सफ़र की क्या मंजिल हो लहरों का क्या साहिल हो माझी का क्या नाव हो सपनो की क्या उड़ान हो देखते थे यह सब ,सपनों में सोचते थे यह सब, दिनों में करते थे यह सब, खेलो में सुनते थे यह सब, झुंडों में किया क्या य… more →
Nitin Jalanmequitnever wrote 9 months ago: सफ़र की क्या मंजिल हो लहरों का क्या साहिल हो माझी का क्या नाव हो सपनो की क्या उड़ान हो देखते थे यह सब … more →