दीपक बापू तेजी से अपनी राह चले जा रहे थे कि पान की एक दुकान के पास खड़े आलोचक महाराज ने उनको आवाज देकर पुकारा-‘अरे, ओए फ्लाप कवि कहां जा रहे हो, कहीं सम्मान वम्मान का जुगाड़ करना है क्या?’ दीपक बापू चैं… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: एक चीनी ने अपना ऐसा धंधा प्रारंभ किया है जो यकीनन अनोखा है। ऐसा अनोखा धंधा तो कोई दूसरा हो ही नहीं स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: दीपक बापू तेजी से अपनी राह चले जा रहे थे कि पान की एक दुकान के पास खड़े आलोचक महाराज ने उनको आवाज देक … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा को शांति के लिये नोबल पुरस्कार मिलने पर स्वयं उनको ही बहुत बड़ा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: सुबह दीपक बापू सड़कों पर पानी से भरे गड्ढों में गिरने से बचते हुए जल्दी जल्दी ही आलोचक महाराज के घर प … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: राजा नल ने जुआ खेली और उसमें हारने पर राज्य और परिवार त्यागकर वन में जाकर दूसरे की सेवा करनी पड़ी। अत … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आखिर यह कोई सुनियोजित एजेंडा है या अनजाने में बन गयी सोच कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और धर्मों पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: स्वाईन फ्लू की बीमारी ने आते ही देश में प्रसिद्धि आई। इतने इंतजार के बाद, आखिर शिकार ढूंढते विदेश से … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: पर्दे के पीछे से आशय फिल्म या नाटक से नहीं है बल्कि भीड़ के अलग हटकर किये जा रहे विरोधाभासी व्यवहार स … more →