Blogs about: Hindi Story

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छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

बुत सम्मलेन में एक सवाल-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह विशेष बुत अपना भाषाण दे रहा था। उसका विषय था समाज की समस्यायें और उनका हल। उसने अपना भाषण समाप्त … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu

आशीर्वाद-लघुकथा2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला ज … more →

Tags: दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज, साहित्य, सृजन, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

सबकी नज़र है हमारे कमाने पर -व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: रात की रौशनी में चमकने वाले चेहरे सुबह सूरज की पहली किरण में ही फक नजर आते हैं। सौंदर्य के सच की धूप … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, चिन्तन, अनुभूति, हिंदी साहित्य, सृजन, web duniya, web dunia, web bhaskar

ब्रेकिंग न्यूज (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: चंदा लेकर समाज सेवा करने वाली उस संस्था के समाजसेवी बरसों तक अध्यक्ष रहे। पहले जब वह युवा थे तब उनक … more →

Tags: Global Dashboard, inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, India, yakeen, अनुभूति, हिंदी साहित्य, vividha

मेहरबानी कर तोहफे में जल्दी दो जुदाई-हास्य हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →

Tags: vews, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Internet

पास के विद्वान भी बैल बन जाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू मैं हीरो का ब्लाग पढ़कर आया हिंदी तो ढंग से पढ़ना नहीं आती पर उसका अ … more →

Tags: शायरी, शेर, शेर-ओ-शायरी, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी शायरी, bharat, Blogger

मै अखबार आज भी क्यों पढ़ता हूं-हास्य व्यंग्य2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:           मैने अखबार पढ़ना बचपन से ही शुरू किया क्योंकि मोहल्ले का वाचनालय हमारे किराये के घर के पास … more →

Tags: writing, vyangya, अनुगूँज, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

ब्लोगर गया अपने गुरु के पास 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक ब्लोगर पहुचा अपने गुरु के पास और चढाया प्रसाद उनकी कृपा होने पर गुरु बहुत खुश हुए और हालचाल पूछे … more →

Tags: arebic, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

दादा-पोते की राजनीति और मनोरंजन 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पोता घर में घुसा तो दादा ने पूछा ‘क्या देखकर आया रिजल्ट आ गया न’ पोता बोला ”हाँ … more →

Tags: arebic, अनुभूति, कला, कविता, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द

रहीम के दोहे:घोडे में है महानता का गुण 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यों रहीम गति बडेन की ज्यों तुरंग व्यवहार दाग दिवावत आपु तन, सही होत असवार कविवर रहीम कहते हैं की घो … more →

Tags: arebic, आलेख, दीपक भारतदीप, रहीम, साहित्य, हिंदी, हिन्दी, bharat, Blogroll

रहीम के दोहे:भक्त का मन तो भगवान् में ही रमता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते ह … more →

Tags: aastha, arebic, आध्यात्म, दीपक भारतदीप, भाषा, रहीम, विचार, bharat, Blogroll

सच को बैसाखियों की जरूरत नहीं-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पत्थरों पर लिखी इबारत भी इतिहास का सच बयान नहीं करती जिसे लिखना आता है वह कुछ भी लिख सकता है लिखने प … more →

Tags: Blogroll, hindi, हिंदी, Dashboard, संपादकीय, बिंब-प्रतिबिंब, प्रतिबिंब, चरित्र, व्यंग्य

असफल लेखकों की मनमानी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आपस में मिले दो असफल लेखक पहले पाठकों पर भंडास निकाली फिर अपना नाम किसी भी कीमत पर पत्र-पत्रिकाओं मे … more →

Tags: Blogroll, hindi, हिंदी, inglish, Dashboard, Global Dashboard, sher-o-shayree, कविता, shayree


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