मानव संसाधन हर देश की निधि होती है लेकिन बिहार का मानव संसाधन ज़बर्दस्त इस मायने में है कि यहां के लोग मज़दूरी भी कर सकते हैं, खेती भी कर सकते हैं और साथ ही सॉफ़्टवेयर इंजीनियर से लेकर हर उस क्षेत्र म… more →
Parashurama: The Great Warrior ...K M Mishra wrote 1 day ago: 27 जून की सुबह आठ बजे के लगभग कानपुर से फुरसतिया अनुप शुक्ल की मेरे मोबाइल पर काल आई । मैंने चाय प … more →
दरभंगिया wrote 3 days ago: कितना अच्छा होगा जब एक ही किताब पढ़ायी जायेगी दिल्ली से सुदूर गाँव तक. बिजली का क्या है दिल्ली में भी … more →
दरभंगिया wrote 4 days ago: लगे आपको “अप्रतिम” वह शब्द कहाँ से लाऊँ मैं. स्वरचित अज्ञान शिविर में जब तड़प रहा हूँ हर … more →
योगेन्द्र wrote 4 days ago: (मई 17, 2009 की पोस्ट के आगे) अपने देश की संघीय ‘राजभाषा’ हिंदी एवं विभिन्न प्रदेशों की अपनी-अपनी ‘र … more →
K M Mishra wrote 6 days ago: =>सखी, इस भीषण गर्मी में चार कोस दूर तालाब से मटकी में पानी भर कर लाते-लाते मेरे पैरों में छा … more →
K M Mishra wrote 1 week ago: =>मेरे बच्चों, अब मैं तुमको और दूध नहीं पिला सकता । केन्द्र सरकार की बुरी नज़र अब मेरे तबेल … more →
दरभंगिया wrote 1 week ago: एक लड़की पर तेज़ाब डाला गया. दूसरी जींस पहन कर घूम रही थी. तीसरी ने अपनी माँ की हत्या कर दी. चौथी को स … more →
K M Mishra wrote 1 week ago: => कटिया मार कर केबल टी.वी. देखने में जो मजा है वह कनेक्शन लेकर देखने में कहां । बेचारा वर्मा, उ … more →
palakmathur wrote 1 week ago: कुछ अरमान इस दिल के, तनहा जीवन से तन्हाई मिटाने के ख़्वाब, कुछ चाहत उसे पाने की, थोड़ी आरज़ू उसमे खो … more →
दरभंगिया wrote 1 week ago: एक गाँव में एक किसान रहता था. उसके तीन बेटे थे. तीनो में कोई काम नहीं करता था. सब के सब मुफ्त की रोट … more →
palakmathur wrote 1 week ago: दर्द कितना है दिल में न जान पाओगे, हम रोज़ अपने ग़म का इश्तेहार नहीं करते, जो आँख से टपकें लहू तो बत … more →
दरभंगिया wrote 1 week ago: कुछ दिनों से सोच रहा था क्या क्या नहीं किया कितने सालों से. कि हल्के से यह दिल भींचा आंख मली कि समझ … more →
दरभंगिया wrote 2 weeks ago: इधर कुछ बकवास कवितायें पढ़ने को मिली, तो सोचा पोपुलारिटी बढ़ाने के लिए हम भी एक बकवास लिखें. हो सकता … more →
योगेन्द्र wrote 2 weeks ago: पिछले कुछ समय से मैं एक प्रश्न का ‘संतोषप्रद’ उत्तर (महज उत्तर नही, संतोषप्रद उत्तर!) पाने की चेष्टा … more →
दरभंगिया wrote 2 weeks ago: बेकार की लफ्फाजी ही करनी है ना! तो कर देंगे. और बन जायेगी एक कविता. बिन अर्थ, बेकार. ऐसा नहीं है. हर … more →
K M Mishra wrote 3 weeks ago: => आइये, आइये तशरीफ लाइये । नोश फरमाइये, मेरे हाथ का बना हुआ ”शीतल मीठा जल“ । ऐसे बनाएं ”शीतल … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 3 weeks ago: रंग महौब्बत का है ताउम्र चमकता रहता है । इस नगरी में जादु है गुलाल बरसता रहता है । क्या तुम से म … more →
K M Mishra wrote 3 weeks ago: =>ये लो, खैरात । हमारी आदत है कि पहले अपनी कुटिल नीतियों से किसी देश को भिखारी बना देते हैं, फिर … more →
mequitnever wrote 3 weeks ago: आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज … more →