Blogs about: Hindi Vichar

भर्तृहरि शतकः कामदेव करते हैं इस विश्व में अद्भुत लीला1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कृशः काणः खञ्ज श्रवणरहितः पुच्छविकलो व्रणी पूयक्लिनः कृमिकुलशतैरावुततनु क्षुधाक्षामो जीर्णः पिठरककाप … more →

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मनु स्मृति: जो कार्य हृदय को कष्ट दे उसे न करें

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: १.जो कार्य दूसरों के अधीन रहकर ही किये जा सकते हैं उनको पूरी तरह त्याग देना ही श्रेयस्कर है, तथा अप … more →

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रहीम के दोहे:अपनी पीडा दूसरों को सुनाकर उपहास का पात्र नहीं बने

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन निज मन की बिधा, मन ही राखो गोय सुनि अठिलैहैं लोग सब, बांटि न लैहैं कोय कविवर रहीम कहते है अपन … more →

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रहीम के दोहेःहमारे शरीर में विपत्तियां सहने की क्षमता होती है अधिक

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जसी परै सो सहि रहै, कहि रहीम यह देह धरती पर ही परत है, शीत घाम और मेह कविवर रहीम कहते हैं कि इस मानव … more →

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रहीम के दोहे:परमात्मा का महत्व स्वीकार करना चाहिए

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन करि सम बल नहीं, मानत प्रभु की धाक दांत दिखावत दीन है, चलत घिसावत नाक कविवर रहीम कहते हैं की ह … more →

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रहीम के दोहे:किसी के कहने से बड़े लोग छोटे नहीं हो जाते3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं गिरधर मुरलीधर कहे, कछु दुख मानत नाहिं कविवर रहीम कहते हैं … more →

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मनुस्मृतिःईमानदारी से धन कमाना ही है सबसे बड़ी पवित्रता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सर्वैषामेव शौचानामर्थशौचं परं स्मृतम् योऽथेंशुचिहिं स शुचिर्न मृद्वारिशुचिः शुचिः जीवन में पवित्रता … more →

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मनुस्मुतिःस्त्रियों का सम्मान न हो तो शुभकर्मों का फल भी नहीं मिलता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:  पिर्तभिभ्रौतृभिश्चैता पतिभिदैवरैस्तथा पूज्या भूषयितव्याश्च बहुकल्याणमीप्सुभिः विवाह के समय अपने कल् … more →

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मनुस्मृतिःविषयी लोग कभी सिद्ध नहीं होते1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इंद्रिवाणां प्रसङगेन दोषमृच्छ्रत्यसंशयम् सन्न्यिम्य तु तान्येव ततः सिद्धिं निगच्छति इस विश्व में सभ … more →

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मनुस्मृति:अपनी इच्छाओं के दास नही स्वामी बनें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: न जातु कामा कामानामुपभोगेन शाम्यति हविपा कृष्णावत्र्मेव भूव एवाभिवर्धते जिस प्रकार अग्नि में … more →

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चाणक्य नीति:सुपात्र को दान देने वाला ही सच्चा वीर 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.अर्थ कार्यों का मूल होता है राज्यश्री ही राज्यशक्ति के कर्मों का मूल आधार होती है. लौकिक काम तो … more →

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चाणक्य नीति:परमात्मा ने सोने में सुगन्ध नहीं डाली 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। अपनी असफलता और दूसरे की सफलता से मनुष्य ईर्ष्यालु हो जाता। ईर्ष्या … more →

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अपनी मनस्थिति के अनुसार लिखता है आदमी-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिन्दी बृहद भारत की एक मात्र भाषा है और उसको लिखने वाले चारों तरफ फैले हुए हैं. ऐसे में अंतर्जाल पर … more →

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इसलिए कवि हमेशा अकेले हो जाते-कविता साहित्य 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इंसानों की भीड़ में कभी दर्द. कभी प्रेम और हास्य से सुसज्जित शब्दों से रचनाएं बरसाने वाले कवि अकेले … more →

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चाणक्य नीति:शांत व्यक्ति को दुर्बल न समझें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.युवावस्था में काम-क्रोध हावी होते हैं, इसी कारण व्यक्ति की विवेक शक्ति निष्क्रिय हो जाती है। काम व … more →

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चाणक्य नीति:पैर में धारण करने से मणि कभी कांच नहीं हो जाती

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.मन के संयम के बिना कोई दूसरा तप नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख और तृष्णा जैसा कोई भयंकर रोग नहीं है … more →

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संत कबीर वाणी:मान बढाने की चाह, कुते का लक्षण

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मान बढाई जगत में, कूकर की पहचान प्यार किए मुख चाटई, बैर किए तन हान संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →

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रहीम के दोहे:ह्रदय कुएँ से अधिक गहरा नहीं होता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन थोरे दिनन को, कौन करे मुहँ स्याह नहीं छलन को परतिया, नहीं कारन को ब्याह कवि रहीम कहते हैं कि क … more →

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