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उम्मीद है हम तुम मिलेंगे
उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये दीप जलेंगे जब बसंत की धूप महकेगी उम्म… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
उम्मीद है हम तुम मिलेंगे
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये … more »
तुम नहीं तो रंग नहीं होली में
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजत … more »
किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी फिर हल्की- … more »
नग़मे खिलने लगे हैं
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है … more »
mushkil hai apna mel priye, ye pyar nahin hai khel priye,
rubisharma wrote 1 month ago: mushkil hai apna mel priye, ye pyar nahin hai khel priye, tum MA 1st division ho, main hua metric … more »
अश्को-अक्स चश्म में नहीं है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जितनी मै उन आँखों में थी उतनी और कहाँ ज … more »
तुमसे कुछ कहना है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: सुनो ज़रा दिल का तुमसे कुछ कहना है तुम् … more »
क्यों हो गया न प्यार...!
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: यह प्यार चीज़ क्या है? दीवानों का है काम … more »
पहली नज़र का पहला प्यार
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना म … more »
कभी तुम घर आओ ना
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना हम … more »
इस पुराने शहर में
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: इस पुराने शहर में कुछ पुरानी इमारतें ह … more »
नींद गहरी है रात ठहरी है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नींद गहरी है रात ठहरी है आज ख़ाबों की ब … more »
तुमको लौट के यहीं आना है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) त … more »
रक़ाबी चाँद जला दो
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: रक़ाबी चाँद जला दो यह रात चाँदनी हो जाय … more »
ख़ामोशी ही ख़ामोशी है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों मे … more »
तू एक बार देख ले पीछे मुड़के
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तू एक बार देख ले पीछे मुड़के हम हैं वही … more »
मैं मंज़िल से दूर सही
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: मैं मंज़िल से दूर सही ख़ाबों का एक घरौं … more »
सूखे हुए तिनकों को आशियाँ कहिए
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विनय प्रजापति wrote 4 months ago: सूखे हुए तिनकों को आशियाँ कहिए जो सबपे … more »
बचपन की ख़ुशबू
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: मेरे बचपन की ख़ुशबू मेरे साथ ही चलती ह … more »
