कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अल्मारी में बंद किताबों को जलाकर कर रख कर दिया तलवारों से बहाकर खून की नदियां राहगीरों को दर-ब-दर कर … more →
**दीपक भारतदीप की हिंदी साहित्य-पत्रिका** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi Patrika***दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उसने कहा कवि से ‘तू क्यों कविता लिखता है सारे जमाने का दर्द समेट कर अपने शब्दों में अपनी ही पीड़ाओं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: रात की रौशनी में चमकने वाले चेहरे सुबह सूरज की पहली किरण में ही फक नजर आते हैं। सौंदर्य के सच की धूप … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: बना लिया है पूरी दुनिया को उन्होंने अपना एक बड़ा बाजार चला रहे सभी जगह अपना व्यापार पर टुकड़ों में ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अतीत के गुजरे पल ही दिमाग को इस तरह सताते कि भविष्य के सपने सामने चले आते साथ चलता तो है बस आज का सच … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कुछ लोग होते हैं पर कुछ दिखाने के लिये बन जाते लाचार अपनी वेदना का प्रदर्शन करते हैं सरेआम लुटते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: बिकने के लिए तैयार है तो फिर सौदे जैसा लिख और दिख बाज़ार के कायदे हैं अपने जहां मत देख ईमानदार बने रह … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: एक बच्चे के पैदा होने पर घर में खुशी का माहौल छा जाता है भागते हैं घर के सदस्य इधर-उधर जैसी कोई आसमा … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: उस दिन ब्लागर अपने कमरे में बैठा लिख रहा था तभी उसे बाहर से आवाज सुनाई दी जो निश्चित रूप से दूसरे ब् … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: लुट जाने का खतरा अब गैरो से नहीं सताता अपनों को ही यह काम अच्छी तरह अब करना आता पहरेदारी अपने घर की … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: भारतीय योग एक प्राचीनतम विद्या मानी जाती है जिसके जनक महर्षि पतंजलि हैं। यह एक बृहद विषय है और भगवान … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: जब जज्बातों में आता ठहराव तब शब्द खामोश हो जाते स्तब्ध मन सन्नाटे में ताकता है उस समय न सोचना अच् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता है जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी अलग पहचान के लिये भीड़ से अलग होना ही पड़ता है जब चुनते हैं अपनी अलग राह छोड़नी पड़ती है साथी … more →