेन समुद्यनश्व त्रिघैव कार्यव्यसनं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: करें भी तो क्या? अखबार पढ़े और टीवी चैनल देखे बिना चैन ही नहीं पड़ता। अखबार पढ़ने में भी अब प्रथम पृष्ठ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आशिक ने माशुका को समझाया ‘‘मोबाईल पर इतनी बात मत करो मैं नहीं उठा सकता खर्चा हर हफ्ते कपड़े भी न मांग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: दिल में कुछ दिमाग में कुछ जुबां से दूसरे बोल ही निकल आते हैं। दिल का दिमाग से दिमाग का जुबां से रिश् … more →