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रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →

Tags: adhyatm, alekh, Anubhuti, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, मस्तराम, शब्द

मनुष्य के अलावा कोई दूसरा प्राणी समलैंगिक नहीं होता-संपादकीय (ariticle on homsexuality)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: समलैंगिक मामले पर न्यायालय का निर्णय शिरोधार्य! लोगों के अपने दैहिक संबंधों पर स्वयं ही निर्णय करने … more →

Tags: अभिव्यक्ति, मनोरंजन, मस्तराम, व्यंग्य, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

Atmadev Ka Svabhav

ekantsatsang wrote 5 days ago: Sant Shri Asaramji Amritvani Sant Shri Asaramji Ashram , Haridwar 14 May 2009 Satsang ke Mukhya Ans … more →

Tags: Shri Yogvasisth Satsang, asaram, asarambapu, asharam bapu asaramashram;, Ashram, Bapu, brahmagyan, Sadhna, sant

संत कबीर के दोहे: भक्ति और ध्यान एकांत में करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कबीर वाणी, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Dashboard

संत कबीर वाणी-दीनानाथ तो निराधार के ग्राहक हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चतुराई हरि ना मिलै, ए बातां की बात एक निस प्रेमी निराधार का गाहक गोपीनाथ संत कबीरदास जी का आशय यह है … more →

Tags: दीपक भारतदीप, हिंदी आलेख, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Hindi writing, hindu darashan, hindu dharm, hindu thinking, Hindu Thought!

चाणक्य नीति-बुरे संस्कार वालों के साथ बैठकर खाना भी न खाएं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ——————- अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्र … more →

Tags: अर्थशास्त्र, आलेख, संस्कार, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

श्री गुरुवाणी-सत्संग से विचार निर्मल होते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: ‘जो जो कथै सुनै हरि कीरतन ता की दुरमति नासु।’ सगन मनोरथ पावै नानक पूरन होवै आसु।।’’ हिंदी में भावार् … more →

Tags: adhyatm, alekh, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, सन्देश, साहित्य

विदुर नीति-जैसे दिल में ख्याल होते हैं वैसे ही बनता है नज़रिया

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →

Tags: हिन्दी, आध्यात्म, आचरण, Internet, Blogging, web duniya, web dunia, web nayi duniya, web bhasakar

भर्तृहरि शतक-बेइज्जती से भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किंचित्फलं त्यकत्वा जातिकुलाभिमानमुचितं सेवा कृता निष्फला। भुक … more →

Tags: आलेख, इंडिया, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हिंदी साहित्य, हिन्दी, Blogger, Blogging

विदुर नीति-दुष्ट को अपना राज बताना खतरनाक

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धर्माऽऽख्याने श्मशाने च रोगिणां या मतिर्भवेत्। सा सर्वदैव तिष्ठेयेत् को न मुच्येत बंधानात्।। हिंदी म … more →

Tags: अध्यात्म, दीपक भारतदीप, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, India, inlglish, Internet, jagran

संत कबीर वाणी: राम में सच्ची श्रद्धा तनाव से मुक्त करती है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: दुखिया भूखा दुख कीं, सुखिया सुख कौं झूरि सदा अजंदी राम के, जिनि सुख-दुख गेल्हे दूरि संत शिरोमणि कबीर … more →

Tags: हिन्दी, अध्यात्म, कला, धर्म, समाज, हिंदी साहित्य, dharm, hindi article, Kabir ke Dohe

मनुस्मृति- कठिन जगह पर जाने से बचें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————– अधितिष्ठेन केशांस्तु न भस्मास्थिक … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मनुस्मृति, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

रहीम दास के दोहे-बुराई का नतीजा सामने जरूर आता है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई हो … more →

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भर्तृहरि नीति शतक: धनी दोस्त से धन और दुर्जन से दया कि याचना न करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हाँ कि —————————— … more →

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संत कबीर वाणी:मिल बाँट कर खाएं वही हैं वीर

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: संत कबीर महाराज कहते हैं कि ———————– कबीर तो सांचै म … more →

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मनुस्मृति:आयु,सफ़ेद बाल और धन से ज्ञान और आचरण का महत्त्व

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ————— न हायनैर्न पालितैर्न वित्तेन न बंधुभिः । ऋ … more →

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भर्तृहरि शतकः खामोश रहने से होते ढेर सारे लाभ 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितम् छादनमज्ञतायाः। विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितना … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging

संत कबीर वाणीः अच्छा खाने को मिले तो भी बेवकूफ की संगत न करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय संत कबीर दास जी कहते हैं कि साधु … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, सन्देश, हिन्दी, हिन्दू

हिंदी ब्लॉग का कच्चा चिटठा 27 comments

Rahul Katyayan wrote 1 month ago: हिंदी मैं ब्लॉग देखना और लिखना मेरे लिए नया है और बेहद रोमांचक भी क्यूँकि मुझे पता ही नहीं था की इन् … more →

Tags: ब्लॉग, संपादन, हिंदी, hindi, Internet, Animation, अख़बार, कच्चा, चिटठा


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