विनय wrote 1 year ago: तू एक बार देख ले पीछे मुड़के हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले ऐसा यह क्या हो गया अन्जाने दिल मेरा क्यों … more →
विनय wrote 1 year ago: शाम गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों से झाँक रहा था छत पे था मैं और पुरवाई बह रही थी तेरा ख़्याल और … more →
विनय wrote 1 year ago: यादों का सागर गहरा है उसमें डूब जाऊँ तो वक़्त का हर लम्हा ठहरा है कोई काँटा-सा है जो लग गया है इक फाँ … more →