दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे यह ब्लाग/पत्रिका भी आज बीस हजार की पाठक संख्या को पार कर गया। ऐसा करने वाला यह तीसरा ब्लाग/पत्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने ——– अब रात के अंधेरो से ज्यादा दिन की रौशनी में अपनों की अँधेरी नीयत से लोग … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ऐसा लगता है कि हमने पाश्चात्य सभ्यता को अपनाया पर कुछ लेट हो गये और यही कारण है कि कहीं न तो स्व … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपने मुहँ से बढ़ाएं, अपनी बात का भाव दुसरे को दें नसीहत, अपने मन में दुर्भाव न वाणी में मिठास, न वि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: किसी राई जैसे शब्द को रचना के पहाड़ में मत बदलना नहीं तो लेखक की बजाए साहित्य के पंसारी कहलाओगे अपन … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मुझे कोई गुरू नहीं मिला, इसीलिये आध्यात्म विषयों पर बडे संकोच के साथ लिखता और विचार व्यक्त करता हूँ। … more →