यस्य स्नेहो भयं तस्य स्नेहो दुःखस्य भाजनम्। स्नेहमूलानि दुःखानि तानि त्यक्तवा वसेत्सुखम्।। हिंदी में भावार्थ-जहां स्नेह हैं वही दुःख है। स्नेह ही दुःख की उत्पत्ति का कारण है। स्नेह ही दुःख का मूल है। … more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 4 months ago: रहिमन धोखे भाव से, मुख से निकले राम पावत पूरन परम गति, कामादिक कौ धाम कविवर रहीम कहते हैं कि अगर धो … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: विरहेऽपि संगमः खलु परस्परं संगतं मनो येषाम् हृदयमपि विघट्टितं चेत्संगी विरहं विशेषयति हिंदी में भाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: भारतीय योग एक प्राचीनतम विद्या मानी जाती है जिसके जनक महर्षि पतंजलि हैं। यह एक बृहद विषय है और भगवान … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पिर्तभिभ्रौतृभिश्चैता पतिभिदैवरैस्तथा पूज्या भूषयितव्याश्च बहुकल्याणमीप्सुभिः विवाह के समय अपने कल् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यस्यं त्रैवाषिक्र भक्तं पर्याप्तं भृत्यवृत्तये अधिकं वापि विद्येत सः सोम पातुमर्हति जिस व्यक्ति के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १. अधर्म से प्राप्त हुए धन के द्वारा जो दोष छिपाया जाता है वह तो छिपता नहीं, उससे भिन्न और नया दोष प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय होता है जो क्रुद्ध होने पर सारे भेद देता है। ऐसा व्यक्ति कदापि म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.संसार में किसी को भी मनचाहा सुख प्राप्त नहीं होता। सामान्यत: सुख-दुख के प्राप्ति मनुष्य के हाथ मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १. विद्या का मद, धन का मद और तीसरा ऊंची कुल का मद है. यह घमंडी पुरुषों के लिए मद हैं परन्तु सज्जन पु … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: निकले सुबह अपने घर से धोती-कुर्ता और टोपी पहने रास्ते में जो भी मिलता यह कहता ”दीपक बापू क्या … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: क्रिकेट में क्या ऐसा भी होता है पहले चल रहे झगडे और गुस्से के भाव थे मिक्स पर अब हो रहा है ठंडा क … more →