महात्मा गांधी के दर्शन की प्रासंगिकता आज भी है। इसमें संदेह नहीं है। अगर कहें आज अधिक है तो भी कोई बुरा नहीं है। पूरे विश्व में महात्मा गांधी को अहिंसा के पुजारी के रूप में याद किया जाता है या कहें कर… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उस उद्यान में ज्ञानियों के बीच देश की गरीबी मिटाने के लिये बहस चल रही थी। विषय था देश में गरीबी और श … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: महात्मा गांधी के दर्शन की प्रासंगिकता आज भी है। इसमें संदेह नहीं है। अगर कहें आज अधिक है तो भी कोई ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: उसने चैराहे पर मजमा लगा लिया। ‘आईये भद्रजनो, दुनियां की सबसे खतरनाक बीमारी ‘स्वाईन फ्लू’ का सही तरह … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की म … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वह विशेष बुत अपना भाषाण दे रहा था। उसका विषय था समाज की समस्यायें और उनका हल। उसने अपना भाषण समाप्त … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला जा … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: रात की रौशनी में चमकने वाले चेहरे सुबह सूरज की पहली किरण में ही फक नजर आते हैं। सौंदर्य के सच की धूप … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: चंदा लेकर समाज सेवा करने वाली उस संस्था के समाजसेवी बरसों तक अध्यक्ष रहे। पहले जब वह युवा थे तब उनके … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू मैं हीरो का ब्लाग पढ़कर आया हिंदी तो ढंग से पढ़ना नहीं आती पर उसका अं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैने अखबार पढ़ना बचपन से ही शुरू किया क्योंकि मोहल्ले का वाचनालय हमारे किराये के घर के पास … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक ब्लोगर पहुचा अपने गुरु के पास और चढाया प्रसाद उनकी कृपा होने पर गुरु बहुत खुश हुए और हालचाल पूछे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पोता घर में घुसा तो दादा ने पूछा ‘क्या देखकर आया रिजल्ट आ गया न’ पोता बोला ”हाँ गय … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: यों रहीम गति बडेन की ज्यों तुरंग व्यवहार दाग दिवावत आपु तन, सही होत असवार कविवर रहीम कहते हैं की घोड … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते है … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पत्थरों पर लिखी इबारत भी इतिहास का सच बयान नहीं करती जिसे लिखना आता है वह कुछ भी लिख सकता है लिखने प … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आपस में मिले दो असफल लेखक पहले पाठकों पर भंडास निकाली फिर अपना नाम किसी भी कीमत पर पत्र-पत्रिकाओं मे … more →