दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हम अक्सर अपने संस्कार और संस्कृति के संपन्न होने की बात करते हैं। कई बार आधुनिकता से अपने संस्कार औ … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: वैसे तो अपने देख के लोगों की यह पूरानी आदत है कि वह हर तरफ अपने को श्रेष्ठ साबित करना चाहते हैं और अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: मैं अंतर्जाल को एक मायाजाल ही मानता हूं। इसमें मेरे अनुभव अजीब तरह के हैं। अनेक लोग मुझसे मेरे बारे … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अंतर्जाल वाकई एक बहुत बड़ा मायाजाल है। हिंदी के समस्त ब्लाग एक जगह दिखाये जाने वाले फोरमों पर आपस मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: लुट जाने का खतरा अब गैरो से नहीं सताता अपनों को ही यह काम अच्छी तरह अब करना आता पहरेदारी अपने घर की … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: वह लेखक मंदिर के अंदर गया और वहां से बाहर लौटा तो गेहूंआ कुर्ता और सफेद धोती पहले और माथे पर लाल ति … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: अपने जीवन में मैं अनेक बार पिकनिक गया हूं पर कहीं से भी प्रसन्न मन के साथ नहीं लौटा। वजह यह कि बरसा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गीत और संगीत से दिल मिल जाते हैं पर अब तो उसकी परख के लिये प्रतियोगितायें को अब वह महायुद्ध कहकर जमक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने संगठन का चिंतन शिविर उन्होंने किसी मैदान की बजाय अब एक होटल में लगाया जहां सभी ने मिलकर अपना स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन का समंदर है गहरा जहां ख्याल तैरते हैं जलचर की तरह कुछ मछलियां सुंदर लगती हैं कुछ लगते हैं खौफनाक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मुझे विस्मय इस बात का है कि कबीरदास जी के मात्र दोहे और उनका अनुवाद प्रस्तुत करने वाले उस पाठ पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यूं तो चमकता चाँद देखकर अपना दिल बहला लेते पर जब आकाश में नहीं दिखता वह छोटा चिराग जला लेते हैं जिन् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू तुम्हारे हिट होने का एक नुस्खा लाया हूं सफलता बतलाने वाले डाक्टर से स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भीड़ में हमेशा खोते रहे अपने से न मिलने के गम में रोते रहे नहीं ढूंढा अपने को अंदर आदमी होकर भी रहा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने दर्द से भला कहां हमारे आंखों में आसू आते हैं दूसरों के दर्द से ही जलता है मन उसी में सब सूख जात … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सूरज की गर्मी में झुलसते हुए पानी में नहा गया था बदन जलती हवाओं में गर्म मोम की तरह पिघल रहा था मन च … more →