श्रृंगार रस का कवि पहुंचा हास्य कवि के पास लगाये अच्छी सलाह की आस और बोला ‘यार, अब यह कैसा जमाना आया समलैंगिकता ने अपना जाल बिछाया। अभी तक तो लिखी जाती थी स्त्री पुरुष पर प्रेम से परिपूर्ण कवितायें अब… more →
*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: श्रृंगार रस का कवि पहुंचा हास्य कवि के पास लगाये अच्छी सलाह की आस और बोला ‘यार, अब यह कैसा जमाना आया … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: कभी कभी यह मन होता है कि किसी ब्लाग लेखक के लिखे पाठ के विषय पर कुछ हम भी लिखें। इसका कारण यह है कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: कहां जाकर दिल बहलायें सभी जगह दर्द का दरिया बहता पायें ढूंढते हैं कुछ हंसते हुए चेहरे और खुश दिल पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अपने कुछ ब्लाग/पत्रिका का नामकरण हमने मस्तराम के नाम पर आज कर ही दिया। आज होली का पर्व है और एक लेखक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक बच्चे के पैदा होने पर घर में खुशी का माहौल छा जाता है भागते हैं घर के सदस्य इधर-उधर जैसी कोई आसमा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जहां तक मेरी जानकारी है खबर में यही था कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद उम्मीदवार ओबामा अपनी जेब में रखन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मंडप में पहुंचने से पहले ही दूल्हे ने दहेज़ में मोटर साइकल देने की माँग उठाई उसके पिता ने दुल्हन के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत दिन बाद ऑफिस में आये कर्मचारी ने पुराना कपडा उठाया और टेबल-कुर्सी और अलमारी पर धूल हटाने के लिए … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कठपुतली का खेल दिखाने वाला एक व्यक्ति अपना काम बंद कर स्टेडियम के बाहर मूंगफली का ठेला लगाकर बैठ गया … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरी नाव डुबोने वाले बहुत हैं पर उनकी याद कभी नहीं आती मझधार में भंवर के बीच आकर जो किनारे तक पहुंचा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब तो मुद्दे जमीन पर नहीं बनते हवा में लहराये जाते राई से विषय पहाड़ बताये जाते मसले अंदर कमरे में क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। अपनी असफलता और दूसरे की सफलता से मनुष्य ईर्ष्यालु हो जाता। ईर्ष्या … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: U.S. president has said that food crisis in the world for the people of India are responsible for it … more →