रामचरित मानस लिखने के 387 वर्ष बाद एक संत ने यह शोध प्रस्तुत किया है कि उसमें व्याकरण और भाषा की तीन हजार गल्तियां हैं। हाय! भगवान राम जी के भक्त यह सुनकर उद्वेलित हो जायेंगे कि ‘देखो, रामचरित मानस का… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: रामचरित मानस लिखने के 387 वर्ष बाद एक संत ने यह शोध प्रस्तुत किया है कि उसमें व्याकरण और भाषा की तीन … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नाम कुछ दूसरा था पर नायिका सविता भाभी रखकर वह सच का सामना प्रतियागिता में पहुंची और एक करोड़ कमाया। प … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: माला फेरै कह भयो, हिंरदा गाठि न खोय। गुरु चरनन चित राखिये, तो अमरापुर जोय।। माला तो कर में फिरै, जीभ … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि ———————— तारा मण् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं अंतर्जाल को एक मायाजाल ही मानता हूं। इसमें मेरे अनुभव अजीब तरह के हैं। अनेक लोग मुझसे मेरे बारे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और एक किताब हाथ में थमाते हुए बोला ‘दीपक बापू, लो पकड़ लो यह किताब ‘लिखने के नुस्खें सीख … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के शिखर पर बैठे लोग हांकते हैं ऐसे आदमी को जैसे भेड़-बकरी हों जो न बोले न कहे न देखे उनके काले … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पाहन पानी पूजि से, पचि मुआ संसार भेद अलहदा रहि गयो, भेदवंत सो पार संत शिरोमणि कबीदासजी कहते हैं कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अर्थाधीतांश्च यैवे ये शुद्रान्नभोजिनः मं द्विज किं करिध्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः जिस प्रकार विषहीन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘क्या दीपक बापू किक्रेट भूल गये देखना पता नहीं तुम्हें अब यहां क्रिकेट मैच चल रह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आंखों देखा घी भला, ना सुख मेला तेल साधू सों झगडा भला, ना साकट सों मेल आंखों से देखा घी का दर्शन भी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हस्ती चढ़िए ज्ञान की, सहज दुलीचा डार श्वान रूप संसार है, भूंकन दे झकमार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढि कूपहु ते कहुं होत है, मन काहु को बाढि कविवर रहीम कहते हैं की जि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दिल में हो कड़वाहट तो मीठा कैसे लिखें उदासी हो दिल में, चेहरे से हँसते कैसे दिखें कितना कठिन अपने को … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: माया मया सब कहैं, माया लखै न कोय जो मन में ना उतरे, माया कहिए सोय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि … more →