दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: माला फेरै कह भयो, हिंरदा गाठि न खोय। गुरु चरनन चित राखिये, तो अमरापुर जोय।। माला तो कर में फिरै, ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि ———————— तारा मण् … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: मैं अंतर्जाल को एक मायाजाल ही मानता हूं। इसमें मेरे अनुभव अजीब तरह के हैं। अनेक लोग मुझसे मेरे बारे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और एक किताब हाथ में थमाते हुए बोला ‘दीपक बापू, लो पकड़ लो यह किताब ‘लिखने के नुस्खें सीख … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के शिखर पर बैठे लोग हांकते हैं ऐसे आदमी को जैसे भेड़-बकरी हों जो न बोले न कहे न देखे उनके काले … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पाहन पानी पूजि से, पचि मुआ संसार भेद अलहदा रहि गयो, भेदवंत सो पार संत शिरोमणि कबीदासजी कहते हैं कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अर्थाधीतांश्च यैवे ये शुद्रान्नभोजिनः मं द्विज किं करिध्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः जिस प्रकार विषहीन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘क्या दीपक बापू किक्रेट भूल गये देखना पता नहीं तुम्हें अब यहां क्रिकेट मैच चल रह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आंखों देखा घी भला, ना सुख मेला तेल साधू सों झगडा भला, ना साकट सों मेल आंखों से देखा घी का दर्शन भी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हस्ती चढ़िए ज्ञान की, सहज दुलीचा डार श्वान रूप संसार है, भूंकन दे झकमार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढि कूपहु ते कहुं होत है, मन काहु को बाढि कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दिल में हो कड़वाहट तो मीठा कैसे लिखें उदासी हो दिल में, चेहरे से हँसते कैसे दिखें कितना कठिन अपने को … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: माया मया सब कहैं, माया लखै न कोय जो मन में ना उतरे, माया कहिए सोय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक कहैं कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक संत कबीर जी का कहना है की गाली आते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रात्रि में चन्दा बिखेरता अब भी पहले की तरह शीतल चांदनी पर उसका आनन्द उठाएँ कौन दूरदर्शन और कम्प्यूटर … more →