Blogs about: Hindi Shayri

Featured Blog

हम सुपरकूल हैं-हिन्दी लेख (hum supercool hain-hindi article or lekh)

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago:                           अमेरिका की एक फिल्म की चर्चा पढ़ने का मिली जिसमें एक पात्र से कहलाया गया है … more →

टैग: हिन्दी, समाज, Hindi Poem, दीपक भारतदीप, हिन्दी साहित्य, Samaj, मनोरंजन, हिन्दी शायरी, Hindi Literature

फिक्स और मिक्स-हिन्दी व्यंग्य कविता (fix or mix-hindi satire poem)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हैरानी है यह देखकर कुछ लोगों को कभी हादसे तो कभी हमले भी फिक्स क्यूँ  लगते हैं। कहें दीपक बापू … more →

टैग: हिंदी, समाज, मनोरंजन, Samaj, हिन्दी साहित्य, Entertainment, Hindi Literature, Society, दीपक भारतदीप

धोखा और वफा भी-हिन्दी शायरी 5 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रिश्ते जो दूर हो गये यादों में धुंधले हो जाते हैं, उनके साथ गुजरे पल याद्दाश्त से होते हैं बाहर मतलब … more →

टैग: हिन्दी, समाज, Hindi Poem, हिन्दी कविता, दीपक भारतदीप, hindi sahitya, हिन्दी साहित्य, मस्तराम, Samaj

जिंदा आदमी की इज्जत-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हम तय नहीं करेंगे जमाना तय करेगा कि ज़िंदा आदमी की इज्ज़त क्या होगी, मर गया जो उसको कैसे जन्नत नसीब हो … more →

टैग: हिन्दी, दीपक भारतदीप, Deepak bharatdeep, hindi kavita, हिन्दी साहित्य, मस्तराम, समाज, masti, Manoranjan

भलाई का करार और दिल में दरार-हिन्दी कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कितनी बार भी भूख लगी खाने पर मिट गयी, कितनी प्यास भी लगी पानी मिलने पर मिट गयी, मगर पड़ी जो दिल में द … more →

टैग: हिन्दी, हिन्दी साहित्य, hindi sahitya, समाज, मनोरंजन, मस्ती, masti, Society, Manoranjan

यह मुमकिन नहीं है-हिन्दी शायरी (yah mumkin hain hai-hindi shayari)

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जोश का समंदर दिल में पैदा कर लो। बहते जाओ नाव की तरह तेज चलती हवाऐं उठती हुई ऊंची लहरें तुम्हें डुबा … more →

टैग: हिन्दी, Hindi Poem, हिन्दी साहित्य, mastram, समाज, masti, मस्ती, मनोरंजन, Manoranjan

पत्थरों पर टिकी आस्था-हिन्दी व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पत्थरों पर है टिकी है आस्था उन पर पाँव मत रखना वरना टूट जाएंगी, धरती को चाहे जितना रौंदते रहो मगर पर … more →

टैग: हिन्दी, हिन्दी साहित्य, समाज, हिन्दी शायरी, मनोरंजन, Manoranjan, hindi sahitya, Samaj, HINDI Shayari

कागज़ खाने वाले शेर-हिन्दी व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लापता हो गये हाड़मांस के असली शेर, कुछ बीते इतिहास में दर्ज थे कुछ आज भी नए जमाने में   काग … more →

टैग: हिन्दी, hindi sahitya, समाज, हिन्दी साहित्य, हिन्दी शायरी, मनोरंजन, masti, मस्ती, Society

अपनी जुबान-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपना दर्द बयान करते करते हमारी जुबां थक गयी पर पता नहीं गले तक मुसीबत में डूबे इस जहां में किसी ने स … more →

टैग: हिन्दी, हिन्दी साहित्य, समाज, Samaj, मस्ती, hindi sahitya, मनोरंजन, Society, hindi poem literature

कागज के शेर-हिन्दी व्यंग्य कविता kagaj ke sher or loin of paper-hindi satire poem)

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लापता हो गये हाड़मांस के असली शेर, कुछ बीते इतिहास में दर्ज थे कुछ आज भी कागजों में दिख रहे हैं। नए ज … more →

टैग: हिन्दी, हिन्दी साहित्य, hindi sahitya, हिन्दी शायरी, समाज, मनोरंजन, मस्ती, masti, hindi entertainment

जिम्मेदारी में कमीशन-हिन्दी कविता (jimmedar aur commision-hindi kavita)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिम्मेदारी वह सारे समाज की यू ही नहीं उठाते, मिलता कमीशन, खरीदकर घर का सामान जुटाते। बह रही  दौ … more →

टैग: हिन्दी, mastram, हिन्दी शायरी, समाज, मस्तराम, Samaj, Hindi Poem, masti, हिन्दी साहित्य

आपसी द्वन्द्व-हिन्दी कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब मंच और पर्दे के नाटक नहीं किसी को भाते हैं, खबरों के लिए होने वाले प्रायोजित आंदोलन और अनशन ही मन … more →

टैग: व्यंग्य, हिन्दी शेर, हिन्दी पत्रिका, मस्तराम, समाज, Samaj, mastram, मस्ती, masti

आसमान से रिश्ते तय होकर आते हैं-हिन्दी कविताएँ 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उधार की रौशनी में जिंदगी गुजारने के आदी लोग अंधेरों से डरने लगे हैं, जरूरतों पूरी करने के लिये इधर स … more →

टैग: हिन्दी, hindi kavita, विचार, हिन्दी कविता, sandesh, हिन्दी साहित्य, Vichar, संदेश, मस्तराम

महंगी लंगोट-हिन्दी हास्य व्यंग्य कवितायें (mahangi langot-hindi hasya vyangya kavitaen)

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बड़ों बड़ों की चाल चलन में खोट हो गयी है, फिर भी छिप जाते हैं उनको बड़प्पन की ओट हो गयी है। कहें दीपक ब … more →

टैग: हिन्दी, मनोरंजन, मस्तराम, मस्ती, समाज, हिन्दी शायरी, हिन्दी साहित्य, bojh, hindi sahitya

तड़प शौहरत की हमेशा सताती-हिन्दी व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दौलत की भूख कभी नहीं मिटती सोना चाहे जितना भर जाये तिजोरी में दिल में पाने की लालच फिर भी बढ़ जायेगी। … more →

टैग: हिन्दी, मनोरंजन, समाज, हिन्दी साहित्य, hindi sahitya, मस्ती, hindi entertainment, Manoranjan, Society

पहाड़ से टूटे पत्थर-हिन्दी व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पहाड़ से टूटा पत्थर दो टुकड़े हो गया, एक सजा मंदिर में भगवान बनकर दूसरा इमारत में लगकर गुमनामी में खो … more →

टैग: हिन्दी, शेर-ओ-शायरी, हिंदी, hindi, साहित्य, Hindi Poem, व्यंग्य, दृष्टिकोण, विचार

कार और बैलगाड़ी-हिन्दी शायरियां (kar and bailgadi-hindi shayriyan)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: वह कभी विकास विकास तो कभी शांति शांति का नारा लगाते हैं। कौन समझाये उनको बैलगाड़ी युग में लौटकर ही शा … more →

टैग: इंटरनेट, दीपक भारतदीप, मनोरंजन, मस्तराम, मस्ती, समाज, हिन्दी साहित्य, hindi kavita, Hindi Literature

बिना ज़मीर के जिये जाते हैं-हिन्दी शायरियां (bina zamir ke jiye jate hain-hindi shayriyan)

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दर दर से वफा के नाम पर धोखा खाते हुए यकीन टूट गया लगता है, पर घर घर में टूटे हुए दिलों को रोता देखकर … more →

टैग: हिंदी, समाज, मनोरंजन, hindi sahitya, Samaj, हिन्दी साहित्य, masti, मस्तराम, मस्ती

हिन्दी हास्य कविता-नारे लगाने से भ्रष्टाचार नहीं मिटता (hindi hasya kavita-nare lagane se bhrashtachar nahin mital)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पोते ने का दादाजी से ‘कल हम सब बच्चे अपनी शिक्षिका के साथ भ्रष्टाचार विरोधी रैली में जायेंगे, खूब जो … more →

टैग: हिन्दी, हास्य कविता, हिन्दी साहित्य, मस्तराम, मस्ती, मनोरंजन, Manoranjan, hindi sahitya, hindi humor poem


Related Tags
All →

Follow this tag via RSS