कविता सजधज तैयार हो गयी। उसका पति कवि बाहर स्कूटर पर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था। उसे तैयार होता देख सविता अंदर ही अंदर सुलग रही थी। उसके समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपना गुस्सा कहां प्रकट करे। उसका पत… more →
*** दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता-पत्रिका*** mastram Deepak Bharatdeep ki hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: कविता सजधज तैयार हो गयी। उसका पति कवि बाहर स्कूटर पर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था। उसे तैयार होता देख स … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: शायद कुछ समाज सुधारकों को यह बुरा लगे पर सच यही है कि इस धरती पर पैदा हर जीव की नस्ल होती है और उसमे … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: असली इंसानों के चेहरे अब बुत की तरह नजर आते। लिखता कोई और संवाद, वह बोलते हुए दिख जाते।। बहुत पढ़ लि … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कृशः काणः खञ्ज श्रवणरहितः पुच्छविकलो व्रणी पूयक्लिनः कृमिकुलशतैरावुततनु क्षुधाक्षामो जीर्णः पिठरककाप … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कुत्ता कहा तो क्या इनाम तो दिया आखिर गोरों ने दिया गुलाम की तरह व्यवहार किया तो क्या थप्पड़ मारकर सल … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: पृथ्वी के भ्रुण में पानी की जगह हो गयी पोली । पिचकारी में रंग नहीं भरता, कैसे मनायें प्रियतम होली।। … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: १.जो कार्य दूसरों के अधीन रहकर ही किये जा सकते हैं उनको पूरी तरह त्याग देना ही श्रेयस्कर है, तथा अप … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: रहिमन धोखे भाव से, मुख से निकले राम पावत पूरन परम गति, कामादिक कौ धाम कविवर रहीम कहते हैं कि अगर धो … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कबीर तो सांचै मतै, सहै जू सनमुख वार कायर अनी चुभाय के, पीछे झखै अपार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: वह किसी मकान के लिये बन रही नींव के लिये गड्ढा खोद रहा था। उसके पास ही थोड़ी दूर स्थित मैदान में गरी … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: तावन्महत्तवं पाण्डित्यं कुलीनत्वं विवेकता यावज्जवलति नांगेषु हतः पञ्वेषु पावकः हिंदी में भावार्थ-हृद … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सुनने में आया है कि मंदी की वजह से आतंकवादी भी पस्त हो रहे हैं। एक टीवी चैनल के अनुसार पाकिस्तान अप … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: इसलिये कहते हैं कि दूसरे के अपमान पर कभी नहीं हंसना चाहिये क्योंकि स्वयं को भी कभी ऐसी स्थिति का साम … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आज बैठे ठाले अपने ब्लाग की पैज रैंक देखने का विचार आया तो पता लगा कि एक अन्य ब्लाग/पत्रिका ई7पत्रिका … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अगर किसी समुदाय का एक जोड़ा अपने किसी दूसरे समुदाय की रीति के अनुसार विवाह करता है तो क्या उस समुदाय … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चतुराई हरि ना मिलै, ए बातां की बात एक निस प्रेमी निराधार का गाहक गोपीनाथ संत कबीरदास जी का आशय यह है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: समाज को सुधारने की प्रयास हो या संस्कृति और संस्कारों की रक्षा का सवाल हमेशा ही विवादास्पद रहा है। … more →