Blogs about: House

तू एक बार देख ले पीछे मुड़के

विनय wrote 1 year ago: तू एक बार देख ले पीछे मुड़के हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले ऐसा यह क्या हो गया अन्जाने दिल मेरा क्यों … more →

Tags: मेरा गीत, अकेले, अन्जाने, ख़ुशी, ग़म, घरौंदा, तड़पा, तन्हा, दिल

शाम गहरी हो रही थी

विनय wrote 1 year ago: शाम गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों से झाँक रहा था छत पे था मैं और पुरवाई बह रही थी तेरा ख़्याल और … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, ख़्याल, खिड़की, चाँद, छत, तन्हाई, पुरवाई, प्यार

यादों का सागर

विनय wrote 1 year ago: यादों का सागर गहरा है उसमें डूब जाऊँ तो वक़्त का हर लम्हा ठहरा है कोई काँटा-सा है जो लग गया है इक फाँ … more →

Tags: मेरी नज़्म, Air, आवाज़, इश्क़, काँटा, गहरा, गुल, डूबना, प्यार


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