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Blogs about: Hindi Story

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बहस कि कामेडी-हिंदी लघु व्यंग्य (disscusion as a comedy-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उस उद्यान में ज्ञानियों के बीच देश की गरीबी मिटाने के लिये बहस चल रही थी। विषय था देश में गरीबी और श … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

महात्मा गांधी जयती-विशेष हिंदी लेख (special hinti article on gandhi jayanti)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: महात्मा गांधी के दर्शन की प्रासंगिकता आज भी है। इसमें संदेह नहीं है। अगर कहें आज अधिक है तो भी कोई ब … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, मस्तराम, संपादकीय, हिन्दी, bharat

स्वाइन फ्लू का इलाज-हास्य कविताएँ (swine flu ka ilaj-hasya kavita3 comments

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: उसने चैराहे पर मजमा लगा लिया। ‘आईये भद्रजनो, दुनियां की सबसे खतरनाक बीमारी ‘स्वाईन फ्लू’ का सही तरह … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, व्यंग्य, शब्द, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

बुत सम्मलेन में एक सवाल-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वह विशेष बुत अपना भाषाण दे रहा था। उसका विषय था समाज की समस्यायें और उनका हल। उसने अपना भाषण समाप्त … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, web duniya, web dunia, web nayi duniya

आशीर्वाद-लघुकथा2 comments

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला जा … more →

Tags: writing, हिन्दी, inglish, दीपक द्वारा, India, साहित्य, Internet, online journalism, Family

सबकी नज़र है हमारे कमाने पर -व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: रात की रौशनी में चमकने वाले चेहरे सुबह सूरज की पहली किरण में ही फक नजर आते हैं। सौंदर्य के सच की धूप … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, सृजन, हिंदी साहित्य, हिन्दी

ब्रेकिंग न्यूज (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: चंदा लेकर समाज सेवा करने वाली उस संस्था के समाजसेवी बरसों तक अध्यक्ष रहे। पहले जब वह युवा थे तब उनके … more →

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मेहरबानी कर तोहफे में जल्दी दो जुदाई-हास्य हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, कशिश, क्षणिका, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

पास के विद्वान भी बैल बन जाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू मैं हीरो का ब्लाग पढ़कर आया हिंदी तो ढंग से पढ़ना नहीं आती पर उसका अं … more →

Tags: Kavita, Global Dashboard, शेर-ओ-शायरी, inglish, शायरी, हास्य व्यंग्य, India, bharat, शेर

मै अखबार आज भी क्यों पढ़ता हूं-हास्य व्यंग्य2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:           मैने अखबार पढ़ना बचपन से ही शुरू किया क्योंकि मोहल्ले का वाचनालय हमारे किराये के घर के पास … more →

Tags: writing, vyangya, अनुगूँज, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

ब्लोगर गया अपने गुरु के पास 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक ब्लोगर पहुचा अपने गुरु के पास और चढाया प्रसाद उनकी कृपा होने पर गुरु बहुत खुश हुए और हालचाल पूछे … more →

Tags: Blogroll, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य, Shayri, Education

दादा-पोते की राजनीति और मनोरंजन 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पोता घर में घुसा तो दादा ने पूछा ‘क्या देखकर आया रिजल्ट आ गया न’ पोता बोला ”हाँ गय … more →

Tags: Blogroll, कविता, inglish, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, शेर, अनुभूति

रहीम के दोहे:घोडे में है महानता का गुण 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: यों रहीम गति बडेन की ज्यों तुरंग व्यवहार दाग दिवावत आपु तन, सही होत असवार कविवर रहीम कहते हैं की घोड … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, Dashboard, हिंदी, आलेख, साहित्य, Internet, Urdu

रहीम के दोहे:भक्त का मन तो भगवान् में ही रमता है

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते है … more →

Tags: aastha, arebic, आध्यात्म, दीपक भारतदीप, भाषा, रहीम, विचार, bharat, Blogroll

सच को बैसाखियों की जरूरत नहीं-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पत्थरों पर लिखी इबारत भी इतिहास का सच बयान नहीं करती जिसे लिखना आता है वह कुछ भी लिख सकता है लिखने प … more →

Tags: arebic, चरित्र, दीपक भारतदीप, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब, मातृभाषा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, संपादकीय

असफल लेखकों की मनमानी

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आपस में मिले दो असफल लेखक पहले पाठकों पर भंडास निकाली फिर अपना नाम किसी भी कीमत पर पत्र-पत्रिकाओं मे … more →

Tags: arebic, कविता, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, हिंदी, bharat


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