अतीत के गुजरे पल ही दिमाग को इस तरह सताते कि भविष्य के सपने सामने चले आते साथ चलता तो है बस आज का सच जो बहुत लगता है बहुत कठोर उससे बचने के लिये सपनों को ही बुने जाते अगर सच हो गया तो ठीक बिखर गया तो … more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हमने देखा था उगता सूरज उन्होने देखा डूबता हुआ वह कर रहे थे चंद्रमा की रौशनी में जश्न मनाने की तैयारी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अखबार में छपी हर खबर पुरानी नहीं हो जाती है। कहीं धर्म तो कहीं भाषा और जाति के झगड़ों में फंसे इंसानी … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कभी शब्द नहीं बनता अकेला शब्द कभी भाषा नहीं बनता। कई मिलकर बनाते हैं एक भाव समूह जिससे उनका निज परिच … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: डरपोक लोगों के समाज में बहादुर बाहर से किराये पर लाये जाते हैं. किसी गरीब को न देना पड़े मुआवजा इसलिए … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: उसने कहा कवि से ‘तू क्यों कविता लिखता है सारे जमाने का दर्द समेट कर अपने शब्दों में अपनी ही पीड़ाओं … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: रात की रौशनी में चमकने वाले चेहरे सुबह सूरज की पहली किरण में ही फक नजर आते हैं। सौंदर्य के सच की धूप … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: बना लिया है पूरी दुनिया को उन्होंने अपना एक बड़ा बाजार चला रहे सभी जगह अपना व्यापार पर टुकड़ों में ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अतीत के गुजरे पल ही दिमाग को इस तरह सताते कि भविष्य के सपने सामने चले आते साथ चलता तो है बस आज का सच … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ लोग होते हैं पर कुछ दिखाने के लिये बन जाते लाचार अपनी वेदना का प्रदर्शन करते हैं सरेआम लुटते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बिकने के लिए तैयार है तो फिर सौदे जैसा लिख और दिख बाज़ार के कायदे हैं अपने जहां मत देख ईमानदार बने रह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक बच्चे के पैदा होने पर घर में खुशी का माहौल छा जाता है भागते हैं घर के सदस्य इधर-उधर जैसी कोई आसमा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस दिन ब्लागर अपने कमरे में बैठा लिख रहा था तभी उसे बाहर से आवाज सुनाई दी जो निश्चित रूप से दूसरे ब् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लुट जाने का खतरा अब गैरो से नहीं सताता अपनों को ही यह काम अच्छी तरह अब करना आता पहरेदारी अपने घर की … more →