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Blogs about: Hindi Sansakar

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रामचरित मानस की चर्चा-चिंतन आलेख (ramcharit manas-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: रामचरित मानस लिखने के 387 वर्ष बाद एक संत ने यह शोध प्रस्तुत किया है कि उसमें व्याकरण और भाषा की तीन … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi bhasakar

दिवाली का शुभ दिन बीत गया-आलेख (hindi article on diwali festival

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, साहित्य, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

हंसी के खजाने की तलाश-हिंदी शायरी (hansi ka khazana-hindi shayri)4 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: अपने पर ही यूं हंस लेता हूं। कोई मेरी इस हंसी से अपना दर्द मिटा ले कुछ लम्हें इसलिये उधार देता हूं। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

मिलावट और नकल का आतंक-हास्य व्यंग्य(nakal aur milavat par hindi vyangya)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: आतंक कोई बाहर विचरने वाला पशु नहीं बल्कि मानव के मन में रहने वाला भाव है जो उसके सामने तब उपस्थित हो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

चाणक्य नीति-बुरे संस्कार वालों के साथ बैठकर खाना भी न खाएं

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ——————- अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्र … more →

Tags: अर्थशास्त्र, आलेख, संस्कार, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

चाणक्य नीतिः अपने घर के अन्दर की बात बाहर न कहें

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चाणक्य नीति, मस्तराम, संस्कार, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

बहु ने लिखी कविताएँ-व्यंग्य शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: नयी बहू कवियित्री है जब सास को पता लगी तो उसकी परीक्षा लेने की बात दिमाग में आयी उसने उससे अपने ऊपर … more →

Tags: कला, कविता, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, साहित्य, हास्य, हास्य कविता

कंपनी कभी देवता तो कभी दानव -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती ह … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, मस्तराम, Blogging, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

पाठक रूपी सारथि ही बनाता है लेखक महारथी-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सभी पाठक लेखक हों यह आवश्यक नहीं है पर सभी लेखकों को पाठक अवश्य होना चाहिए। एक लेखक को कभी किसी अन्य … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका

तंबाकू, एकता और योगसाधना-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:   पिछले वर्ष जुलाई में वृंदावन से हम दोनों पति-पत्नी अपने शहर  के लिये चले। हमने मथुरा के मार्ग पर प … more →

Tags: अनुभूति, मस्तराम, व्यंग्य, संस्कार, समाज, साहित्य, हास्य, हास्य व्यंग्य, Blogroll

महिला बुद्धिजीवी सम्मेलन-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सम्मेलनों के आयोजने करने के आदी लोगों की संस्था के पदाधिकारियों के  दिमाग  में ‘बुद्धिजीवी महिला सम् … more →

Tags: अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, आलेख, कला, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य, हिन्दी

गरीबों का खाना सहता कौन है? हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अमेरिका के राष्ट्रपति जार्जबुश ने कहा है कि विश्व में खाद्यान्न संकट के लिये भारत के लोग ही जिम्मेदा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आलेख, ईरान, मस्तराम, विकिपीडिया, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging

संत कबीर वाणीःभक्ति के लिये हृदय में शुद्ध भावना जरूरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पाहन पानी पूजि से, पचि मुआ संसार भेद अलहदा रहि गयो, भेदवंत सो पार   संत शिरोमणि कबीदासजी कहते हैं कि … more →

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चाणक्य नीतिःधन कमाने वाले धर्म की स्थापना नहीं कर सकते

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अर्थाधीतांश्च  यैवे ये शुद्रान्नभोजिनः मं द्विज किं करिध्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः जिस प्रकार विषहीन … more →

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मानसिक गुलामी किसी को दिखाई नहीं देती-आलेख 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मनोरंजन के नाम पर जिस तरह के कार्यक्रम विभिन्न टीवी कार्यक्रमों में अंधविश्वासों और रूढियों को प्रति … more →

Tags: Blogroll, Hindi friends, hindi journlism, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep

जो बडे हैं वह कभी संयम नहीं गंवाते-हास्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ”क्या दीपक बापू हम तो समझते थे कोई भारी भरकम लेखक को पर हम अब समझे हमें भर … more →

Tags: Blogroll, Hindi Poem, Hindi hasya, Hindi friends, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine

एक ढूंढो हजार मूर्ख मिलते हैं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल बिहार में एक स्थान पर एक महिला को जादूटोना करने के आरोप जिस बहशी ढंग से अपमानित किया गया हैं वह द … more →

Tags: Blogroll, Hindi friends, hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep

संत कबीर वाणी:मुहँ में डाले तेल से आंखों देखा घी भला 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आंखों देखा घी भला, ना सुख मेला तेल साधू सों झगडा भला, ना साकट सों मेल आंखों से देखा घी का दर्शन भी अ … more →

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संत कबीर वाणी:जैसा भोजन और पानी वैसा मन और वाणी 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक कहैं कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक संत कबीर जी का कहना है की गाली आते … more →

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