दौलत की भूख कभी नहीं मिटती सोना चाहे जितना भर जाये तिजोरी में दिल में पाने की लालच फिर भी बढ़ जायेगी। तड़प शौहरत की हमेशा सताती चाहे आसमान में नाम दिखता हो मगर जन्नत में फरिश्ता दिखने की चाहत बढ़ती ही जा… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकाwrote 10 months ago: अमेरिका की एक फिल्म की चर्चा पढ़ने का मिली जिसमें एक पात्र से कहलाया गया है … more →
wrote 1 year ago: हैरानी है यह देखकर कुछ लोगों को कभी हादसे तो कभी हमले भी फिक्स क्यूँ लगते हैं। कहें दीपक बापू … more →
wrote 1 year ago: रिश्ते जो दूर हो गये यादों में धुंधले हो जाते हैं, उनके साथ गुजरे पल याद्दाश्त से होते हैं बाहर मतलब … more →
wrote 1 year ago: हम तय नहीं करेंगे जमाना तय करेगा कि ज़िंदा आदमी की इज्ज़त क्या होगी, मर गया जो उसको कैसे जन्नत नसीब हो … more →
wrote 1 year ago: कितनी बार भी भूख लगी खाने पर मिट गयी, कितनी प्यास भी लगी पानी मिलने पर मिट गयी, मगर पड़ी जो दिल में द … more →
wrote 1 year ago: जोश का समंदर दिल में पैदा कर लो। बहते जाओ नाव की तरह तेज चलती हवाऐं उठती हुई ऊंची लहरें तुम्हें डुबा … more →
wrote 1 year ago: पत्थरों पर है टिकी है आस्था उन पर पाँव मत रखना वरना टूट जाएंगी, धरती को चाहे जितना रौंदते रहो मगर पर … more →
wrote 1 year ago: लापता हो गये हाड़मांस के असली शेर, कुछ बीते इतिहास में दर्ज थे कुछ आज भी नए जमाने में काग … more →
wrote 1 year ago: अपना दर्द बयान करते करते हमारी जुबां थक गयी पर पता नहीं गले तक मुसीबत में डूबे इस जहां में किसी ने स … more →
wrote 1 year ago: लापता हो गये हाड़मांस के असली शेर, कुछ बीते इतिहास में दर्ज थे कुछ आज भी कागजों में दिख रहे हैं। नए ज … more →
wrote 1 year ago: जिम्मेदारी वह सारे समाज की यू ही नहीं उठाते, मिलता कमीशन, खरीदकर घर का सामान जुटाते। बह रही दौ … more →
wrote 1 year ago: अब मंच और पर्दे के नाटक नहीं किसी को भाते हैं, खबरों के लिए होने वाले प्रायोजित आंदोलन और अनशन ही मन … more →
wrote 1 year ago: उधार की रौशनी में जिंदगी गुजारने के आदी लोग अंधेरों से डरने लगे हैं, जरूरतों पूरी करने के लिये इधर स … more →
wrote 1 year ago: बड़ों बड़ों की चाल चलन में खोट हो गयी है, फिर भी छिप जाते हैं उनको बड़प्पन की ओट हो गयी है। कहें दीपक ब … more →
wrote 1 year ago: दौलत की भूख कभी नहीं मिटती सोना चाहे जितना भर जाये तिजोरी में दिल में पाने की लालच फिर भी बढ़ जायेगी। … more →
wrote 1 year ago: पहाड़ से टूटा पत्थर दो टुकड़े हो गया, एक सजा मंदिर में भगवान बनकर दूसरा इमारत में लगकर गुमनामी में खो … more →
wrote 2 years ago: वह कभी विकास विकास तो कभी शांति शांति का नारा लगाते हैं। कौन समझाये उनको बैलगाड़ी युग में लौटकर ही शा … more →
wrote 2 years ago: दर दर से वफा के नाम पर धोखा खाते हुए यकीन टूट गया लगता है, पर घर घर में टूटे हुए दिलों को रोता देखकर … more →
wrote 2 years ago: पोते ने का दादाजी से ‘कल हम सब बच्चे अपनी शिक्षिका के साथ भ्रष्टाचार विरोधी रैली में जायेंगे, खूब जो … more →