गर्मी पर लिखने बैठे कविता बिजली गुल हो गयी। बाहर चलती आंधी ने मचाया शोर गरज कर बरसा पानी बरसात के इंतजार में रचे थे शब्द बहते पसीने का दिखाया था दर्द मानसून की पहली बरसात सब धो गयी। गर्मी पर लिखी कवि… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ——————- अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: नयी बहू कवियित्री है जब सास को पता लगी तो उसकी परीक्षा लेने की बात दिमाग में आयी उसने उससे अपने ऊपर … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सभी पाठक लेखक हों यह आवश्यक नहीं है पर सभी लेखकों को पाठक अवश्य होना चाहिए। एक लेखक को कभी किसी अन्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पिछले वर्ष जुलाई में वृंदावन से हम दोनों पति-पत्नी अपने शहर के लिये चले। हमने मथुरा के मार्ग पर प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सम्मेलनों के आयोजने करने के आदी लोगों की संस्था के पदाधिकारियों के दिमाग में ‘बुद्धिजीवी महिला सम् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अमेरिका के राष्ट्रपति जार्जबुश ने कहा है कि विश्व में खाद्यान्न संकट के लिये भारत के लोग ही जिम्मेदा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पाहन पानी पूजि से, पचि मुआ संसार भेद अलहदा रहि गयो, भेदवंत सो पार संत शिरोमणि कबीदासजी कहते हैं कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अर्थाधीतांश्च यैवे ये शुद्रान्नभोजिनः मं द्विज किं करिध्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः जिस प्रकार विषहीन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मनोरंजन के नाम पर जिस तरह के कार्यक्रम विभिन्न टीवी कार्यक्रमों में अंधविश्वासों और रूढियों को … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ”क्या दीपक बापू हम तो समझते थे कोई भारी भरकम लेखक को पर हम अब समझे हमें भर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल बिहार में एक स्थान पर एक महिला को जादूटोना करने के आरोप जिस बहशी ढंग से अपमानित किया गया हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आंखों देखा घी भला, ना सुख मेला तेल साधू सों झगडा भला, ना साकट सों मेल आंखों से देखा घी का दर्शन भी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक कहैं कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक संत कबीर जी का कहना है की गाली आते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन नीचन संग बसि, लगत कलंक न काहि दूध कलारी कर गाहे, मद समुझै सब ताहि कविवर रहीम का कथन है कि नीच … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब दो फिल्म अभिनेताओं में झगडा शुरू हो गया है कि वह नंबर वन हैं। आज जब मैंने यह खबर एक टीवी चैनल पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हस्ती चढ़िए ज्ञान की, सहज दुलीचा डार श्वान रूप संसार है, भूंकन दे झकमार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जैसी जाकी बुद्धि है, तैसे कहैं बनाय ताकौं बुरो न मानी, लें कहाँ सो जाय कविवर रहीम जी कहते हैं कि ज … more →